कुंभ की आध्यात्मिक सरिता में लोक कला की बहेगी वैतरिणी

प्रयागराज/ मनीष दुबे। कुंभ की आध्यात्मिक सरिता में शास्त्रीय नृत्य, संगीत की वैतरिणी बहेगी। कला प्रेमियों को कुंभ में धर्म, शास्त्र, आस्था के साथ कला के संगम का दर्शन होगा। 50 दिवसीय आयोजन में पद्मविभूषण, पद्मभूषण, पद्मश्री सम्मानित कला विभूतियां मंच पर सुशोभित होंगी। 15 जनवरी से 4 मार्च 2019 तक प्रयागराज में होने वाले कुंभ में संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश की ओर से सांस्कृतिक मंच सजाया गया है। यहां भारतीय शास्त्रीय संगीत व नृत्य की विविधिता का दर्शन होगा।

उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा कुम्भ नगरी प्रयागराज में सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बहु-आयामी प्रयास किया है। इसी सिलसिले में प्रयागराज में जगह- जगह सांस्कृतिक मंच तैयार किये गए हैं। प्रयागराज में सांस्कृतिक गतिविधियों के मंचन के लिए कुल २० मंच तैयार किये गए हैं। इन मंचों में कुम्भ को केंद्र बिंदु बना कर पूरे कुम्भ-उत्सव अवधि के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। चाहे वह नृत्य हो या गीत, चाहे नाटक हो या संगीत – कला का हर रंग इन मंचों पर बिखेरा जाएगा।

कुम्भ के वैश्विक आयाम को ध्यान में रख कर संगम नगरी प्रयागराज कला और संस्कृति का संगम इन मंचों पर प्रस्तुत कर रही है। नाटक-नौटंकी, लोक-गीत, लोक-नृत्य, जादू-कठपुतली, पाई-डंडा, राय-सैरा जैसे ठेठ लोक संस्कृति की कलाएं भी दर्शकों का मन मुग्ध करेंगी। इन 20 मंचों पर 35 दिनों तक करीब 500 कलाकार अपने ग्रुर के साथ प्रस्तुतियां देंगे। करीब 4000 से ज्यादा कलाकारों को उत्तरप्रदेश संस्कृति विभाग के ये मंच अपनी कला-प्रस्तुति का अवसर प्रदान करेंगे।