शक से नहीं बल्कि श्रद्धा से करे देश का निर्माण-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रमुख मौलाना उमर अहमद इलियासी साहब, मुफ़्ती कासमी साहब, लोकसभा के संयुक्त सचिव श्री दलसिंह मल्ला जी, विशिष्टगण और अनेक मस्जिदों के इमामों ने दिल्ली में तालीम अर्थात शिक्षा के विषय पर चर्चा की। चर्चा के दौरान वर्तमान तालीम और पहले की तालीम के विषय में विशद चर्चा हुई।
मौलाना उमर अहमद इलियासी साहब ने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने समाज को जोड़ने के लिये अनेक कार्य किये है, उन्होने लोगों के दिलों को जोड़ा है। स्वामी जी ने देश व विदेश की धरती पर जाकर वसुधैव कुटुम्बकम का मंत्र दिया है। साथ ही उन्होने स्वच्छ भारत अभियान, स्वच्छता, गंगा सहित अनेक नदियों की स्वच्छता के लिये विभिन्न धर्मो के धर्मगुरूओं एवं समाज के विभिन्न वर्गो को जोड़ा है। स्वच्छता एक संस्कार बन गया है, स्वच्छता एक दिशा बन गयी है इन पावन कार्यो के लिये हम सभी मिलकर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को विशिष्ट पुरस्कार से पुरस्कृत करते है। लोकसभा के संयुक्त सचिव श्री दलसिंह मल्ला जी ने स्वामी जी महाराज की भूरि-भूरि प्रशन्सा करते हुये कहा कि आगे भी हमें आपके मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि चाहे मन्दिर हो या गुरूद्वारा, मस्जिद होे या फिर गिरजाघर सभी का उद्देश्य एक हो। हम अपनी-अपनी देव भक्ति करे परन्तु देश भक्ति पहले हो। सभी मिलकर वतन के लिये कार्य करे, वतन के अमन और वतन को चमन बनाने के लिये कार्य करे। उन्होने कहा कि हमें दिलों को जोड़ते हुये बिना किसी को दुःख पहुंचाये और हमारी कोई भी हरकत ऐसी न हो जो वतन में अशान्ति पैदा करे। हमारा कर्तव्य बनता है कि कुछ लोग जो अशान्ति फैलाने का कार्य करते है उन्हे अलग किया जाना चाहिये ताकि हमारा देश पूरे विश्व में मिशाल कायम कर सके तथा हम शान्ति की मशाल लेकर आगे बढ़ सके। स्वामी जी ने कहा कि हम सभी थामे शान्ति की मशाल और अपने देश को बनाये मिसाल यही सच्ची तालिम है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि आईये वतन के लिये हाथ जोड़े और दिल भी जोड़े और वतन के लिये करे काम तथा शक से नहीं बल्कि श्रद्धा से करे देश का निर्माण। उन्होने कहा कि वतन है तो हम है। तालीम वह जिसको पाने के बाद हर ताले की ताली मिल जाती हो, तालीम वही जो हर ताले को खोल दे, तालीम वह जो खुद की तलाश करे। हम आज जगह-जगह जाकर बहुत कुछ तलाश कर रहे, बहुत कुछ तलाश करते-करते खुद ही खो गये, हमें तलाश खुद की करनी थी तालीम का मतलब ही यह है। तालीम वह जो खुदा से मिला दे। आज हमने तालीम पाकर अलमारियों के शेल्फ तो भर लिये परन्तु सेल्फ खाली ही रह गया इस तरह की तालीम किस काम की। स्वामी जी महाराज ने कहा कि मोहम्मद साहब ने भी सबसे पहले पढ़ने की ही बात कही थी। अगर हमंे कौम को आगे बढ़ाना है तो तालीम को जीवन में सबसे पहले लाना होगा। उन्होने कहा कि तालीम को तवज्जो दे। हमारी तालीम ऐसी हो जो समाज को जोड़े; तालीम सभी को गले लगाने के लिये है। जो तालीम एक दूसरे को गले न लगा सके वह तालीम बकवास है; बेकार है; जो तालीम एक-दूसरे को जोड़े नहीं बल्कि तोड़ दे वह बकवास है आज हमें एक ऐसी तालीम चाहिये जो एक-दूसरे को जोड़ सके; एक-दूसरे के मध्य सेतु बना सके; ऐसी तालीम चाहिये जिससे मुझे कितनी खुशी मिली यह नहीं बल्कि मेरी वजह से कितनों को खुशी मिली। हमारी तालीम ऐसी हो जो खुद पर काम करे। हमारी तालीम ऐसी हो जो सद्भाव, समरसता और भाईचारे के सेतु बनाये। हमारी तालीम खुद और खुदा को मिलाने वाली हो इससे जीवन और जीवन यात्रा भी सफल होगी और शान्ति प्राप्त होगी।
मौलाना उमर अहमद इलियासी साहब ने कहा कि हमारी तालीम ऐसी हो जो वसुधैव कुटुम्कम् का संदेश प्रसारित करे; मानव को मानव और प्रकृति से जोड़े। तालीम हमें ऊंचाइयों की सीढ़ियों पर चढ़ना सिखाये साथ ही पीछे छूटे लोगांेे के साथ अच्छा व्यवहार और दूसरों की पीड़ा के समझना सिखाये।
इस अवसर पर तालीम के विषय में विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किये।