पर्यावरण संरक्षण हेतु सम्प्रदायवाद नहीं बल्कि सह-हृदयवाद है कारगर-  स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। भगवान जिग्नेन समगॉन के 800 वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर ड्रकिंग कग्यु इंस्टिट्यूट, कुल्हन सहस्त्रधारा रोड़ देहरादून में ’अन्तर्राष्ट्रीय ड्रकिंग कग्यु कौंसिल’ (परिषद्) का आयोजन, पूज्य ड्रकिंग कयागगॉन चेत्सांग रेनपोछे के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। इस समारोह का शुभारम्भ 19 अक्टूबर को हुआ तथा समापन 24 अक्टूबर को भव्यता के साथ होगा।
इस समारोह में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ एलायंस के सह-संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वत जी महाराज, पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज एवं विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी ने सहभाग किया। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी ने भी इस कार्यक्रम के लिये शुभकामना संदेश भेजा।
भगवान क्यूबा जिग्नेन सुमगॉन ड्राकुंग, काज्यु वंश के संस्थापक थे। उन्होने भगवान बुुद्ध के जीवन और उनके द्वारा दी गयी शिक्षा को आत्मसात का असंख्य संवेदनशील प्राणियों को लाभान्वित किया है। इस सात दिवसीय, 800 वें महापरिनिर्वाण महोत्सव के अवसर पर आयोजित समारोह में  विश्व के 21 देशों से तथा 179 बौद्ध मठों हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभाग किया।
ड्रकिंग कयागगॉन चेत्सांग रेनपोछे जी ने बताया कि परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष  स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से इस भव्य समारोह के विषय में विस्तृत चर्चा हुई थी उन्ही की प्रेरणा से भगवान जिग्नेन समगॉन के महापरिनिर्वाण दिवस को पर्यावरण संरक्षण से जोडा़ गया ताकि इसमें सहभाग करने वाले साधकों को ईश्वर के आशीर्वाद के साथ-साथ वृक्षारोपण, स्वच्छता एवं जल संरक्षण का संदेश भी प्राप्त हो सके।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’हिमालय की हरियाली को सुरक्षित रखने के लिये प्रत्येक उत्सव को पर्यावरण से जोड़ना नितांत आवश्यक है। उन्होने कहा कि अब हमें धर्म, जाति और सम्प्रदाय सभी बंधनों से परे होकर पर्यावरण संरक्षण हेतु सद्भाव एवं सहयोग के बंधन में बंधना होगा क्योंकि वायु, जल और प्राकृतिक संसाधन सभी के लिये समान रूप से विद्यमान है।’
स्वामी जी ने कहा कि ’उत्तराखण्ड राज्य को स्वच्छ, स्वस्थ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने के लिये; यहां की नदियों को निर्मल और अविरल तथा ग्लेशियरों को बचाने के लिये हमें सम्प्रदायवाद नहीं बल्कि सह-हृदयवाद को अपनाना होगा; अब केवल हमारे हाथ ही एक-दूसरे के साथ नहीं जुड़े बल्कि हमारे दिल भी जुड़े। दिल जुड़ेगें तो ’विघटन नहीं संघटन’ होगा और जहां संधटन होता है वहां परिवर्तन निश्चित रूप से होता है।’
उत्तराखण्ड प्रांत के पर्यटन मंत्री श्री सतपाल जी महाराज ने कहा कि ’पूज्य ड्रकिंग कयागगॉन चेत्सांग रेनपोछे जी की अगुवाई में आयोजित इस भव्य समारोह में बाह्य एवं आन्तरिक स्वच्छता के संगम का अद्भुुत दृश्य दिखाई दे रहा हैं यह मेरा सौभाग्य है एवं पूज्य स्वामी जी की कृपा है कि मैं आज यहां पर उपस्थित हूँ।’
विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी ने विश्व के विभिन्न देशों से पधारे अतिथियों का देवभूमि उत्तराखण्ड में स्वागत करते हुये कहा कि ईश्वर सभी को प्रसन्नता एवं उज्जवल भविष्य प्रदान करे। उन्होने मुक्त कंठ से ड्रकिंग कयागगॉन चेत्सांग रेनपोछे जी की प्रशन्सा करते हुये कहा कि ऐसे संत समाज के मार्गदर्शक है।’
इस अवसर पर सभी विशिष्ट अतिथियों ने भगवान जिग्नेन समगॉन जी को श्रद्धासुमन अर्पित किये। पूज्य स्वामी जी ने सभी से आहृवान किया की इस राज्य की हरियाली, सुुन्दरता एवं स्वच्छता को बनायें रखने के लिये स्वच्छ भारत मिशन से जुडे़ एवं सहयोग प्रदान करें।
इस पावन अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, पूज्य ड्रकिंग कयागगॉन चेत्सांग रेनपोछे जी, श्री सतपाल महाराज एवं प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी ने सेवा प्रोजेक्ट को झंडी दिखायी एवं स्थानीय शासकीय विद्यालयों में कम्बल एवं स्वच्छता सामग्री वितरित किये। इस अवसर पर स्वव्छता परेड निकाली गयी जिसमें परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार, हजारों लामा और हजारों लोंगो ने भाग लिया तथा पूरे क्षेत्र की सफाई की गयी। इस समारोह में ग्लोडन माइल के श्री राजेश पटेल ने भी लाखों पौधों के रोपण के लिये अपनी सहमति प्रदान की। स्वामी जी ने पूज्य ड्रकिंग कयागगॉन चेत्सांग रेनपोछे जी को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर इस ऐतिहासिक समारोह की सफलता के लिये साधुवाद दिया।