योगी राज में बिल्डर्स की ‘मौत वाली मनमानी’ कब तक ?

नोएडा/ देवेश दुबे। यूपी की योगी सरकार जब सत्ता में आई थी तो लोगों को बहुत उम्मीदें थीं कि कुछ नया होगा, पहले से बेहतर होगा, भ्रष्ट तंत्र पर चोट होगी, बिल्डर माफिया पर कार्रवाई होगी लेकिन ग्रेटर नोएडा का बिल्डिंग हादसा बता गया कि कुछ नहीं बदला है। आखिर कब तक एक आम आदमी इसी तरह सपनों का आशियाना बनाने की कोशिश में मौत के चक्रव्यूह में फंसता रहेगा, जिंदगी भर बचत करके, अपनी इच्छाओं को मारकर एक मध्यमवर्गीय परिवार एक फ्लैट खरीदने की हिम्मत कर पाता है, लेकिन उसे मिलता क्या है मौत क्यों? क्योंकि अथॉरिटी में बैठ हुए कुछ भ्रष्ट अधिकारी नक्शा पास कर देते हैं, बिल्डर माफिया बिल्डिंग खड़ी कर देता है, और एक ऐसी इमारत खड़ी हो जाती है जो अपने साथ कितने परिवारों और उनसे जुड़े लोगों को जिंदगी भर का दर्द दे जाती है।

इस मसले पर समाजवादी पार्टी के नेता सुनील यादव ने सरकार पर निशाना साधा कहा कि उस बिल्डिंग को किस ठेकेदार ने बनाया किन अधिकारियों ने परमीशन दी कैसे लापरवाही हुई. सरकार उस पर जांच कराए और उन पर कार्रवाई करे लेकिन ये भारतीय जनता पार्टी की सरकार मौत पर भी राजनीति कर रही है।
वहीं सूबे के मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पिछली सरकार पर आरोप लगाया कहा कि ये पुराने पाप हैं जो जनता को भुगतने पड़ रहे हैं पहले तो केवल एक ही लक्ष्य रहता था लूटने का और जनता को सहूलियत कैसे दी जाए ईमानदारी से कैसे काम किया जाए सपा और बसपा के कैलेंडर में ये सब था ही नहीं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव ने सरकार को नसीहत दी कि एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने की बजाय घटना पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इस घटना पर दुख जताया और कहा कि इस मामले में जो भी दोषी हो घटिया मैटेरियल इस्तेमाल किया है इस बिल्डिंग को बनाने वाला जो उसका मालिक है जो बिल्डर है उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिये।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि इस मामले में पड़ताल की जा रही है इस बिल्डिंग का नक्सा कहां से पास हुआ था। इसके अलावा इसके बारे में जानकारी ली जा रही है और उसके आधार पर जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी।

इस हादसे में एक पीड़ित परिवार ने बताया कि वो खुद इसी बिल्डिंग में रहता है उसका एक दोस्त भी था जिसका लगातार नंबर मिला रहा है लेकिन नंबर मिल नहीं रहा है।

बिल्डिंग हादसे की एक महिला पीड़ित ने योगी सरकार से इंसाफ की मांग की है उसने बताया कि हमने तीन महीने पहले ही खरीदा है अभी 2 दिन बाद ही शिफ्ट होना था रजिस्ट्री सब करवा ली हमने सामान सब शिफ्ट कर दिया बस 2 दिन बाद आ रहे थे यहां पर।

बिल्डिंग हादसे की पीड़ित ने बताया कि 7-8 महीने हो गये फिर इस बीच में वो घर गया था और अभी 2-4 दिन पहले वो आया यहां पर और हमें कल रात को पता नहीं लगा सुबह पता लगा।

योगी जी भाषण तो जनता ने बहुत सुन लिए, अब जनता शासन देखना चाहती है। इसलिए हमारा आप की सरकार से सवाल है कि योगी राज में मौत बांटने वाले कितने बिल्डर? शाहबेरी में ‘ध्वस्त’ हुई योगी की सरकार? यूपी में लाखों लोगों की ज़िंदगी दांव पर किसने लगाई? यूपी में योगी का लाइट, कैमरा, शिलान्यास वाला शासन? और सवाल ये भी कि योगी ने बनाया भ्रष्ट बिल्डरों का ‘उत्तम प्रदेश’ ?