गंगा के नाम पर सिर्फ छलावा करती हैं सरकारें- भागवत आचार्य शंकर भूषण शास्त्री ‘ब्रह्मचारी जी’

नई दिल्ली। माँ गंगा  की दुर्दशा देख कर रोना आ गया और मैं बिलखकर रो पड़ा। रोने के साथ-साथ मेरा क्रोध बढ़ता गया।

मित्रों! मैं अपनी जन्मदात्री माँ को खो चुका हूँ। मुझे पता है कि माँ के खोने का असह्य दुःख क्या होता है? वो सब कुछ मैंने देखा और सहा है। दोस्तों! एक परिवार की माँ जब छोड़ कर जाती है, तब सिर्फ एक परिवार ही दुखित और व्यथित होता है। जरा सोचें, यदि सारे संसार की माँ, हमारे पूर्वजों को तारने वाली माँ जब भारतवर्ष से विलुप्त हो जाएँगी, तो क्या वेदना होगी? क्या दारुण दुःख होगा?

शायद आज का व्यक्ति यह अनुभव नहीं कर पा रहा है। यदि हम-सबकी माँ हम-सबको छोड़कर चली गयीं, तो हम और हमारी भावी पीढ़ियाँ क्या गन्दे नाले में मुक्ति पाएँगी। चाहे वो राजनैतिक व्यक्ति हों या धर्मगुरु हों अथवा हमारे देश की मीडिया।

झूठे वादे और सपने दिखाकर कि हम गंगा को निर्मल बनाएँगे, यह कहकर हमें धोखा दिया गया। जो अनेक झूठे वादे करता है और उस पर कुछ भी करता नहीं। तो मुझे लगता है कि वो मेरा सबसे बड़ा शत्रु है। न केवल हमारा बल्कि वास्तविकता में मेरा और माँ गंगा के प्रेमियों का सबसे बड़ा शत्रु है।

मेरी देश की जनता से अपील है कि ऐसे राजनेता, धर्मनेता और मीडिया आदि से सतर्क रहें और मिलकर देश की समस्याओं से जूझने के लिए कमर कसें। जहाँ सरकार से ही काम अपेक्षित हो, वहाँ उस पर ज़ोरदार दबाव डालें।

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के युवा सन्त भागवत-आचार्य शंकर भूषण शास्त्री ‘ब्रह्मचारी जी’ की इस तल्ख़ टिप्पणी पर धर्मयात्रा ने तहक़ीक़ात की। यह पाया कि न्यूजीलैण्ड के किसी प्रवासी भारतीय द्वारा ऋषिकेश में गंगा की दुर्गति पर बनाया गया एक वीडियो (जिसका ज़िक्र ब्रह्मचारी जी ने किया है) जब तेज़ी से देश-विदेश में वायरल हुआ, तब उत्तराखंड सरकार हरकत में आयी। उधर विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र द्वारा सोशल मीडिया के ज़रिए बड़ी सख़्ती से सन्देश जारी किया गया।

आनन-फ़ानन में हरिद्वार-ऋषिकेश के सांसद एवं पूर्व मुख्यमन्त्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने गंगानगरी-तीर्थनगरी ऋषिकेश में सम्बन्धित अफ़सरों की आकस्मिक बैठक ली और उन्हें सख़्त निर्देश दिए कि गंगाजी में जा रहे गन्दे नालों का वैकल्पिक इंतज़ाम करके उन्हें गंगा में गिरने से रोका जाय। बताते चलें कि इन दिनों उत्तराखण्ड में इसकी ख़ासी चर्चा है।

उधर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार पर गंगा को प्रदूषणमुक्त करने का दबाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।