स्वामी चिदानन्द सरस्वती को “ग्लोबल पीस अवार्ड” और साध्वी भगवती को मिला ‘शान्ति राजदूत सम्मान’

नई दिल्ली। ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ ह्यूमन राइट्स, लिबर्टीज एंड सोशल जस्टिस द्वारा 7 वें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार समारोह का आयोजन दिल्ली में किया गया। इस समारोह में विश्व में शान्ति स्थापित करनेे एवं मानव अधिकारों को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाने हेतु पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का अभिनन्दन किया और ग्लोबल पीस अवार्ड से पुरस्कृत किया गया।

मानव अधिकारों की रक्षा को समर्पित स्वतंत्र और सामाजिक न्याय की अखिल भारतीय परिषद् जो विश्व के 140 देशों के करीब 12,000 व्यापार और गैर-व्यापाररिक प्रतिभागियों का समूह है जिनके द्वारा ’अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ पर इस पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टरफेेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को मानवता एवं शान्ति की स्थापना हेतु किये जा रहे सेवात्मक कार्यो, इण्टरफेथ ’सर्व धर्म सद्भाव एवं एकता’ एवं मानव अधिकारों की सुरक्षा हेतु लगातार किये जा रहे अद्वितीय प्रयासों के लिये ’ग्लोबल पीस पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

 

जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी को ’शांति की राजदूत पुरस्कार’ से पुरस्कृत किया गया। साध्वी जी ने पश्चिम की धरती से भारत आकर भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को आत्मसात कर दुनिया के विभिन्न देशों में जाकर भारतीय आध्यात्म, सनातन धर्म, शान्ति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। वे आज की युवा पीढ़ी की प्रेरणा स्रोत है।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा ’मानव अधिकारों के साथ-साथ जो हमें जीवन प्रदान करते है यथा धरती माता, प्रकृति, पेड़-पौधे, नदियां और पर्वतों के राइट्स पर भी ध्यान देने की जरूरत है। जब तक इनके अधिकार सुरक्षित नहीं होगे तब तक हमारा जीवन सुरक्षित नहीं हो सकता। उन्होने कहा कि मानव अधिकार से पहले हमें ’सबको जीवन यापन का अधिकार’ पर चितंन करने की नितांत आवश्यकता है।’

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि ’मानव अधिकार सभी को चाहिये। जहां पर हमारे अधिकार समाप्त होते है वहां से दूसरों के अधिकार शुरू होते है अतः हमें अपने अधिकारों के साथ दूसरों के प्रति हमारा जो कर्तव्य है उस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जब प्रत्येक मनुष्य इस प्रकार सोचना आरम्भ कर देगा तब हम समाज में विलक्षण परिवर्तन होते देखा जा सकता है।’

स्वामी जी एवं विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं ने एआईएचएलएस  के प्रमुख श्री राजू एंथनी जी को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। साथ ही स्वामी जी महाराज ने उपस्थित सभी को ’ह्यूमन राइट्स के साथ लिविंग राइट्स’ की आवश्यकता पर जोर देते हुये लिविंग राइट्स की सुरक्षा का संकल्प कराया। इस अवसर पर अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक डॉ लोकेश मुनी जी, अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रमुख डॉ उमर अहमद इलियासी जी, श्री भिखु संघसेना जी, ब्रह्मकुमारी दीदी बिन्नी सरीन जी,  और विभिन्न धर्मों के धर्मगुरू, व्यवसाय जगत, फिल्म जगत एवं अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।