बेहतर तकनीकी के साथ हरित तरक्की पर दे ध्यान-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश/ धनंजय राजपूत। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कैम्ब्रिज सीनियर सेकेन्ड्री स्कूल, देहरादून द्वारा ’सर्वधर्म सद्भाव’ की थीम पर आयोजित वसुधैव कुटुम्बकम सम्मेलन में मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता के रूप में सहभाग किया।

कैम्ब्रिज सीनियर सेकेन्ड्री स्कूल, देहरादून निरन्तर 25 वर्षो से शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापरक एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। इसी परिपेक्ष में युवा पीढ़ी को सर्वधर्म सद्भाव एवं वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश देने एवं भारत की संस्कृति, संस्कारों को आत्मसात कराने के लिये महाशिवरात्रि से पूर्व इस सम्मेलन का आयोजन किया।

सर्वधर्म सम्मेलन की शुरूआत ध्वजारोहण के साथ हुई। तत्पश्चात विश्व शान्ति यज्ञ में विशिष्ट अतिथियों ने पूर्णाहुति अर्पित कर विशाल प्रांगण में ध्यान एवं गंगा स्तुति का पाठ किया गया। स्कूल की सिल्वर जुगली को यादगार बनाने के लिये विशिष्ट अतिथियों, छात्रों एवं शिक्षकों द्वारा 7 फलदार पौधों का रोपण किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज केे विशेष मार्गदर्शन में विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु सभी ने मिलकर विश्व ग्लोब का जलाभिषेक (वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी) किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों एवं शिक्षकों को पुरस्कार वितरण किया गया। विद्यालय के छात्रों द्वारा सर्वधर्म को एक सूत्र में पिरोने के लिये नुक्कड़ नाटक का मंचन किया जिसके माध्यम से संदेश दिया कि सभी धर्म को समान आदर और सम्मान देते हुये राष्ट्र के लिये जीना ही भारतीय परम्परा है।

सर्वधर्म सद्भाव सम्मेलन में आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, राजयोगिनी मंजू बहन जी, मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी प्रतिनिधि जामा मस्जिद, आचार्य शांता कुमार, प्रतिनिधि एच एच ड्रर्कंग चीसांग रेन्पोचेजी, पी जे सिंह प्रतिनिधि माॅरिसन चर्च देहरादून, सरदार मदन सिंह जी, मुख्य ग्रंथी गुरूद्वारा डाकपत्थर एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों, 1000 छात्रों ने सहभाग किया। इस सम्मेलन में लगभग 4000 लोगों ने भाग लिया।

सर्वधर्म सद्भाव सम्मेलन में उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री माननीय श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी को सहभाग करना था परन्तु कार्यक्रम की व्यस्तता एवं आवश्यक बैठक  के कारण वे सहभाग नहीं कर सके। इस सम्मेलन हेतु भेजे अपने संदेश में उन्होने कहा, ’उत्तराखण्ड की संस्कृति, सबका सम्मान, सबको साथ लेकर और सबके विकास की है, यहां पर सबके विकास को हमेशा प्रधानता दी गयी है। उन्होने कहा कि सब मिलकर अपने उत्तराखण्ड का केवल बाहर का ही नहीं बल्कि भीतर का भी विकास करे।’

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा, ’’भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर स्थापित हो रहा है। दुनिया के तमाम देश भारत से जुड़ना चाहते है। भारत पौराणिक काल में विश्व गुरू; शान्ति का संवाहक तथा सोने की चिड़िया था आज फिर से भारत को वेद, विज्ञान और सतत विकास के पैरोकार के रूप में स्थापित करना है इस कार्य के लिये युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। स्वामी जी ने कहा कि भारत की 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र के युवा है, मैं आह्वान करता हूँ उन सब युवाओं से कि वे धर्म और जाति से उपर उठकर राष्ट्र धर्म निभाने के लिये आगे आये और एक जिम्मेदार नागरिक बने। उन्होने युवाओं से निवेदन किया कि वे ’बेहतर तकनीकी के साथ हरित तरक्की’ पर ध्यान दे। स्वामी जी ने युवाओं को भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों की जड़ों से जुडे़ रहने का संदेश दिया और नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होने कहा कि जीवन नई ऊचाँईयों को छूने के लिये है नशे में नशा करने के लिये नहीं है।’’

स्कूल के भव्य सभागार में हजारों की संख्या में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों एवं छात्रों को स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने पर्यावरण एवं जल संरक्षण का संकल्प कराया। स्वामी जी ने रिस्पना के लिये भी सभी को संकल्प कराया कि रिस्पना के पुनरोद्धार का कार्य प्रारम्भ हो गया है इसमें केवल एक स्कूल की नहीं बल्कि सभी स्कूलों की भागीदारी आवश्यक है। स्वामी जी ने कहा कि आज यहां पर विभिन्न धर्मों के सभी सजग पहरेदार और पैरोकार उपस्थित है उन्होने सभी को संकल्प कराते हुये कहा कि हमारे कार्यो से भी वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन होने चाहिये और इसकी शुरूआत हम सभी को पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण एवं स्वच्छता के लिये मिलकर कार्य करने से करनी होगी।

सर्वधर्म सद्भाव सम्मेलन में विशिष्ट अतिथियों का सम्मान चांसलर यु पी ई एस विश्वविद्यालय देहरादून, प्रोफेसर स्वर्णजीत चोपड़ा और क्षेत्रीय अधिकारी सी बी एस ई, श्री रणवीर सिंह जी ने किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर स्कूल की संस्थापक मदर मीना द्वारा सम्मान और स्मृति चिन्ह भेंट किये गये।

इस सम्मेलन में डाकपत्थर एंव सहस्त्रधारा रोड के बौद्ध सेन्टर से आयी बौद्ध भिक्षुणियाँ, लामा, विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं, परमार्थ गुरूकुल के आचार्य एवं ऋषिकुमारों ने बढ़चढ़ कर सहभाग किया।