भगवान महावीर की शिक्षाओं को जीवन में उतारे – आचार्य लोकेश

कुआला लामपुर/ अर्चना सक्सेना। अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य डा. लोकेश मुनि ने कुआला लामपुर में आध्यात्मिक सन्देश दिया | चार दिन तक चली आध्यात्मिक व्याख्यानमाला / प्रवचन शृंखला  में आचार्य लोकेश ने मानव जीवन की सार्थकता, आनंदमय जीवन का मूल मंत्र, कर्म बंधन और मुक्ति की प्रक्रिया, सफलता के सूत्र, द आर्ट ऑफ़ पोजिटिव थिंकिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संबोधित किया|

आचार्य लोकेश ने कहा कि हमारे संसार में अनेक प्रकार की विविधता है, उस विविधता के अनेक कारणों में सबसे बढ़ा कारण है, हमारा अपना संचित कर्म हमारे सत्कर्मों से सद्भाग्य का निर्माण होता है तो हमारे अपने गलत कार्यों से दुर्भाग्य का भी निर्माण होता है| जैन दर्शन कर्मवाद में विश्वास करता है| कर्म है, उसका बंधन है, तो भगवान महावीर की वाणी में उसकी मुक्ति की प्रक्रिया भी सुलभ है|  कर्म बंधन और मुक्ति के रहस्य को यदि हम ठीक से जान लें तो बहुत से अनावश्यक बंधनों से हम बच सकते हैं, उसके तीव्र परिणामों से बच सकते हैं|

आचार्य लोकेश ने आगे कहा सृष्टि दो प्रकार की है सकारात्मक और नकारात्मक| सकारात्मक सोच जहाँ एक ओर मनुष्य के व्यक्तित्व विकास और जीवन निर्माण में सहायक होती है वही नकारात्मक सोच बाधक बनती है | कैसे सोचना है यह भी एक बड़ी कला है| सकारात्मक चिंतन वाले को कभी कोई दुखी नहीं बना सकता|

सफलता पर चर्चा करते हुए आचार्य लोकेश ने कहा कि हम वर्तमान में जीवन जिए तथा अपनी समस्त ऊर्जा का सम्यक दिशा में उपयोग करें। किन्तु अधिकांश में मनुष्य अतीत और भविष्य की उधेड़बुन में अपना समय नष्ट कर देता है जबकि सफलता उन्हें प्राप्त होती है जो वर्तमान में जीना जानते है|

आचार्य लोकेश ने कहा भाग्य अपनी रेखाओं में ही नहीं, अपने पुरुषार्थ के अधीन है| हमारा वर्तमान का पुरुषार्थ ही भविष्य में हमारा भाग्य बनकर सामने आता है। भगवान महावीर ने पुरुषार्थवाद पर बल दिया। हम अपने पुरुषार्थ के बल पर अपना भाग्य बदल सकते है|