संस्कृति विभाग ने किया अनूठा प्रयोग, दिन-रात चले सांस्कृतिक कार्यक्रम

प्रयागराज/ मनीष दुबे। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अनूठे प्रयोग की वजह से कुंभ में धूम मच गई। कुंभ परिसर में विभाग ने 20 लघु मंचों से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर दुनिया के इस विशेष उत्सव में जुटे लोगों का दिल जीत लिया। 20 लघु मंचों के कार्यक्रमों का शुभारंभ बृहस्पतिवार से हुआ जबकि चार मुख्य मंचों से मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन भी मकरसंक्रांति के बाद बृहस्पतिवार से फिर शुरु हो गए। 
संस्कृति विभाग द्वारा बनाए गए ये मंच लोक सेवा आयोग चौराहा, ट्रैफिक चौराहा, दरभंगा चौराहा, यमुनापुल के नीचे गऊघाट, मेडिकल चौराहे के निकट, प्रयाग जंक्शन चौराहा, के.पी.इंटर कालेज के निकट, किला चौराहा, अक्षयवट एवं लेटे हुए हनुमान मंदिर के सामने, यूनिवर्सिटी चौराहा, बालसन चौराहा, कीडगंज नैनी ब्रिज इनफारमेशन सेंटर, लैप्रोसी मिशन चौराहा, झूसी के निकट, अरैल के निकट, वल्लभाचार्य मोड़, बहुगुणा चौराहा, चर्च के निकट बिशप जानसन कालेज, प्रयाग बस स्टैंड के सामने हिन्दू महिला डिग्री कालेज तथा एपी कालेज निकट काली मंदिर के पास हैं। 
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कहीं लोकगायन की धूम रही तो कहीं लोकनृत्य, नौटंकी और जादू की। इन मंचों पर जौनपुर के बृजेश पांडेय ने लोकगायन, लखनऊ की अर्चना पांडेय ने राजस्थानी लोकनृत्य, फैजाबाद के मुकेश कुमार ने फरवाही नृत्य, कानपुर से आए रामानंद पाठक ने जादू, गोंडा की मनीषा पाठक ने लोकगायन, सुल्तानपुर के अशोक त्रिपाठी ने नटवरी, लखनउ के आनंद ने लिल्ली घोड़ी, महोबा के अनुज सिंह ने आल्हा गायन, और महोबा के रामचरन यादव ने पाईडंडा, कानपुर के हरिश्चन्द्र ने नौटंकी, सोनभद्र के गजाधर ने करमा नृत्य, कानपुर के अरुण एस.रत्नाकर ने जादू, गाजीपुर के सुधाकर यादवने धोबिया नृत्य, विजय बेला संस्था ने नाटक के कार्यक्रमों से दर्शकों का दिल जीत लिया।

रामलीला की धूम मची 
विभाग के मुख्य सांस्कृतिक मंचों पर रामलीला की धूम रही। अक्षयवट, सरस्वती, भारद्वाज और यमुना मंचों पर त्रिनिदाद के पोट आफ स्पेन से आया बाल रामलीला ग्रुप हिन्दू प्रचार केन्द्र तथा नई दिल्ली के श्रीराम भारती कला केन्द्र के दल पर रामलीलाओं की प्रस्तुतियां की गई। गौरतलब है कि विभाग के अयोध्या शोध संस्थान के प्रयासों से कुंभ के सांस्कृतिक मंचों पर देश-विदेश की रामलीलाओं का प्रदर्शन हो रहा है। कई देशों के दल खासतौर पर इस अवसर रामलीला की प्रस्तुति करने यहां आए हैं। रामलीला के अलावा वाराणसी की शारदा वेलंकर ने शास्त्रीय गायन, लखनउ के नवीन मिश्र अपने साथियों के साथ सितार-संतूर की जुगलबंदी, हमीर पुर की श्रेयाने लोकगीत गायन, जैसलमेर के अनवर खान ने मंगनियार गायन,सागर से आए भेरु सिंह चौहान ने कबीर के पदों का गायन, वाराणसी के गौरव-सौरव मिश्र ने युगल कथक नृत्य, अयोध्या के सत्य प्रकाश मिश्र द्वारा भजन गायन और जगदलपुर के बस्तर बैंड ने आदिवासी रंग का प्रभावपूर्ण कार्यक्रम पेश कर वहां लोगों का मन जीत लिया।