एक मंच पर लाखों की तादाद में ब्राह्मण, डॉ विजय मिश्रा की दूरदर्शी सोच का परिणाम- राम महेश मिश्र

नई दिल्ली। डॉ. विजय मिश्र व साथी विप्र भाइयों का यह प्रयास निःसन्देह बड़ा सराहनीय रहा। जब सार्थक विषयों को लेकर सार्थक चर्चाएँ होती हैं, तब चिन्तनशील एवं समझदार व्यक्ति एकजुट होने लगते हैं। यह एकजुटता हमें स्नेहिल सम्बन्धों में बाँधती है, जो शनै: शनै: एक संगठित शक्ति बन जाती है।

आज वास्तव में इसकी बहुत ज़रूरत है। प्रिय डॉ.विजय मिश्र जी की पहल पर जयपुर से शुरू हुआ प्रयास देश के सभी ब्राह्मण समाजों की ओर से भी होना चाहिए। फिर आगे बढ़कर और ऊपर उठकर सभी समूहों को आपस में मिलना चाहिए, ताकि यह ताक़त ‘महाताक़त’ बन सके। इस महासंगठन का लक्ष्य ब्राह्मण समाज को परिष्कृत व परिमार्जित करते हुए उसका उन्नयन तो हो ही, भारतीय संस्कृति का रक्षण एवं राष्ट्र रक्षा तथा माँ भारती का समन्वित विकास उसका महाउद्देश्य हो।

यह महालक्ष्य समग्र हिन्दू एकता से ही सम्भव है, जिसके लिए भी भागीरथ प्रयत्न करने पड़ेंगे। बिना किसी संकोच के मैं कहना चाहूँगा कि भारतवर्ष की घनघोर विसंगतियों से भरी हुई वर्तमान स्थितियों में राष्ट्रीय एकता के लिए हिन्दू एकता ज़रूरी है और हिन्दू एकता के लिए ब्राह्मण एकता परमावश्यक।

इस दिशा में जो प्रयास प्रिय विजय जी ने किए हैं, वे सर्वथा सराहना के योग्य हैं। वे इस ग्रुप की शुद्धता पर बेहद सतर्क व कठोर रहे हैं, यह प्रशंसनीय है। इसके लिए उनके आसपास मज़बूती से खड़े रहे कई भाइयों और बहिनों की सराहना करनी होगी। “एकल परिवारों के बाहुल्य वाले आज के भारत में सघन प्रेम सम्बन्धों से गुँथे तीन पीढ़ियों वाले इस विराट् सम्मिलित परिवार के हर सदस्य को हार्दिक बधाई।” यह प्रयास बढ़ते रहें और सभीजन विजय बाबू को मज़बूत करते रहें, यह अपेक्षा है और आवश्यकता भी। आज एक लाख वाला यह परिवार शीघ्र एक करोड़ वाला परिवार बने और अपने लक्ष्य को प्राप्त करे, यह आशीर्वाद भी सभी अनुजों, अनुजाओं और नन्हें-मुन्नों को देता हूँ तथा इस लार्जर फ़ैमिली के सभी बड़ों से शुभाशीष की प्रार्थना करता हूँ।

हाँ! अन्य ब्राह्मण ग्रुपों को भी आगे आना होगा, विशेषकर उन्हें जो संख्या बल में काफ़ी आगे निकल गए हैं। उन्हें भी शुचिता व सतर्कता बरतने, दूरदर्शी भाव रखने, हृदय बड़ा रखने तथा लक्ष्य व्यापक एवं राष्ट्रीय रखने की ज़रूरत रहेगी। डॉ.विजय मिश्र का अनुभवजन्य मार्गदर्शन उस लक्ष्यपूर्ति में नि:सन्देह सहायक हो सकता है। इस धरती पर कोई ऐसा कार्य नहीं, जो असम्भव हो।