गीता ज्ञान को युवा पीढ़ी तक पहुँचाना हमारी जिम्मेदारी – आचार्य लोकेश

कुरुक्षेत्र/ अर्चना सक्सेना। भारत के राष्ट्रपति महामहिम श्री राम नाथ कोविंद ने कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर हरियाणा सरकार द्वारा मॉरिशस सरकार के सहयोग से आयोजित अन्तराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2017 का उदघाटन किया| महोत्‍सव का आगाज ब्रह्मसरोवर के पवित्र तट पर मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गीता पूजन के साथ नौ कुंडीय यज्ञ में पूर्णाहुति डाली। अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भागवत गीता की शिक्षाएं कालातीत है जोर सही और गलत के बीच निर्णय लेने में सहायक सिद्ध होती है | श्री कोविंद ने महोत्सव का उदघाटन करने के साथ भागवत गीता अनुसन्धान केंद्र व भागवत गीता ज्ञान संस्थानं का भी उदघाटन किया |

हरियाणा के राज्‍यपाल प्रो. कप्‍तान सिंह सोलंकी  ने कहा कि हरियाणा की पावनधरा कुरुक्षेत्र से एकबार फिर पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश पूरे विश्व में पहुंचेंगे। इन संदेशों में ही पूरे विश्व का सार समाहित है। इन पवित्र उपदेशों को पूरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए वैश्विक गीता पाठ का आयोजन फिर से अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में किया जा रहा है।’

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि भगवत् गीता के उपदेशों के सहारे भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए लोगों के जीवन स्तर को बढ़ाने की जरूरत है और ऐसा करना सिर्फ गीता के उपदेशों से ही संभव है। खट्टर ने राजनीति में भी गीता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ‘गीता’ राजनेताओं को सही दिशा दिखा सकती है।

हरियाणा के राज्यपाल द्वारा आमंत्रित अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक प्रख्यात जैनाचार्य ने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि अन्तराष्ट्रीय गीता महोत्सव के माध्यम से एक अद्वितीय अध्यात्मिक यात्रा करने का मौका मिला है | श्रीमद्भागवत गीता एक अद्भूत महाकाव्य है जो हमें अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देता है | मौजूदा समय में सभी अपने अधिकारों के लिए तो सतर्क है परन्तु अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक नहीं है, जिससे अनेक समस्याएं पैदा हो रही है| आमतौर पर कर्तव्यों का पालन स्वार्थ, राग और मोह से प्रेरित होकर करता है | गीता इस बात पर जोर देती है कि इन सब को त्याग कर निष्काम भाव से कर्म करना चाहिए | उन्होंने कहा कि गीता ज्ञान को युवा पीढ़ी तक पहुँचाना हम सबका दायित्व है|

आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता किसी जाति, साम्प्रदाय, देश या काल तक सीमित नहीं है | गीता की जरूरत सम्पूर्ण विश्व को है| इसके अन्दर विश्व को भ्रष्टाचार, गलत आचरण, चोरी डकैती, अशांति, अन्याय व आतंकवाद से बचने की क्षमता है | मनुष्य का आचरण ईश्वरीय सत्य पर आधारित होना चाहिये | हमें अवगुणों को छोड़ कर गुणोंको अपनाना चाहिए, आचरण मानवीय होना चाहिए व चरित्र दिव्य होना चाहिये | यही गीता ज्ञान है जिसपर चलकर अनेक वैश्विक समस्याओं का समाधान मुमकिन है | गीता महोत्सव में अध्यात्मिक गतिविधयों के साथ विश्व विख्यात आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनियां रंगोली, चित्रकला एवं छायाचित्रण प्रतियोगिताएं, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कलाकारों एवं शिल्पियों का संगम द्वारा क्रॉफ्ट मेला व सरस मेला, वैश्विक स्तर पर गीता मंत्रोच्चारण, वैश्विक दौड़, फन फेयर, सुर संध्या आदि कार्यक्रमों का भी आयोजन हो रहा है |