हिन्दी साहित्य का पुरोधा, प्रखर वक्ता, मूर्धन्य कवि, भारत की राजनीति में अजातशत्रु रहे अटल जी

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने विराट व्यक्तित्व के धनी, देश की अनमोल धरोहर भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को बीजेपी पार्टी कार्यालय दिल्ली में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
युगपुरूष श्री वाजपेयी जी के दिव्य पार्थिव शरीर को श्रद्धासुमन अर्पित करने हेतु उमडे़ जन सैलाब और राजनीतिक दिग्गजों के जमावडे़ के देखकर कर स्वामी जी ने कहा कि आज श्री अटल जी के प्रति लोगों की अपार श्रद्धा, आस्था और आदर के दर्शन यहां पर हो रहे हैं। जिन्दगी भर उन्होने अपने जीवन के माध्यम से, अपने शब्दों से और अपनी कविताओं के माध्यम से जीवन-मरण, राष्ट्रीयता, स्वतंत्रता और भारतीय संस्कृति का दर्शन कराया और जाने के पश्चात भी उन्होने एक संत का जाना एक महापुरूष का जाना कैसे होता है इसका दर्शन भी वे करा गये। वे कूच करते करते-करते भी कैच कर गये। श्री अटल जी का अनन्त यात्रा और चिर निद्रा में चले जाना अत्यंत हृदय विदारक है परन्तु उन्होने ने जो अपने पीछे एक सन्नाटा, अनन्त शान्ति और शान्ति का प्रवाह छोड़ा है वह मानों हर दिल को छू रहा था।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि जिन्दगी से कभी हार न मानने वाला अजातशत्रु आज अनन्त यात्रा के लिये कूच कर गये। उन्होने कहा कि आज मैं यहां अपार जन सैलाब और भावनाओं के उमड़ते सैलाब को देख पा रहा हूँ सचमुच वे अनन्त प्रतिभा के धनी थे। स्वामी जी ने बताया कि श्री अटल जी के विचारों में भारतीय संस्कृति और भारतीय मूल्य से परिपूर्ण थे। वे हमेशा देश के लिये जीते रहे, लोकतंत्र के लिये जीते रहे उन्होने अपने पडोसी देशों के साथ मधुर सम्बंध स्थापित करने की पूरी कोशिश करते रहे प्रेम की प्रतिमूर्ति थे अटल जी। आज पूरा देश अपने प्यारे अटल को अलविदा कह रहा है।
स्वामी जी ने देश के नागरिकों से आह्वान किया कि श्री अटल जी के विचारों को अपने हृदय में सदा जीवित रखे यही हम सब की उनके लिये सच्ची श्रद्धाजंलि होगी। स्वामी जी ने कहा कि आज सचमुच श्री अटल जी की मौत से ठन गई मैं उस विराट अस्तित्व को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।