इस शहर में कोई भूखा और बिना पैसे के नहीं रहता

उज्जैन/ अमित यादव। एक ऐसी शक्तिपीठ जिसके बारे में कहा जाता है कि उनकी कृपा से शहर में कोई भूखा नहीं सोता। किसी के पास पैसे की तंगी नहीं रहती है। पंडित देवेंद्र शास्त्री ने बताया कि हरसिद्धि मंदिर में उज्जैन के राजा रहे विक्रमादित्य की आराध्य देवी का वास है। शिवपुराण के अनुसार दक्ष प्रजापति के हवन कुंड में माता के सती हो जाने के बाद भगवान भोलेनाथ सती को उठाकर ब्रह्मांड में ले गए थे। इस दौरान माता सती के अंग जिन स्थानों पर गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हो गए।

कहा जाता है इस स्थान पर माता के दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी और इसी कारण से यह स्थान भी एक शक्तिपीठ बन गया है। ज्योतिशाचार्य कृष्णा शर्मा ने बताया कि देवी को चंड एवं मुंड नामक राक्षस के वध के लिए भगवान शिव से सिद्धि मिली थी, इसीलिए वह हरसिद्धि कहलाईं। गर्भगृह में एक शिला पर श्रीयंत्र उत्कीर्ण है, जो शक्ति का प्रतीक है। यहां माता लक्ष्मी, महासरस्वती के साथ ही अन्नपूर्णा माता विराजमान हैं। यह स्थान उज्जैन के प्राचीन देवी स्थानों में अपना विशेष महत्व रखता है।

वर्तमान में मंदिर के पुनर्निर्माण का श्रेय मराठों को जाता है। मंदिर के सामने मराठा वास्तुकला के अनुसार दीप स्तंभ स्थापित किए गए हैं, जिनमें 1001 दिये बने हुए हैं। दक्षिण में बनी एक बावड़ी पर 1447 संवत का एक शिलालेख भी उत्कीर्ण है। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित शेषनारायण गोस्वामी ने बताया कि गर्भगृह में सबसे ऊपर विराजमान हैं मां अन्नपूर्णा, जिनकी वजह से उज्जैनी में हमेशा भंडारे चलते रहते हैं। कहा जाता है कि उनकी कृपा से उज्जैन में कोई भूखा नहीं सोता है। बीच में मां लक्ष्मी के स्वरुप में है, जिनकी वजह से किसी को भी लक्ष्मी की कमी नहीं आती। सबसे नीचे विराजित हैं महाकाली।