अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध ज्ञान केंद्र अब बनेगा हर्षवर्धन बुद्ध विहार

प्रयागराज/ रीना दुबे। बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल ने अरैल के सम्राट हर्षवर्धन बुद्ध विहार को अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है। बुद्ध विहार बौद्ध ज्ञान और दर्शन का एकेडेमिक सेंटर बनेगा। विहार के प्रशिक्षु पूरी तरह से बौद्ध ज्ञान में निपुड़ होकर श्रेष्ठ श्रामणेर यानि भिक्षु के रूप में दीक्षित किए जाएंगे उसके बाद ये भिक्षु दुनिया भर में बौद्ध ज्ञान का संदेश देंगे। फिलहाल यहां रह रहे सभी श्रामणेरों को संस्कृत में स्नातक के बाद संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय या काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एमएम और फिर पालि से पीएचडी कराई जाएगी। वहां से निकलकर बतौर बौद्ध भिक्षु इन्हें दुनिया को बौद्ध धर्म के ज्ञान और दर्शन से परिचित कराने के लिए अलग-अलग देशों में भेजा जाएगा।

परिसर में तकरीबन आठ वर्ष पहले बोधगया से लाई गई बोधिवृक्ष की टहनी रोपी गई थी जो अब वृक्ष का रूप ले चुका है। इसी तरह अलग-अलग छह सौ से ज्यादा पौधे भी हैं जिनसे विहार रमणीक बन गया है। विहार में तथागत बुद्ध के संदेश के संवाहक सम्राट अशोक और डॉ.आंबेडकर की प्रतिमाओं के अतिरिक्त चार सिंहशीर्ष की लाट स्थापित की ग्ई है। इसी कड़ी में अब सम्राट हर्षवर्धन और कनिष्क की भी प्रतिमाएं स्थापित करने की योजना है क्योंकि प्रयागराज सम्राट हर्षवर्धन की थाती भी है।

बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक के मुताबिक बौद्ध ज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित होने वाले विहार का मकसद यहां से प्रशिक्षु पूरी तरह से ‘बुद्धिज्म’ को आत्मसाथ कर निकलें। इसके अलावा कोशिश ये भी है कि सारनाथ से कौशाम्बी जाने वाले बौद्ध जिज्ञासुओं, पर्यटकों को प्रयागराज क्षेत्र और बौद्ध धर्म से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। फिलहाल यहां धम्म हाल और भिक्षुओं के अध्ययन-आवास की भी उचित व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि हर्षवर्धन बुद्ध विहार में बौद्ध साहित्य की लाइब्रेरी भी बनेगी। इस से पहले करीब डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा की पॉलि की पुस्तकें मंगाई गई हैं। त्रिपिटक सहित मूल पाली और हिन्दी की किताबों सहित संपूर्ण बौद्ध साहित्य का संग्रह किया जाएगा। भगवान बुद्ध के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने कहा था कि अगर बुद्ध विहार बने तो न तो वह नगर में हो, न ही नगर से दूर हो और संभव हो तो नदी के किनारे हो। यह सुखद संयोग है कि अरैल का बौद्ध विहार तथागत के सूत्र वाक्य के अनुरूप ही है। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध केंद्र के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया है।