अज्ञान को परमात्मा की शरण में त्याग कर यहां विद्यमान दिव्य शक्तियों को अंगीकार करना ही कथा का सार – गोपालानन्द जी महाराज

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन सत्संग सभागार में भागवत कथा का शुभारम्भ हुआ। कथा व्यास श्री गोपालानन्द जी महाराज के मुखारबिन्द से प्रवाहित हो रही ’श्री भागवत कथा’ ज्ञानधारा का आज शुभारम्भ हुआ।
महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती जी महाराज, स्वामी गोपालानन्द जी महाराज और अन्य पूज्य संतों ने दीप प्रज्वलित कर कथा का शुभारम्भ किया। भागवत कथा की ज्ञान धारा 26 जुलाई तक प्रवाहित होगी।
भागवत कथा के उद्घाटन अवसर पर महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती जी महाराज, ने कहा कि ’भगवत कथा मन की व्यथा को हरती है, कथा के श्रवण मात्र से जीवन में अमोघ शक्तियां प्राप्त होती है। इन शक्तिओं को  समाज कल्याण के लिये भी लगाये। श्रेष्ठ जीव पहले जन कल्याण की बात करते है फिर स्व कल्याण की। उन्होने कहा कि हमारे देश म;ें समाज में आज भी लोगों को सेवा, सहायता और सहयोग की आवश्यकता है अतः आगे बढ़कर उनकी सहयता करे यही तो सच्ची साधना है तथा जीवन का सार भी यही है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भेजे संदेश में कहा कि ’भारत ऋषियों की भूमि है, दुनिया के कोने-कोने से साधक यहां शान्ति की तलाश में आते है। भारतीय अध्यात्म एवं दर्शन ने सदियों से शान्ति और सदाचार को आत्मसात करने की शिक्षा एवं संस्कार प्रदान किये है। वर्तमान समय में भी कथाओं के आयोजन का उद्देश्य आपसी प्रेम, सद्भाव और शान्ति के साथ जीवन जीने का संदेश प्रेषित करना है। उन्होने कहा कि आन्तरीक और बाह्य शान्ति की स्थापना के लिये शुद्ध वातावरण और शुद्ध विचारों का होना नितांत आवश्यक है।

कथा व्यास श्री गोपालानन्द जी महाराज ने कहा, ’भागवत कथा हमारे अन्दर के अज्ञान को समाप्त कर ज्ञान के चक्षुओं को खोलती है। कथा के माध्यम से मनुष्य स्वयं से जुड़ता है साथ ही कथा हमें सर्वशक्तिमान ईश्वर की समिपता का एहसास कराती है। उन्होने कहा कि अज्ञान को परमात्मा की शरण में त्याग कर यहां विद्यमान दिव्य शक्तियों को अंगीकार करना ही कथा का है सार है। भागवत कथा के उद्घाटन अवसर पर पूज्य संत, परमार्थ परिवार के सदस्य, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार और श्रद्धालुगण उपस्थित थे।