गंगा आरती है हिन्दी, हिन्दुस्तान और वसुधैव कुटुुम्बकम की आरती- स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। भारत के लिये यह गर्व का विषय है कि भारत की आराध्या और भारत का गर्व माँ गंगा जिनकी परमार्थ गंगा तट पर होने वाली विश्व विख्यात आरती को माॅरीशस से निमंत्रण मिला है। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों को आज स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने तिलक लगाकर विदा किया।
परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार आज माॅरीशस के लिये विदा हुये, वहां जाकर वे भारत की संस्कृति, संस्कार और दिव्य आरती विश्व हिन्दी सम्मेलन के पूर्व संध्या पर करने के पश्चात सम्मेलन की शुरूआत होगी। 11 वां विश्व हिन्दी सम्मेलन विदेश मंत्रालय भारत सरकार द्वारा माॅरीशस सरकार के सहयोग से 18-20 अगस्त को आयोजित किया जा रहा है। भारत सरकार मंे आईÛसीÛसीÛआरÛ ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महराज से आग्रह किया की गंगा तट पर होने वाली दिव्य आरती ऋषिकुमारों के वेद मंत्रों के उद्घोष के साथ ’गंगा तालाब माॅरीशस’ में भी की जाये । परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमारों द्वारा वेद मंत्रों के उद्घोष से 11 वें विश्व हिन्दी सम्मेलन का आगाज गंगा आरती से किया जायेंगा। इस वर्ष माॅरीशस तीसरी बार विश्व हिन्दी सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य है ’भाषा और संस्कृति’ चलंे साथ-साथ।
इस सम्मेलन में भारत के सभी प्रांतों से तथा विश्व के अनेक देशों से हिन्दी के जाने-माने लेखक, कलाकार, साहित्यकार, कहानीकार, गीतकार सहभाग कर रहे है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से पूरा विश्व हिन्दी के महत्व और गौरव को जान पायेगा।
स्वामी जी महाराज ने जानकारी दी की कुछ वर्ष पूर्व गंगा पूजन के अवसर पर भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज जी परमार्थ निकेतन में आयी थी उन्होने माँ गंगा की आरती, गंगा पूजन, गंगा माँ को साड़ी अर्पण (चुनरी मनोरथ) आदि संस्कारों से वे अत्यंत प्रभावित हुयीं। अतः इस बार विश्व हिन्दी सम्मेलन का आगाज सम्मेलन की पूर्व संध्या पर दिव्य गंगा आरती से किया जाये।
अनेेक वर्ष पूर्व माॅरीशस के श्रद्धालुओं ने भारत से गंगा जल ले जाकर एक तालाब में डाला और अब उसी गंगा तालाब के तट पर हनुमान चालीसा और माँ गंगा की आरती होगी।
स्वामी जी महाराज ने जानकारी दी की ऋषिकेश, ज्वालापुर, रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, देवप्रयाग, इलाहाबाद, बनारस, बिठूर, में दिव्य आरती का क्रम शुरू हो गया है साथ ही अब तो अमेरिका के पेसीफिक ओशन (महासागर), जर्मनी के प्रसिद्ध शहर बर्लिन में भी तथा विश्व के अन्य देशों में भी जहां भी स्वामी जी महाराज जाते हैं, आरती कराने का वे प्रयास करते रहते है ताकि लोग प्रकृति के महत्व को, नदियों की महत्ता को समझ कर उनसे जुड़ सकें है।
स्वामी जी महाराज के सान्निध्य में स्पेन में सागर के तट पर माँ गंगा की आरती की गयी थी जिसमें चार हजार से अधिक लोगों ने सहभाग किया था। जर्मनी के प्रसिद्ध शहर बर्लिन मंे भी 6 हजार पांच सौ से अधिक लोगों ने गंगा आरती, योग और गंगा योग किया था। धीरे-धीरे पूरे विश्व मंे नदियांे और सागर के तट पर गंगा आरती का क्रम आरम्भ हो रहा है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि परमार्थ निकेतन ऋषिकेश और हरिद्वार की आरती अपने आप में अनुपम है। बनारस की आरती को अतुल्य भारत में स्थान प्राप्त है जिसे परमार्थ निकेतन द्वारा शुरूआत कर 1999 की अन्तिम संध्या पर शुरू किया गया था । उन्होने कहा कि हर घाट और हर घट में हो आरती यही हमारा सपना है। स्वामी जी महाराज ने बताया की विश्व के देशों में गंगा की आरती का मतलब है ’थैंक्स गिंविग सेरेमनी’ प्रकृति, प्रभु एवं नदियों के प्रति (धन्यवाद समारोह) है। गंगा की आरती का मतलब है कि आरती के बाद सबको संकल्प लेना है की देश की नदियों के तटों को हरा-भरा और स्वच्छ रखंेगेे, प्रदूषण से मुक्त रखंेगेे। यही जागरण की बेला है इसी से स्वच्छ भारत अभियान और स्वच्छ विश्व अभियान का आगाज होगा।
परमार्थ निकेतन परिवार से हिन्दी सम्मेलन में सहभाग हेतु सुश्री गंगा नन्दिनी त्रिपाठी, आचार्य दिलीप क्षेत्री, आचार्य दीपक शर्मा, नरेन्द्र बिष्ट, पुनीत मिश्रा, सुर्यप्रकाश गौड़ एवं अभय पाण्डे ऋषिकुमार माँ गंगा की आरती के लिये पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती जी महाराज एवं पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का आशीर्वाद लेकर आज प्रातःकाल माॅरीशस के लिये रवाना हुये।