देव दीपावली कल: धरती पर आएंगे देवता दीपावली मनाने, करें अपने संकटों का अंत

वाराणसी। कल शुक्रवार को चौमासी चौदस व कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा के उपलक्ष्य में देव दीपावली पर्व मनाया जाएगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान शंकर ने देवताओं की प्रार्थना पर सभी को उत्पीड़ित करने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया, जिसके उल्लास में देवताओं ने दीपावली मनाई, जिसे देव दीपावली के रूप में मान्यता मिली। इसी तिथि को भगवान शंकर ने अपने हाथों बसाई काशी के अहंकारी राजा दिवोदास के अहंकार को नष्ट कर दिया। यह पर्व ऋतुओं में श्रेष्ठ शरद, मासों में श्रेष्ठ कार्तिक व तिथियों में श्रेष्ठ पूर्णमासी के दिन मनाया जाता है, इसे देवताओं का भी दिन माना जाता है।
इस माह की पवित्रता इस बात से भी है कि इसी माह में ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि ने महापुनीत पर्वों को प्रमाणित किया है। इस माह किए हुए स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना आदि का अनन्त फल है। इस पर्व को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर काशी के घाटों पर दीप जलाकर मनाया जाता है।
मान्यता है कि इस दिन देवताओं का पृथ्वी पर आगमन होता है। देव दीपावली के विशेष पूजन व उपायों से व्यक्ति का भाग्य उज्ज्वल होता है, संकट समाप्त होते हैं तथा जीवन में खुशहाली आती है।
 
पूजन विधि:
शिवालय जाकर विधिवत षोडशोपचार पूजन करें। गौघृत का दीप करें, चंदन की धूप करें, गुलाब के फूल चढ़ाएं, चंदन से शिवलिंग पर त्रिपुंड बनाएं, अबीर चढ़ाएं, खीर पूड़ी व बर्फी का भोग लगाएं तथा इस विशेष मंत्र से 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।
पूजन मुहूर्त: रात 20:53 से रात 22:21 तक। (अमृत काल)
पूजन मंत्र: ॐ देवदेवाय नमः॥
 
उपाय
उज्ज्वल भविष्य हेतु शिवलिंग पर दही चढ़ाएं।
जीवन में खुशहाली हेतु शिवलिंग पर कमल का फूल चढ़ाएं।
संकटों के नाश के लिए शिवलिंग के समीप 15 घी के दीपक जलाएं।
 
ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय, वाराणसी
9450537461