इंडोनेशिया आदि मुस्लिम देशों में प्रभु श्रीराम सबके आराध्य हैं, हर सड़क पर रामायण एवं महाभारतकाल के दर्शन

अहमदाबाद। अच्छे मनुष्यों का निर्माण तथा सुख, शान्ति व आनन्द से भरे-पूरे परिवारों का निर्माण करना विश्व जागृति मिशन का मुख्य उद्देशय है। इस मिशन ने इसी प्रयोजन को समर्पित होकर अपनी समस्त गतिविधियां चलाई हैं। मिशन के स्थापना दिवस पर इस आध्यात्मिक परिवार के सभी अंग-अवयव अपने मूल उद्देश्यों का स्मरण रखें और अपने जीवन निर्माण के साथ-साथ अपने परिवार को सुसंस्कारी, अनुशासित, व्यवस्थित बनाते हुए आगे बढ़े तथा समाज व राष्ट्र को ऊंचा उठाने और प्रगतिशील बनाने के लिए कमर कसें।

यह आह्वान आज गुजरात के मुख्य महानगर अहमदाबाद के भाटगाम स्थित राजफार्म प्रांगण में चल रहे सत्संग समारोह की व्यासपीठ से विश्व जागृति मिशन के संस्थापक-संरक्षक सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने व्यक्त किए। वह मिशन के 28वें स्थापना दिवस पर वहां मौजूद कई हजार परिजनों तथा ज्ञान-जिज्ञासुओं को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सच्चे आध्यात्मिक पुरुष बनकर एक अलग व्यक्तित्व का स्वामी बनना और अन्य अनेकों को उस मार्ग पर चला देना वास्तव में श्रेष्ठ मानव धर्म है। यह धर्म हर किसी को निभाना ही चाहिए।

मिशन की गतिविधियों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि सबसे पिछले पायदान पर मौजूद आदिवासियों के बच्चों, अनाथ बच्चों, बाल मजदूरों की शिक्षा से इस मिशन ने अपने सेवा कार्य आरम्भ किए। वृद्धजनों की सेवा, गौ सेवा, अनाथालय, गुरुकुल आदि के साथ-साथ श्रद्धा पर्व के माध्यम से बुजुर्गों की सम्मान वापसी के कार्यक्रम मिशन ने चलाए। सत्य सनातन धर्म की पताका लेकर चल रहे विजामि ने रैगिंग रोकने का कानून बनवाने जैसे कार्य भी किए हैं।

श्रीरामनवमी पर प्रवचन करते हुए सुधांशु जी महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और मां दुर्गा जगदम्बा हैं। मर्यादाओं का पालन करने वालों पर श्रीराम कृपा बरसती है। वन गमन के समय श्रीराम ने अपने पिता, माँ, मंत्रीमंडल, सीता, लक्ष्मण, यहां तक कि वैद्य सुषेण को उस आपातकाल में भी मर्यादा सिखायी थी। उन्होंने सभी से मर्यादित जीवन जीने का आह्वान किया और कहा कि नदी, आग, हवा आदि के मर्यादा तोड़ने पर विनाशकारी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। राष्ट्रों की सीमा लांघने की मर्यादा तोड़ने पर देशों के भयंकर आपसी झगड़े खड़े हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि श्रीराम केवल भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए आराध्य हैं। सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया सहित कई देशों में इसके दर्शन आज भी होते हैं। इंडोनेशिया में श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के नाम पर भवन और सड़कें देखने को मिलती हैं। वहां रामायणकाल के अलावा महाभारतकाल के पौराणिक अतीत के भी दर्शन प्रचुर मात्रा में होते हैं। इस देश में अर्जुन को देवार्जुन, भीम को देवाभीमा कहा जाता है और उनके बड़े-बड़े स्टेच्यू लगाए गए हैं। वहां के एयरपोर्ट का नाम ‘गरुणा एयरपोर्ट’ है तथा देश की मुद्रा पर ‘भगवान गणेश’ अंकित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से भारतवर्ष के अलावा दुनिया के किसी भी देश में धर्म निरपेक्षता को कोई चोट नहीं पहुंचती। उन्होंने सभी को रामनवमी व नवरात्रि की बधाई दी।

आज की अन्तिम ध्यान-योग कक्षा में आचार्य सुधांशु जी महाराज ने नाभि-केन्द्रित ध्यान कराया और मानव शरीर में स्थित ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के केन्द्रों का ज्ञान-विज्ञान समझाया। उन्होंने ब्रह्मा को सृजनधर्मा व निर्माणकर्ता कहा और विष्णु को पोषक तथा शिव को कल्याणदाता और आनन्ददाता बताया। उन्होंने मानव स्वभाव का विश्लेषण करते हुये बताया कि अलग-अलग मनुष्य अलग-अलग स्वरूपों में जीते हैं। कहा कि हमें त्रिदेवों के गुणों को आत्मसात् कर तीनों को एक साथ जीना चाहिए।

साभार: राम महेश मिश्र, निदेशक, विश्व जागृति मिशन, नई दिल्ली।