मजबूत इरादों के साथ बढ़े हरित विकास की ओर प्रकृति का शोषण नहीं करें संर्वधन -स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। गंगा रिसोर्ट, ऋषिकेश में धर्म, स्थिरता एवं आध्यात्मिकता विषय पर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन गलवे फाउण्डेशन, स्ट्राइक्स, ग्लोबल पीस फाउण्डेशन, परमार्थ निकेेतन, सेवा चाइल्ड, सीडीसी, सीएसआर-पी, कोलाब, इण्डिया सी एस आर के संयुक्त प्रयासों से किया गया।
चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, परमाध्यक्ष परमार्थ निकेतन, डॉ सत्यानारायणन, स्ट्राइक्स के प्रमुख, डॉ हरभजन सिंह,  डॉ ध्रबा प्रसाद, ग्लोबल पीस फाउण्डेशन के भारत में प्रतिनिधि, स्वामी गौरांग दास जी, आईआईटी मुम्बई, डॉ विवेक अग्रवाल, सीडीसी प्रमुख, डॉ स्नेहानन्द सिन्हा, ट्रष्टी अखण्ड ज्योति नेत्र चिकित्सालय नोयडा, बौद्व विद्वान, श्री त्सटान ग्युरमत, डॉ चांद भारद्वाज, डॉ मोहन एस रावत, डॉ अनील जग्गी, डॉ खुर्रम नायाब, डॉ अनु आगा, नगरपालिका अध्यक्ष दीप शर्मा जी ने दीप प्रज्जवलित कर  कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।
इस समारोह में धर्मगुरू, व्यवसायिक उद्यमी, सरकार, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभाग किया। सम्मेलन के आयोजन का उद्देश्य था कि सभी एक साथ जुड़कर धार्मिक एवं आध्यात्मिक उत्थान के लिये प्रयास करें ताकि सतत विकास हेतु सहज विकास की प्रक्रिया का सूत्रपात हो। साथ ही विचार मंथन किया गया कि किस प्रकार सभी संस्थायें मिलकर सामाजिक बदलाव और हरित क्रन्ति का सूत्रपात कर सकती है।
सभी गणमान्य अतिथियों ने सहज विकास से सतत विकास की यात्रा के विषय पर तथा पर्सपेक्टिव, प्रैक्टिसेज एवं पोसिबिलिटिज पर मंथन किया।
इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में एथिक्ल, धार्मिक लीडरशिप, नैतिक नेतृत्व, (आचार-विचार), सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) और स्पिरिच्वलिटी  (आध्यात्मिकता) विषय पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने उद्बोधन दिया। साथ ही वक्ताओं ने एथिक्ल लीडरशिप, सस्टेनेबल मैनेजमेंट, प्रबंधन, कर्मयोग जाग्रति एवं आर्थिक प्रजातंत्र तथा वैदिक परिपेक्ष्य विषय पर विचार व्यक्त किये।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि ’वर्तमान समय में प्रकृति, पर्यावरण और जल का संरक्षण ही भावी पीढ़ी को जीवन प्रदान कर सकता है। प्राकृतिक संपदा का इस प्रकार दोहन न हो की आने वाले समय में भावी पीढि़यों को जीवन के लिये ही संघर्ष करना पड़े। स्वामी जी ने कहा कि मजबूत इरादों के साथ हरित विकास की ओर बढ़े तो सकारात्मक परिणाम निश्चित रूप से प्राप्त होंगे। उन्होने कहा सहज और सतत विकास से तात्पर्य आर्थिक समृद्धि के साथ पर्यावरण को सुरक्षित रखना; मनुष्य और पर्यावरण के मध्य अर्न्तसंबंधों को हरित सम्बन्धों के रूप में  सहेजना। उन्होने कहा विकास ऐसा हो ’जिसमें प्रकृति का शोषण नहीं संर्वधन हो’; प्रकृति को नियमों के अनुरूप तथा जैव विविधता की रक्षा के लिये हो।’ इस सम्मेलन का संचालन डॉ अनील जग्गी, ने किया आत्म सरस्वती जी, परमार्थ निकेतन से सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी एवं अनेक विशिष्ट अतिथि विद्यमान थे। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने विशिष्ट अतिथियों को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया तथा सभी को ’गो ग्रीन’ हरित क्रान्ति की ओर बढ़ने का संकल्प कराया।