भारत का संविधान भारत की सभी बहनों को समान अधिकार देता है उसमें भेदभाव क्यूं?

नई दिल्ली/ सुनील दुबे। मुस्लिम महिलाओं पर जारी कुरीतियों के खिलाफ क्रांति की तरफ एक कदम और बढ़ाया गया है। ट्रिपल तलाक के टॉर्चर से मुक्ति दिलाने की पहल के बाद अब बारी निकाह हलाला और बहु विवाह को ख़त्म करने की है। रकार ने इसको खत्म करने के लिये कमर कस ली है तो वहीं अब कोर्ट ने भी शरिया कानून की आड़ में निकाह हलाला के नाम पर महिलाओं से अत्याचार कर रहे मौलानाओं को साफ संदेश दे दिया है संदेश ये कि उनकी दुकान अब बंद होने वाली है। 
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वो निकाह हलाला और बहु विवाह पर जल्द जवाब दाखिल कर दे साथ ही कोर्ट ने निकाह हलाल और बहु विवाह का विरोध करने वाली याचिकाओं की जल्द सुनवाई पर विचार करने के लिये हामी भी भर दी है।
हालांकि निकाह हलाला के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली समीना बेग़म को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है। समीना बेग़म को कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने के लिये जान से मारने और रेप की धमकियां मिल रही हैं।
समीना के मुताबिक, वह ओखला विहार में किराये पर घर ढूंढ रही थीं, तभी कुछ लोगों ने उन्हें धमकी दी. समीना के मुताबिक, उन लोगों ने धमकी दी कि अगर वह अपनी सलामती चाहती है, तो केस वापस ले ले, वरना नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहे.
वैसे सरकार की पहल और सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई के लिये राजी होने पर विचार करना देवबंद के उलेमाओं को रास नहीं आ रहा। आखिर सवाल मुस्लिम महिलाओं की आज़ादी का है, ऐसे में मौलानाओं को ये बात कैसे मंजूर होगी?
दारूल उलूम जकरिया के मोहतमिम मुफ़्ती शरीफ खान ने इस बाबत बताया कि सरकार अगर इस्लाम के खिलाफ कोई कानून लाती है तो इस्लाम के खिलाफ जो भी कानून होगा ना मुसलमान उसे मानेगा ना इस्लाम में उसकी इजाज़त है। इसलिये अगर ऐसा कोई  कानून लाना चाहती है तो हम उसकी मुख़ालिफत करेंगे और इस्लाम को जो कानून हैं उसकी हम हिमायत करेंगे ।
वैसे विरोध के सुर सिर्फ मौलानाओं के नहीं हैं। विपक्ष को भी इसमें राजनीति नज़र आ रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं। ऐसे में विपक्ष को लगता है कि सरकार मुस्लिम महिलाओं के बहाने वोट बटोरना चाहती है, लेकिन सवाल ये है कि अगर निकाह हलाला पर सरकार साथ तो विपक्ष का विरोध क्यों?
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि जो अपने मज़हब में कोई तब्दीली करना चाहते हैं रिफॉर्म करना चाहते हैं, बहुत अच्छी बात है चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान हो लेकिन इसका फैसला सरकार नहीं कर सकती ।
पीएम मोदी का विरोध करने वालों का तो ये भी कहना है कि निकाह हलाला तो बहाना है। असली मकसद तो कॉमन सिविल कोड लाना है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या मुस्लिम महिलाओं के मसीहा बनकर 2019 का रण जीतने में कामयाब होंगे पीएम मोदी?