देश की एकता और अखण्डता में कोई आँच न आने पाये- स्वामी चिदानंद सरस्वती

प्रयागराज/ विकास बघेल। परमार्थ निकेतन शिविर अरैल घाट सेक्टर 18 प्रयागराज में संगम के तट  ’पैगाम ए मोहब्बत’ का अद्भुत संमग हो रहा है। यह कार्यक्रम प्रयाग की पावन धरती पर आस्था के इस महापर्व में गंगा जमुनी तहज़ीब को साकार कर रहा है।
“पैगाम ए मोहब्बत” कार्यक्रम का शुभारम्भ परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, न्यायमूर्ति श्री सुधीर नारायण जी एवं सभी कवियों ने मिलकर दीप प्रज्जवलित कर किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यह कार्यक्रम संगम के तट पर दो संस्कृतियों के मिलन का ही नहीं बल्कि सबके दिलों के मिलन का संगम है, गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों नदियों का संगम भी हमें कौमी एकता का संदेश देता है। भारत की खूबसूरती इस तरह की तहज़ीब में समाहित है, अनेकता में एकता और भाईचारा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है यह समारोह। देश में असीम शान्ति की स्थापना के लिये इस तरह की तहज़ीब को दिलों में जिंदा रखना होगा। हम सभी का कर्तव्य है कि हम भारत की इस उज्जवल संस्कृति को बनाए रखें। उन्होने का कि हमारे संविधान में भारत को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया है तथा सर्वधर्म सद्भाव हमारा मूल मंत्र है आईये इस कुम्भ से इस मंत्र को अपने साथ लेकर जायें ताकि देश की एकता और अखण्डता में कोई आँच न आने पाये।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि हमारे प्रकृतिप्रदत उपहार यथा नदियाँ, वृक्ष, सूर्य और अन्य सभी बिना भेदभाव के; बिना नाम और धर्म जाने कि यह सोहनलाल का खेत है या कि साइमन का, यह मनोहर का खेत है या मौलाना का सभी को समान रूप से जल, वायु और उष्मा देते हैं उसी प्रकार हम भी बिना भेदभाव किये जीवनयापन करे और खुशियाँ बांटे।
 जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि प्रयाग की पावन भूमि से मोहब्बत का पैगाम अपने साथ लेकर जाये और इसे सभी में बांटे यही मानव धर्म है। उन्होने कहा कि भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे श्रेष्ठ संस्कृतियों में से एक है जो वसुधैव कुटुम्बकम् के साथ प्रेम और भाईचारा का संदेश देती है। 
 परमार्थ शिविर सभागार में आयोजित यह अद्भुत कार्यक्रम को भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों से आये प्रवासी और विदेशियों ने भी खूब मनोरंजन किया। 
कार्यक्रम के समापन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने संगम के तट से स्वच्छता, समरसता और सद्भाव का संदेश देते हुये कहा कि ’’मानव-मानव एक समान, सब के भीतर है भगवान’’, साथ रहे है, साथ रहेंगे, संकल्प कराया।
“पैगाम ए मोहब्बत” एक शाम गंगा जमुनी तहज़ीब के नाम कार्यक्रम में अन्तर्राष्ट्रीय शायर जनाब नजीब इलाहाबादी, श्रीमती ताजवर सुल्ताना, श्रीमती प्रीता बाजपेयी, श्रीमती तरन्नुम नाज़ कानपुर, श्रीमती रज़िया सुल्तान, श्री बख्तियार युसुफ गाज़ीपुर, पैग़ाम शिराज़ी जौनपुर, श्री अनज़ार सीतापुरी, श्री इरफान लखनवी, श्री वसीम मोइयावी, श्री नासिर जौनपुरी, सरदार मनमोहन ’तन्हा’, श्री पीयूष मिश्रा एवं अन्य शायरों एवं कवियांे ने किया सहभाग अद्भुत समा बांधा।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री सुधीर नारायण जी, न्यायमूर्ति श्री अरूण टण्डन, श्री कमरूल हसन सिद्दीकी, श्री दीपक भट्ट आईएएस, श्री आर एस वर्मा पूर्व कमिश्नर, श्री इन्द्रजीत सिंह ग्रोवर निदेशक, उÛमÛसेÛ सांस्कृतिक केन्द्र, श्री बृजेश कुमार श्रीवास्तव, नगर पुलिस अधीक्षक, प्रयागराज, श्री अनिल कुमार गुप्ता, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त, सरदार अजीत सिंह, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त, श्री सादिक़ हुसैन सिद्दीकी, कर्नल अबरार अहमद, श्री फरमान नक़वी, श्री हसन नक़वी, श्री जीमल अहमद, श्रीमती ज़ाहिदा ज़ामिन, श्री गौहर काज़मी, श्री विजय कुमार श्रीवास्तव, श्री शफ़क़त अब्बास पाशा, श्री युसूफ हबीब, श्री राजू मरकरी और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सहभाग किया।