यंग दिल इण्डिया को तंग दिल इण्डिया न बनाये-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। युवा उम्मीदों का भारत जागरण फोरम द्वारा आयोजित दो दिवसीय संवाद वार्ता मंे देश की नामचीन हस्तियों ने सहभाग किया। युवा उम्मीदों का भारत दो दिवसीय संवाद वार्ता का उद्घाटन भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, श्री अमिताभ कंात जी, श्री रविशंकर प्रसाद जी, डा यतनपाल सिंह बलहारा जी, श्री जनार्दन द्विवेदी जी, श्रीमती स्मृति ईरानी जी, आरिफ मोहम्मद खान, कृष्ण गोपाल, श्री अभिनव प्रकाश, श्री करण जौहर, श्री अरूण जेटली जी, अभिनेता अक्षय कुमार जी किया और अपने ओजस्वी विचार व्यक्त किये।
 भारतीय संस्कृति नामक पुस्तक और उनके विचारों के लिये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने श्री नरेन्द्र मोहन जी को याद करते हुये कहा कि उन्होने ऐसी दृष्टि दी जो आज ही नहीं बल्कि सदियों तक भारत ही नहीं पूरे विश्व का मार्गदर्शन करती रहेगी। स्वामी जी महाराज ने श्री नरेन्द्र मोहन जी को अपनी श्रद्धाजंलि अर्पित की। भारत के यशस्वी, तपस्वी, कर्मयोगी और ऊर्जावान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी जिन्होने अपने जीवन को ही यज्ञ बना लिया है; दूसरों के लिये जीना ही अपना धर्म बना लिया है तथा स्वार्थ से उपर उठकर परमार्थ के लिये जीना ही अपना संस्कार बना लिया है; उन्होने राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्रनीति के लिये अपने जीवन को समर्पित किया उससे भी आगे बढ़कर पूरे विश्व को एक परिवार मानकर उन्होने अपने जीवन को राष्ट्र यज्ञ के लिये समर्पित किया है साथ मैं उत्तरप्रदेश के कर्मठ मुख्यमंत्री माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी को विलक्षण नेतृत्व क्षमता के लिये साधुवाद देता हूँ।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जागरण परिवार को हीरक जयंती पर बधाई देते हुये कहा कि आज हम न्यू इंडिया से संकल्प सिद्धि की ओर अग्रसर है। नये भारत के नये सपनांे को साकार करने में दैनिक जागरण सहित पूरे मीडिया जगत की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होने कहा कि आज हमारा भारत दूसरे युग में छलांग लगाने के लिये तैयार है। हम करोड़ों भारतीयों की सरकार उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिये तत्पर है। पीएम श्री मोदी जी ने कहा कि बीते 75 वर्ष से दैनिक जागरण निरंतर देश के करोड़ों लोगों को सूचना और सरोकार से जोड़े हुये हैं। देश के पुनर्निमाण में दैनिक जागरण के महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश को जागरूक करने में जागरण ने अहम भूमिका अदा की है। उन्होने कहा कि मैं दैनिक जागरण पढ़ने वालों में से एक हूँ।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने दैनिक जागरण परिवार को बधाई देते हुये कहा कि जागरण ने समाज में जाग्रति का कार्य किया है। राम मन्दिर मुद्दों पर बोलते हुये सीएम श्री योगी जी ने कहा कि राम मन्दिर का मुद्दा एस सी में है, हमारे पास होता तो 24 घंटे में समाधान कर देते।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि दैनिक जागरण ने अपने 75 वर्ष पूरे होने पर एक नवोदित शुरूआत की, एक नये भारत की शुरूआत है इसे एक नई दिशा चाहिये, नई सोच चाहिये, नये विचार चाहिये, नये संस्कार चाहिये जो अपनी जड़ों से जुड़े हुये हो। हमारे विचार तो स्वतंत्र हो सकते है, विचारों की मत भिन्नता हो सकती है लेकिन मन भिन्नता न हो; मत भेद हो पर मन भेद न हो। हमारे विचार भले ही स्वतंत्र हो लेकिन संस्कार हम सभी के एक हो, हम विचारों से भले ही भिन्न रहे लेकिन संस्कारों से जुड़े रहे। ’’यंग