ॐ नमः शिवाय से गूँजा प्रीत विहार अंचल, दिव्य आरती के साथ हुआ विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का समापन

पूर्वी दिल्ली। विश्व जागृति मिशन के पूर्वी दिल्ली मण्डल द्वारा आयोजित विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का आज सायंकाल विधिवत समापन हो गया। मिशन प्रमुख आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज के सान्निध्य में आहूत सत्संग समारोह का श्रीगणेश २९ मार्च की सायंकाल हुआ था। सत्संग में हज़ारों ज्ञान-जिज्ञासुओं ने भाग लिया।

विदाई सत्र में उपस्थित कई हज़ार स्त्री-पुरुषों को सम्बोधित करते हुये सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक पौधे के अंकुरण के साथ ही सबसे ऊपर एक नोक बनी होती है। वह नुकीला हिस्सा वास्तव में प्रेरणा का कार्य करता है। हर माली सदैव ध्यान रखता है कि कहीं कोई उस नुकीले भाग कोन तोड़ दे।माली पत्तों और फूल को तोड़ लेने पर कम नाराज़ होता है, लेकिन पौधे उसे नुकीले व प्रेरक भाग को हानि पहुँचाना वह बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं कर पाता। इसी तरह जीवन रूपी पौधे के नुकीले हिस्से को ‘गुरु’ कहा जाता है।गुरुतत्व वास्तव में मानव जीवन का प्रेरक तत्व है।गुरु काँटों भरे राह को पुष्प भरा मार्ग बनाते हैं और निराश जीवन में आशा का संचार करते हैं।

उन्होंने कहा कि बोझ समझकर किया गया कार्य सदैव दुःख देता ।शान्ति भरा जीवन तथा रस भरा जीवन ही आनन्ददायी जीवन है।यह आनंद बाहर से नहीं, भीतर से उत्पन्न होता है।इसकी कला सीख जाना ही वस्तुतः आध्यात्मिक हो जाता है।’’जो जैसा सोचता है और करता है, वह वैसे ही बन जाता है’’ विषय पर चर्चा करते हुये श्री सुधांशु जी महाराज ने श्रीमदभगवतगीता के प्रसंगों को उद्धृत किए और कहा कि व्यक्ति के चिन्तन में जो विचार आते हैं, वह भीतर-भीतर आकार लेते हैं बढ़ते जाते हैं तथा अन्त में आदत व संस्कार बनकर उसे वैसा ही बना देते हैं। इसलिए अपने चिन्तन को हमेशा श्रेष्ठ एवं सकारात्मक रखना चाहिए। उन्होंने चिन्तन को ख़राब करने वाले तत्वों को उगने देने से बचने के आध्यात्मिक तरीक़े बताए और गीता नायक श्रीकृष्ण द्वारा इस बारे में बताए गए मनोविज्ञान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

समापन सत्र में उपस्थितजनों ने विजामि की रचनात्मक गतिविधियों की सराहना की। कुछ व्यक्तियों ने खड़े होकर विशेष रूप से युगऋषि आयुर्वेद स्वास्थ्यप्रद उत्पादों के लाभदायी अनुभव भी सुनाए।इसके पूर्व मध्याहनकाल में बड़ी संख्या में स्त्री-पुरुषों ने आचार्य सुधांशु जी महाराज से दीक्षा ग्रहण की।श्रद्धेय महाराजश्री ने उन्हें साधक बनकर एक श्रेष्ठ नागरिक बनने के सूत्र उन्हें दिए।

विजामि प्रमुख ने जागरण के समय जन्म और शयन के वक़्त मरण के अभ्यास का ज्ञान-विज्ञान उपस्थितजनों को बताया तथा प्रातःकाल जागरण के समय की अदभुत आत्मबोध साधना का तरीक़ा समझाया। उन्होंने रात्रि में शयन के पूर्व की तत्त्वबोध साधना का मर्म भी बताया। कहा कि इसका अभ्यास करने वालों में कथनी और करनी में अन्तर कम होने लगता है। उन्होंने सुख, शान्ति, प्रसन्नता एवं आनन्दमय जीवन जीने का प्रभावी मार्गदर्शन सभी को दिए।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं दिल्ली व उत्तराखण्ड प्रान्त के प्रभारी श्री श्याम जाज़ू सहित कई गण्यमान व्यक्ति भी सत्संग में मौजूद रहे। महोत्सव का समापन दिव्य आरती के साथ हुआ। इसके पूर्व पूर्वी दिल्ली के प्रधान श्री सतीश शर्मा एवं महामन्त्री श्री मनमोहन शर्मा आदि ने मिशन प्रमुख का अभिनंदन किया।

विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के कार्यक्रमों का समन्वयन-संचालन विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने किया। धर्माचार्य अनिल झा, कश्मीरी लाल चुग, रामबिहारी एवं महेश सैनी ने भजन-गीत प्रस्तुत किए, जिनका वाद्यों पर सहयोग राहुल आनंद, प्रमोद राय एवं चुन्नी लाल तंवर ने किया। श्री प्रयाग शास्त्री की अगुवाई में साहित्य, युगऋषि आयुर्वेद, गौसेवा, वृद्धजन सेवा, देवदूत (अनाथ), बाल शिक्षा, स्वास्थ्य शिविर, धर्मादा सेवा, जीवन संचेतना आदि के स्टालों के ज़रिए कई सेवाएँ सत्संग स्थल पर दी गईं।