मोहल्ले से मुल्क की यात्रा की शुरूआत हिमालय से नहीं हमारे से करनी होगी-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

देहरादून/ आशीष तिवारी। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने नियोजन विभाग, उत्तराखण्ड द्वारा हिमालय दिवस पर आयोजित उत्तराखण्ड सतत पर्वतीय विकास सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में संत और सरकार मिलकर पलायन, आजीविका और आपदा पर विचार मंथन कर नीति निर्धारण करेंगे। इस सम्मेलन के जरिए प्रयास यह किया जा रहा है कि संकल्प से शुरू हुई यात्रा का समापन सिद्धि प्राप्त कर ही होगा अर्थात संकल्प से सिद्धि की यात्रा।

उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हिमालय के विकास के लिए सी-थ्री (केयर, कंजर्वेशन, कोआपरेशन) और थ्री-पी (प्लान, प्रोड्यूस और प्रमोट) का फार्मूला बताया। इसके साथ ही घोषणा की कि हिमालयी क्षेत्र में पौधारोपण के लिए दो कंपनी इको टास्क फोर्स गठित करेंगे। इसमें दो सौ पूर्व सैनिकों को भर्ती किया जाएगा। पांच सालों में इस काम के लिए 50 करोड़ खर्च होगा।

हिमालय को सनातन संस्कृति और देश की गंगा जमुना तहजीब का उद्गम बताते हुए कहा कि सामरिक सुरक्षा के लिए हिमालय बहुत महत्वपूर्ण है। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी के वाराणसी में कथन कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है का जिक्र करते हुए कहा कि बिना हिमालय के गंगा की कल्पना नहीं कर सकते। रावत ने कहा कि सीमांत गांवों में लोगों की आय बढ़ाने के लिए अखरोट और चिलगोजा के पौधों का रोपण किया जाएगा। इस मौके पर हैस्को के संस्थापक पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने ‘कंज्यूमर्स मस्ट बी कंट्रीब्यूटर्स’ का सूत्र देते हुए कहा कि देश के सारे लोग हिमालयी चिंतन में भागीदार बनें।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने हिमालय दिवस के अवसर पर आयोजित उत्तराखण्ड सतत पर्वतीय विकास सम्मेलन का स्वागत करते हुये कहा कि ’भारत का गौरव और भारतीयों का जीवन रक्षक; प्राणवायु का सबसे बड़ा स्रोत हिमालय है। उसके आंचल में हमारे देश के राज्य जम्मू और कश्मीर, उत्तराखण्ड, हिमाचल, सिक्किम, असम और अरूणाचल प्रदेश है। ये हिमालय के गोद में बसे राज्य मिलकर प्रयास करें तो हिमालय को सबसे अधिक प्राणवायु ऑक्सीजन का उत्पादक बनाया जा सकता है। हिमालय से ही हमारा जीवन है, हिमालय ही निर्मल और अविरल जल प्रदान करने वाली नदियों का उद्गम स्थल है, हिमालय देश का रक्षा कवच है, हिमालय के हृदय में स्वास्थ्य और आध्यात्म का खजाना है। उन्होंने कहा कि हिमालय भारत के लिये ईश्वर प्रद्त उपहार है अतः उसे संरक्षित करना नितांत आवश्यक है। इसके लिये हमें अवैज्ञानिक विकास, कटते वृक्ष और बढ़ते प्लास्टिक के प्र्रयोग को रोकना होगा। सरकार के वन अधिकारियों के साथ हमें स्थानिय लोगों को वन मित्र नियुक्त करना  होगा, उन्हे वृक्षारोपण के लिये प्रेरित तथा हरितिमा संवर्धन के लिये प्रोत्साहित करना होगा। हिमालय में भारत की संस्कृति, सभ्यता, संस्कार एवं दर्शन समाहित है साथ ही वह पूरे विश्व की जलवायु का नियंत्रक भी है। अतः अपने व अपनों के स्वस्थ, सुरक्षित एवं सतत विकास के लिये ’हरित पर्व’ की संस्कृति को विकसित करना आवश्यक है।’
स्वामी चिदानंद ने ‘हम है समाधान शिखर सम्मेलन’ की सफलता का उल्लेख करते हुये कहा कि हमारे पास एक संकल्पवान व्यक्तित्व के रूप मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र्र सिंह रावत जी है इस समय वेदों के लौटने का समय है। उन्होने हिमालय को परिभाषित करते हुये कहा कि हिमालय अर्थात हिम का आलय, बर्फ का घर। हम हिमालय के लिये ’हमालय’ ;हमारा आलयद्ध की तरह विचार करे तब हिमालय बचा रहेगा। उन्होने कहा कि जिसे हम अपना बना लेते है उसके लिये प्राण तक देने को तैयार रहते है उसी तरह हमें हिमालय को हमालय बनाकर अपने अपने हिस्से का केवल बीस बीस गज स्वच्छ व हरियाली से परिपूर्ण बनाना होगा। जब इस विचार व कर्म को हम स्वीकार कर लें तो गली, मोहल्ला और फिर मुल्क में भी विलक्षण परिवर्तन देखने को मिलता है। इस मोहल्ले से मुल्क की यात्रा की शुरूआत हिमालय से नहीं हमारे से करनी होगी।

इंटीग्रेटेड माउंटेन इनीशिएटिव (आईएमआई) के सचिव सुशील रमोला ने भी एकजुटता पर जोर दिया और कहा कि फुटकर बातचीत से कुछ नहीं होने वाला, सतत विकास के लिए सारे स्टेकहोल्डर्स साथ आएं। सत्र की शुरुआत में अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान के संबंध में बताया और कहा कि प्रदेश में पलायन से सबसे ज्यादा आबादी अल्मोड़ा और पौड़ी की घटी है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘हिमालय दिवस’ पत्रिका और ‘ट्रांसफॉर्मिंग उत्तराखंड’ वेबसाइट का विमोचन किया
इस सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, रमेश पोखरियाल निशंक, अनिल जोशी, सुशील रमोला समेत कई अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर किया। स्वामी चिदानंद ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व सभी गणमान्य अतिथियों को इस उत्कृष्ट पहल के लिये हरित भेंट शिवत्व का प्रतिक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।