एक ही दिन मनाया जाता है भगवान बुद्ध का जन्मदिन और महानिर्वाण दिन

नई दिल्ली/ शाहिद परवेज। आज बुद्ध पूर्णिमा है। आज के दिन यानि वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ, इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ। ऐसा किसी और महापुरुष के साथ आज तक नहीं हुआ है। हिन्दू मतावलंबियों की माने तो बुद्ध भगवान विष्णु के नौवें अवतार माने जाते हैं।

बुद्ध पूर्णिमा, बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़ा त्योहार है। भगवान बुद्ध का जन्म कपिलवस्तु के पास लुम्बिनी में हुआ था। उनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। 27 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और सांसारिक मोह माया से संन्यास ले लिया। भगवान बुद्ध को जिस स्थान पर ज्ञान की प्राप्ति हुई उस स्थान को बोधगया कहा गया। महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया और बौद्ध धर्म की स्थापना की। भगवान बुद्ध ने चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया। वैशाख पूर्णिमा के दिन उन्हें बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई, तभी से यह दिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। इस दिन बौद्ध अनुयायी अपने घरों में दीपक जलाते हैं। बौद्ध धर्म ग्रंथों का पाठ किया जाता है। इस पूर्णिमा पर किए गए अच्छे कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन पिंजरों से पक्षियॊं को मुक्त किया जाता है। गरीबों को भोजन व वस्त्र दान किए जाते हैं।