हरिद्वार बने सत्यम्, शिवम्, सुुुन्दरम् का द्वार-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश/ धनंजय राजपूत। लन्दन में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टफेथ वाश एलायंस के सस्ंथापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी की हरिद्वार सौंदर्यीकरण, हरित और दिव्यतायुक्त तीर्थीकरण पर श्री गोपीचन्द हिन्दुजा, श्री प्रकाश हिन्दुजा, श्री संजय हिन्दुजा एवं हिन्दुजा परिवार के अन्य सदस्यों से विस्तृत चर्चा हुई। चर्चा के प्रमुख विषय था कि ’हर की पौड़ी’ क्षेत्र को हरियाली से युक्त, सुन्दर, दिव्य और भव्य कैसे बनाया जाये। साथ ही वृक्षारोपण और कुड़ा प्रबंधन का प्रारूप बनाकर उस क्षेत्र को स्वच्छ रखा जाये।

इसी संदर्भ में विगत जनवरी माह में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री नितिन गडकरी जी हिंदुजा परिवार के सदस्य, आदरणीय मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र्र्र सिंह रावत जी,  चीफ सेक्रेटरी मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड, शहरी विकास मंत्री श्री मदन कौशिक जी, जिलाधिकारी हरिद्वार श्री दीपक रावत जी, हरिद्वार विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नितिन भदौरिया जी, सीडीओ श्रीमती स्वाती भदौरिया जी एवं फारेस्ट विभाग के अधिकारियों से विशद विचार विमर्श हुआ था।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के विदेश से लौटने के पश्चात हरिद्वार के सौंदर्यीकरण एवं गंगा तटों की स्वच्छता के विषय में स्वामी जी गंगा महासभा के पदाधिकारियो एवं सभी सम्बंधित विभागों से चर्चा करेंगे। उन्होने कहा कि हमें हरिद्वार को एक ऐसा तीर्थ बनाना है जो अधिक से अधिक सैलानियों एवं तीर्थयात्रियों को आकर्षित कर सके। एक ऐसा तीर्थ जो आध्यात्म के साथ स्वच्छता, हरितिमा संवर्धन, जल संरक्षण, नदी के तटों का रखरखाव, प्लास्टिक मुक्त, खुले में शौचमुक्त तीर्थ एवं शान्ति का प्रतीक बने; एक माॅडल बने और अन्य तीर्थोे के लिये उदाहरण प्रस्तुत करे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा, ’हरिद्वार को स्वच्छ रखना है तो हरिद्वार शहर और आस-पास के क्षेत्रों में भी कूडा प्रबंधन, जैविक एवं हरित शौचालयों का निर्माण एवं प्रबंधन, तीर्थक्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त तथा हरियालीयुक्त बनाना होगा ताकि जो भी तीर्थयात्री आये वे यहां से एक संदेश लेकर जाये। उन्होने कहा कि हर की पौडी की आरती अद्भुत है; दिव्यता से युक्त है जो सैलानियों एवं तीर्थयात्रियों का मन मोह लेती है परन्तु अब उसके आसपास के क्षेत्र भी ऐसे ही बनाना होगा जो सचमुच मनमोहक, दिव्यता युक्त और आत्मस्पर्शी हो। स्वामी ने कहा कि ’हरिद्वार, उत्तराखण्ड के चारो धामों का प्रवेश द्ववार है। उत्तराखण्ड दिव्यता और हरियाली से युक्त प्रदेश है अतः इसकी छलक प्रवेश द्वार से ही दिखायी देनी चाहिये। इसलिये यहां से पूरे देश को स्वच्छता एवं हरियाली का संदेश प्रसारित करना बेहतर होगा।’
स्वामी जी महाराज ने कहा, कुम्भ से पहले-पहले हर की पौड़ी का पूरा क्षेत्र बनेगा अद्भुत आकर्षण का केन्द्र इस हेतु सभी को मिलकर काम करना होगा ताकि पूरे विश्व में क्लीन, ग्रीन और सरीन कुम्भ का संदेश जा सके। उन्होने कहा कि हरिद्वार कुम्भ के माध्यम से पूरे उत्तराखण्ड को विश्व के पटल पर लाने का एक अद्भुत अवसर है। इस समय को पहचानते हुये सभी संस्थाओं को मिलकर कार्य करना होगा। अब गंगा जी में कोई भी नाला या नाली प्रवाहित न हो, कही कोई कचरे का ढ़ेर न हो, सड़को पर भिखारियों का जमावड़ा न हो बल्कि सरकार भिखारियों के लिये अलग से शरणगाह बनावायें। ऐसी व्यवस्थायें हो कि सभी को स्वच्छ जल, स्वच्छ शौचालय और स्वच्छ वातावरण कुम्भ मेला के दौरान सभी को मिले और यही संदेश पूरे विश्व में जाये।

श्री गोपीचन्द हिन्दुजा जी ने स्वामी जी महाराज से विशेष प्रार्थना करते हुये कहा कि हरिद्वार के सौंदर्यीकरण का कार्य अपने मार्गदर्शन में अपने हाथ में लेकर इस कार्य को शीघ्रता से आगे बढ़ाये ताकि इस विषय में प्रभावी कदम उठाये जा सके। श्री हिन्दुजा जी ने स्वामी जी के साथ अपने बचपन की यादें ताजा करते हुये कहा कि हम अपने बाल्यकाल से ही प्रतिवर्ष हरिद्वार जाते थे और आज भी यह परम्परा जारी है, आज भी हमारे परिवार को कोई न कोई सदस्य हरिद्वार जाकर माँ गंगा को अपनी आस्था के पुष्प समर्पित करते है। उन्होने स्वामी जी को बताया कि केबिनेट मंत्री श्री नितिन गड़करी जी के लन्दन आने पर  उनसे भी इस विषय पर विशद चर्चा हुई थी, वे भी माँ गंगा के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है। उन्होने स्वामी जी से निवेदन किया की अब इस कार्य को आप अपने मार्गदर्शन में आगे बढ़ाये ताकि कुम्भ तक पूरा क्षेत्र स्वच्छता, दिव्यता और पवित्रता से युक्त हो जाये।
स्वामी जी ने श्री गोपीचन्द हिन्दुजा जी को आस्वस्त किया कि वे सरकार, सम्बधित संस्थाओं एवं पूज्य संतों  के साथ मिलकर हरिद्वार सौंदर्यीकरण, हरित और दिव्यतायुक्त तीर्थीकरण के लिये प्रभावी कदम उठाया जायेगा।
स्वामी चिदानन्द ने स्वामी विवेकानन्द जी की पुण्यतिथि के अवसर पर एक पुण्य कार्य की शुरूआत करने का संकल्प कराते  हुये का कि अपनी संस्कृति, संस्कारों से युक्त सद्भावना, समरसता और भाईचारा युक्त वातावरण का निर्माण हम कर सके।
इस अवसर पर जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, मनु छबलानी जी, अनु हिन्दुजा जी, कमल हिन्दुजा, श्री नागराज, रीटा छाबड़िया, हिन्दुजा परिवार के अन्य सदस्य तथा कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।