क्यों कहा जाता है भगवान बुद्ध को एशिया का ‘ज्योति पुंज’

नई दिल्ली/ शाहिद परवेज। बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म ही नहीं बल्कि पूरे भारत में मनाए जाने वाला खास त्योहार है। इस वर्ष यह तिथि 18 मई को पड़ रही है। बुद्ध पूर्णिमा को भगवान गौतम बुद्ध के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगवान बुद्ध, बौद्ध धर्म के संस्थापक थे और उनका जन्म 563 ई. पूर्व शाक्य गणराज्य की तत्कालीन राजधानी कपिलवस्तु के पास लुंबिनी में हुआ था। भगवान बुद्ध को एशिया का ज्योति पुंज भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बौद्ध धर्म के लोग इस दिन को बहुत धूम-धाम से मनाते हैं। इस धर्म को मानने वाले चीन, जापान, कोरिया, थाईलैंड, कंबोडिया, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और भारत जैसे कई देशों में रहते हैं।

क्यों मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा?
भगवान बुद्ध ने जब अपने जीवन में हिंसा, पाप और मृत्यु को जाना तब उन्होंने मोह माया त्याग कर अपने गृहस्थ जीवन से मुक्ति ली और जीवन के सत्य की खोज में निकल पड़े। कई सालों तक बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे तपस्या कर जब उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई तो यह दिन पूरी सृष्टि के लिए खास दिन बन गया, जिसे वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।