दिल इण्डिया को तंग दिल इण्डिया न बनाये’’। जागा हुआ जीवन ही सच्चा जीवन है; युवा जीवन है इसलिये विवेकानन्द जी ने कहा ’’उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्न्ािबोधत’’ जागो, जागोगे तो जीयेगे, जागना ही जीना है और जीना अपने लिये नहीं बल्कि अपनों के लिये और अपनों में भी पूरे विश्व को समेट लेना है यही है भारतीय दृष्टि। उन्होने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम् हम सभी एक परिवार है कई बार लोग मुझसे कहते है कि क्या इस नये भारत में धोती पहन के जीये या जीन्स पहन कर जीये? बात धोती या जीन्स की नहीं है बात तो यह है जो भी आप पहनते हो परन्तु अपने जीन्स से (जड़ों से; मूल्यों से; विचारों से; संस्कारों से) जुडे़ रहिये यही भारतीय संस्कृति है इसका ध्यान रखना बहुत जरूरी है। उन्होने कहा कि पेड़ कितना भी विशाल क्यों न हो वह तब तक हरा रहता है, तब तक छायादार, फलदार और जानदार रहता है जब तक वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है। जड़े है तो जान है, जान है तो जहान है, जड़े है तो जिन्दगी है अतः आईये इस नये भारत में आगे तो बढ़े लेकिन जड़ों से जुड़े रहकर आगे बढ़े यह बहुत जरूरी है।
धर्म के विषय में विचार व्यक्त करते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जिससे अपना भी कल्याण हो और जगत कल्याण के लिये भी अपने जीवन को समर्पित कर सके। अहंकर रहित और स्वार्थ रहित होकर जीने का नाम ही धर्म पूर्वक जीना है। जहां धर्म है वही जय है; जहां धर्म है वहां सत्य है; जहां सत्य है वहां धर्म है। सत्य, प्रेम और करूणापूर्वक, स्वार्थरहित जीना ही धर्मपूर्वक जीना है।
स्वामी जी ने कहा कि जब हम राजनीति की बात करते है तो राज, नीति से हो अर्थात मूल्यपरक जीवन और मूल्यपरक शासन मतलब सुशासन जो साफ नियत, सही विकास, सतत विकास और सुरक्षित विकास को दृष्टि में रखे यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है। उन्होने कहा कि अपनी-अपनी देव भक्ति करे परन्तु देश भक्ति-राष्ट्र भक्ति सबसे पहले हो। अपना जीवन ’इदम् राष्ट्राय स्वाहाः’ के लिये हो अर्थात मेरा जीवन राष्ट्र, समाज और सब के लिये हो। सबके विकास में ही राष्ट्र का विकास है और उसके लिये सबका साथ होना जरूरी है इसलिये हमारे ऋषियों ने सद्भाव, समता, समरसता और भाईचारे के मंत्र दिये। ’’आत्मवत् सर्व भूतेषु’’ सभी प्राणियों में स्वयं को देखो।; स्वयं की तरह सभी के साथ व्यवहार करो, जैसा व्यवहार हमें पसंद नहीं वैसा दूसरों के साथ भी व्यवहार न करे जो खुद को पसन्द है वहीं दूसरों के साथ हम करे तो खुद भी प्रसन्न रहेगे और खुदा भी प्रसन्न होगा, जीव भी प्रसन्न  होगा, जगत भी प्रसन्न होगा तथा जगदीश्वर भी प्रसन्न होंगे। धर्म, संस्कार और राजनीति को एक दिशा मिले राष्ट्रनीति की; स्वार्थ नीति से उपर उठकर परमार्थ नीति की यह समझना, जानना और इसी में जीना ही नया भारत है; यही नया विचार है; यही नई दृष्टि है। उन्होने कहा कि भले ही आज हम यहां इस विचारों को नई दृष्टि माने पर यह तो सदियों पुरानी है ऋषियों ने अपने जीवन को प्रयोगशाला बनाकर इसी दृष्टिकोण को दिया। हम इसे नये विचार मानकर नयी भाषा तो दे सकते है लेकिन विचार वहीं रहेंगे। वर्तमान समय मंे गुगल के द्वारा हो, इन्टरनेट के द्वारा हो, इंस्टाग्राम; फेसबुक या वेवसाइट के द्वारा हो लेकिन अंततः बात यह है कि फेसबुक पर जब हम जा रहे है तो हमें यह भी देखना है कि हमें अपनी फेसबुक को भी देखना है, मेरी बुक क्या है, मैं कहां खडा हूँ, मेरा क्या योगदान है समाज के लिये बस इसी बात को लेकर हम अपने जीवन में आगे बढ़े तो केवल नया भारत ही नहीं बल्कि हम भी नये होगे; हमारा जीवन भी नया होगा।