सुधांशू जी ने दिलाया पूर्णिमा के दिन स्वयं को पूर्ण बनाने का संकल्प

नई दिल्ली/ अमित यादव। विश्व जागृति मिशन हेडक्वार्टर आज आध्यात्मिक स्त्री-पुरुषों का विशाल संगम-स्थल बना। हजारों नर-नारी सुबह से ही यहां एकत्र होना शुरू हो गये थे। हर महीने इस निश्चित तारीख पर अपने गुरुदेव से मिलने वाले ज्ञान-मोतियों को हर कोई पाना चाहता था। मिशन प्रमुख आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने पधारे धर्मप्रेमियों को सत्संग-सुधा की संजीवनी का पान जी-भरकर कराया।

राष्ट्रीय कवि आचार्य देवेन्द्र देव के प्रणाम-गीत ‘‘तुमने जीवन को मथ डाला गुरुवर! तुमको कोटि प्रणाम, सागर मथकर अमृत निकाला गुरुवर! तुमको कोटि प्रणाम’’ के उपरान्त श्रद्धेय महाराजश्री ने अपने उद्बोधन में बैलेन्स लाईफ जीने की प्रेरणाएँ सभी को दीं और कहा कि साधकों को चाहिए कि वे प्रतिकूलताओं को अनुकूलता में बदलने की तकनीक, तकनीकों के इस महायुग में अवश्य सीखें।

आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने शुरु हो रहे ‘श्राद्ध पक्ष’ का जिक्र करते हुए उन सभी दिवंगतों को याद किया, जिनके कारण हम-सब सुखी व समृद्ध जीवन जी रहे हैं। उन्होंने पितृ-पक्ष में उन सभी को पूर्णादर के साथ भावांजलि देते हुए राष्ट्र की सीमाओं पर अपने प्राण न्योछावर करके हमें चैन की नींद सोने का अवसर देने वाले वीर सैनिकों का भी श्राद्ध-तर्पण करने का सुझाव उपस्थित जन-समुदाय को दिया। उन्होंने प्राण तत्व का महत्व समझाया और अपने बड़ों का सम्मान करने की सलाह सभी को दी।

इसके पूर्व महर्षि वेदव्यास गुरुकुल विद्यापीठ के ऋषिकुमार चि. अमन तिवारी द्वारा प्रस्तुत भावगीत ने सभी को भावों में डुबोया। शिकागो-अमेरिका के विजय वर्मा, मैसूर-कर्नाटक के विष्णु रहेजा, बरेली-उ.प्र. के नूतन मिश्र, नागपुर-महाराष्ट्र के देवीदास देशमाने व धर्मेन्द्र वर्मा, नई दिल्ली के सुशील चावला, बैतूल-म.प्र. के रमेश जगदेव तथा एनसीआर की वयोवृद्ध साधिका श्रीमती लाजवन्ती देवी ने महाराजश्री का अभिनन्दन सभी लोगों की ओर से किया। पूर्णिमा के इस विशिष्ट आयोजन में नयी दिल्ली, एनसीआर, उ.प्र., उत्तराखण्ड, महाराष्ट्र पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चण्डीगढ़ आदि राज्यों से पधारे मिशन साधकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का संचालन विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने किया। वरिष्ठ धर्माचार्य श्री अनिल झा ने अक्टूबर व नवम्बर माह में आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी सभी को दी। उन्होंने बताया कि 02 अक्टूबर को श्रद्धा पर्व, 05 से 08 अक्टूबर में श्री गणेश लक्ष्मी महायज्ञ एवं 01 से 05 नवम्बर में परमार्थ गंगातट ऋषिकेश में विशिष्ट ध्यान साधना शिविरों का आयोजन किया गया है। इसी बीच 15 से 17 सितम्बर में बंगलौर (कर्नाटक), 12 से 15 अक्टूबर में फरीदाबाद (हरियाणा) तथा 26 से 29 अक्टूबर में जयपुर (राजस्थान) में विराट् भक्ति सत्संग महोत्सव सम्पन्न होंगे।