‘‘गंगा भारत की जीवन रेखा है, गंगा कानून से बचेंगी माँ भागीरथी’’-राम महेश मिश्र

नई दिल्ली। सुरसरि केवल गंगा माँ को कहा जाता है। यह देवनदी आज संकट में है। गंगा के लिए बहुत बातें हुई हैं, काम नहीं के बराबर हुआ है। मुझे बताते हुए हर्ष है कि प्रयाग निवासी मेरे सखा श्री अरुण कुमार गुप्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठतम अधिवक्ताओं में से एक हैं और देश के जाने-माने कानूनविद् हैं। उन्होंने विशेष रूप से गंगा के लिए बहुत कार्य किया है। गंगा की निर्मलता, सजलता और अविरलता के लिए कानून की शरण में जाकर विभिन्न निर्णय कराने वाले वह अनूठे एडवोकेट हैं। उनकी याचिकाएँ और इलाहाबाद हाईकोर्ट के ही न्यायमूर्ति जस्टिस अरुण टण्डन के निर्णय, इन्होंने गंगा के लिए बड़ी भूमिकाएँ अदा कीं।

श्री अरुण कुमार गुप्ता इन दिनों प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की पहल पर गंगा के लिए बनाये जा रहे कानून पर कार्य कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि श्री अरुण कुमार गुप्ता, श्री मेहता एवं श्री कुलश्रेष्ठ की टीम ने पहला गंगा एक्ट ड्राफ्ट मा. सर्वोच्च न्यायालय को सौंपा था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से जवाब तलब किया था। तत्कालीन केन्द्र सरकार ने कोर्ट से कहा था कि इस काम को हम सम्पन्न करायेंगे।

भारत सरकार ने 2009 में गंगा को ‘राष्ट्रीय नदी’ घोषित कर इसकी घोषणा भी की और प्रधानमन्त्री की अध्यक्षता में छळठत्। बनायी। इसकी बैठकों हेतु तत्कालीन प्रधानमन्त्री समय नहीं दे सके, इसलिए वह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। उसके बाद श्री अरुण कुमार गुप्ता ने भारत सरकार के तत्कालीन जल संसाधन मन्त्री श्री हरीश रावत तथा उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमन्त्री श्री विजय बहुगुणा को गंगा एक्ट का ड्राफ्ट सौंपा, जिस पर वे भी कुछ कर नहीं सके।

कालान्तर में गुप्ता एण्ड टीम ने एक संशोधित व समृद्ध ‘गंगा एक्ट ड्राफ्ट’ नए प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को सौंपा। प्रधानमन्त्री जी ने एक त्मअपमू कमेटी बनायी है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गिरधर मालवीय (महामना मदन मोहन मालवीय के पौत्र) एवं श्री अरुण कुमार गुप्ता विशेषज्ञ सदस्य हैं। वे गंगा एक्ट का अन्तिम ड्राफ्ट नमामि गंगे के महानिदेशक श्री उदय प्रताप सिंह, जल संसाधन मंत्रालय के सचिव श्री अमरजीत सिंह एवं पूर्व गंगा शुद्धि मन्त्री सुश्री उमा भारती के माध्यम से माननीय प्रधानमन्त्री को प्रस्तुत कर चुके हैं।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि नए प्रस्तावित कानून में गंगा को सेण्ट्रल सब्जेक्ट बनाया गया है। चूँकि कई (5) राज्य गंगाजी की प्रवाह सीमा में आते हैं, इसलिए केन्द्र और पाँचों प्रान्तों को गंगा के लिए जिम्मेदार बनाया जा रहा है। अभी तक सब राज्य अपनी-अपनी जिम्मेदारी से भागते रहे हैं। नए कानून में मेट्रो की तरह एक उच्चाधिकार प्राप्त ‘एक्सक्लूसिव अथाॅरिटी’ गंगा पर बना दी जायेगी, जो सक्रियता से गंगा के मामले निपटायेगी और सारे अपेक्षित सुधार कार्य करायेगी। यह अथाॅरिटी गंगा प्रवाह क्षेत्र को प्रान्त, मण्डल, जिला, तहसील एवं विकास खण्ड इन पाँच हिस्सों में विभक्त कर गंगाजी को प्रदूषणमुक्त करने के सभी उपायों के क्रियान्वयन का फार्मूला केन्द्र व राज्यों को देगी तथा समय-समय पर प्रगति की समीक्षा भी करेगी।

माननीय प्रधानमन्त्री जी की अपेक्षा पर श्री अरुण कुमार गुप्ता वाली कमेटी गंगा एक्ट ड्राफ्ट को फाइनली त्मअपमू कर रही है, जिसका कार्य अन्तिम चरण में है। प्रस्तावित केन्द्रीय गंगा कानून के बनने और इसके क्रियान्वयन् से गंगा का तो कल्याण होगा ही, वह सभी का कल्याण करने में सफल होती रहेंगी, साथ ही गोमा कही जाने वाली गोमती सहित देश की सभी नदियों का भी इससे मंगल होगा। नये गंगा कानून की सफलता के लिए हम सबकी ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ इस लिंक को जरुर देखें।

लेखक गोमती एक्शन परिवार के महासचिव एवं विश्व जागृति मिशन नई दिल्ली के निदेशक हैं।