“भ्रामक झूठ है गुरु द्रोणाचार्य द्वारा धनुर्विद्या के महान साधक एकलव्य का अँगूठा कटवाने की कहानी” -राम महेश मिश्र

नई दिल्ली। धनुर्विद्या में सदा से यह नियम है कि प्रत्यंचा चढ़ाते समय उसमें अंगूठे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। देखिए! ये बेटियॉं इस नियम का पालन बख़ूबी कर रही हैं।

धनुर्विद्या के महान विद्यार्थी ‘एकलव्य’ को यह ग़लती करते गुरु द्रोणाचार्य ने तब पहली बार देखा था, जब उसने अपने धनुष से वाण चलाकर कुत्ते का मुँह भर दिया था। एकलव्य अँगूठा का प्रयोग कर रहा था। इसीलिए कुत्ते का मुँह तो वाणों से भर गया था, लेकिन उससे ख़ून नहीं निकला था और कुत्ता मरा नहीं था, क्योंकि शर-संधान में मारक क्षमता नहीं थी।

यह सब देखकर उस समय के महानतम धनुर्धर गुरु द्रोणाचार्य को अपनी विद्या के दुरुपयोग की चिन्ता हुई। क्योंकि अंगूठे और मध्यमा उँगली के बीच दूरी अधिक होने के संधान के समय धनुर्धर की एकाग्रता भंग होती है, जब कि मध्यमा व तर्ज़नी के बीच प्राकृतिक दूरी होने के कारण निशाना सटीक बैठता है और उस संधान में मारक क्षमता अद्भुत होती है।

द्रोणाचार्य ने २-३ बार एकलव्य को समझाया और अंगूठे का इस्तेमाल न करने को कहा। पुराने अभ्यास के कारण एकलव्य से वह ग़लती बार-बार होती रही। तभी द्रोणाचार्य ने उससे कहा था- “एकलव्य! तुमने मुझे गुरु माना है, यदि तुममें ज़रा सी भी श्रद्धा गुरु में है तो तुम यह मानकर उँगलियों का प्रयोग करो कि तुम्हारे हाथ में अँगूठा है ही नहीं और अपना अँगूठा तुमने गुरुदेव को दे दिया है।” उसके बाद एकलव्य से वह ग़लती नहीं हुयी।

कालान्तर में झूठा इतिहास लिखकर यह प्रचारित कर दिया गया कि गुरु द्रोण ने शिष्य एकलव्य का अँगूठा कटवा लिया था। अनेक वक़्ता-प्रवक्ता और सन्त-महंत भी सदियों से यही कहानियाँ मंचों से सुनाते रहे हैं और यह मिथ्या सच स्थापित हो गया है। ऐसे भ्रामक तथ्य और उनका सही स्वरूप आज की स्थितियों में समाज-देश के सम्मुख लाने की महती आवश्यकता है।आल इण्डिया जर्नलिस्टस यूनियन के संरक्षक श्री राम महेश मिश्र कहते हैं कि ऐसी सैकड़ों ग़लतियाँ बीते 150 साल के हमारे इतिहास में हुई हैं, जिनका परिमार्जन यानी सुधार करना देश की एकता एवं समरस्ता के लिए बेहद ज़रूरी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई विद्वान, लेखक, कवि, प्रकाशक और धनाड्य देशवासी ऐसी भयंकर ग़लतियों के सुधार के लिए आगे आएँगे? उन्होंने कहा कि वास्तव में यह सेवा भीतर से तेज़ी से कमज़ोर होते जा रहे अपने राष्ट्र की भारी सेवा होगी। उन्होंने इस पोस्ट के प्रेरक भारतवर्ष के महान अन्तरिक्ष वैज्ञानिक एवं वेदज्ञाता डॉ. ओम प्रकाश जी पाण्डेय के प्रति हार्दिक साधुवाद भी व्यक्त किया।