पुराने भ्रम तोड़िए, गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीराम मन्दिर ध्वंश का ज़िक्र अपने ग्रन्थ में किया था…

नई दिल्ली। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी अयोध्या में श्रीराम मन्दिर को तोड़कर वहाँ ग़ैर-धार्मिक तरीक़े से बाबरी मस्जिद को स्थापित कर देने का स्पष्ट उल्लेख किया है। आम तौर पर हिंदुस्तान में ऐसी परिस्थितियां कई बार उत्पन्न हुईं, जब श्रीराम-मंदिर और बाबरी मस्जिद (ढांचा ) एक विचार-विमर्श का मुद्दा बना और कई विद्वानों ने चाहे वे इस पक्ष के हों या उस पक्ष के, इस मुद्दे पर अपने विचार रखे। कई बार गोस्वामी तुलसीदास-रचित श्रीरामचरितमानस पर भी सवाल खड़े किये गए कि अगर बाबर ने राम-मंदिर का विध्वंश किया तो तुलसीदास जी ने इस घटना का जिक्र क्यों नहीं किया।
सत्य बात यह है कि कई लोग तुलसीदास जी की रचनाओं से अनभिज्ञ हैं और अज्ञानतावश ऐसी बातें करते हैं। वस्तुतः रामचरित्रमानस के अलावा तुलसीदास जी ने ऐतिहासिक महत्व के कई अन्य ग्रन्थों की भी रचना की है। तुलसीदास जी ने स्वरचित ‘तुलसी-शतक’ में 15वीं शताब्दी की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का विस्तार से विवरण दिया है।
हमारे वामपंथी विचारकों तथा  तत्संबंधी इतिहासकारों ने भ्रम की यह स्थिति उत्पन्न की, कि रामचरितमानस में ऐसी कोई घटना का वर्णन नहीं है, जिसमें गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीराम मन्दिर के ध्वंश का ज़िक्र उनने किया हो। श्री नित्यानंद मिश्र ने एक जिज्ञासु के साथ पत्र व्यवहार में प्रयोग किया गया “तुलसी दोहा शतक ” का अर्थ इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया है | उसी को यथावत हमने यहाँ पर उद्धृत किया है तथा इस पोस्ट में उन दोहों के अर्थों को आप तक पहुँचाने का प्रयास किया है | प्रत्येक दोहे का अर्थ उनके नीचे दिया गया है , कृपया ध्यान से पढ़ें और स्वयं चिन्तन कर इसके अर्थ निकालें।
मन्त्र उपनिषद ब्राह्मनहुँ बहु पुरान इतिहास ।
*जवन जराये रोष भरि करि तुलसी परिहास ॥
श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि क्रोध से ओतप्रोत यवनों ने बहुत सारे मन्त्र (संहिता), उपनिषद, ब्राह्मणग्रन्थों (जो वेद के अंग होते हैं) तथा पुराण और इतिहास सम्बन्धी ग्रन्थों का उपहास करते हुये उन्हें जला दिया ।
सिखा सूत्र से हीन करि बल ते हिन्दू लोग ।
*भमरि भगाये देश ते तुलसी कठिन कुजोग ॥
श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि ताकत से हिंदुओं को शिखा (चोटी) और यज्ञोपवीत से रहित करके उनको गृहविहीन कर उनके पैतृक देश से बाहर भगा दिया ।
बाबर बर्बर आइके कर लीन्हे करवाल ।
*हने पचारि-पचारि जन तुलसी काल कराल ॥
श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि हाथ में तलवार लिये हुये बर्बर बाबर आया और लोगों को ललकार-ललकार कर उनकी हत्या की। यह समय अत्यन्त भीषण था।
सम्बत सर वसु बान नभ ग्रीष्म ऋतू अनुमानि ।
*तुलसी अवधहिं जड़ जवन अनरथ किय अनखानि ॥

(इस दोहा में ज्योतिषीय काल गणना में अंक दायें से बाईं ओर लिखे जाते थे, सर (शर) = 5, वसु = 8, बान (बाण) = 5, नभ = 1 अर्थात विक्रम सम्वत 1585 और विक्रम सम्वत में से 57 वर्ष घटा देने से ईस्वी सन 1528 आता है ।)

श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि सम्वत् 1585 विक्रमी (सन 1528 ई) अनुमानतः ग्रीष्मकाल में जड़ यवनों ने अवध (अयोध्या) में वर्णनातीत (वर्णन न करने योग्य) अनर्थ किये ।
राम जनम महि मंदरहिं, तोरि मसीत बनाय ।
जवहिं बहुत हिन्दू हते,तुलसी कीन्ही हाय ॥
जन्मभूमि का मन्दिर नष्ट करके, उन्होंने एक मस्जिद बनाई । साथ ही बड़ी तेज गति से उन्होंने बहुत से हिंदुओं की हत्या की । इसे सोचकर तुलसीदास शोकाकुल हुये ।
दल्यो मीरबाकी अवध मन्दिर राम समाज ।
तुलसी रोवत ह्रदय हति त्राहि त्राहि रघुराज ॥
मीरबाक़ी ने मन्दिर तथा रामसमाज (राम दरबार की मूर्तियों) को नष्ट किया। प्रभु श्रीराम से रक्षा की याचना करते हुए विदीर्ण हृदय  तुलसी रोये ।
राम जनम मन्दिर जहाँ तसत अवध के बीच ।
तुलसी रची मसीत तहँ मीरबकी खल नीच ॥
तुलसीदास जी कहते हैं कि अयोध्या के मध्य जहाँ राममन्दिर था, वहाँ नीच मीरबाक़ी ने मस्जिद बनाई ।
रामायन घरि घट जहाँ,श्रुति पुरान उपखान ।
तुलसी जवन अजान तँह,करत कुरान अज़ान ॥
श्री तुलसीदास जी कहते है कि जहाँ पर रामायण, श्रुति, वेद, पुराण से सम्बंधित प्रवचन होते थे और घण्टे, घड़ियाल बजते थे, वहाँ अज्ञानी यवनों की कुरआन और अज़ान होने लगे। अब यह स्पष्ट हो गया कि गोस्वामी तुलसीदास जी की इस रचना में श्रीराम जन्मभूमि विध्वंस का विस्तृत रूप से वर्णन किया है !

(यह लेख हमें श्री राममहेश मिश्र जी के सोशल मीडिया (W.app) से  प्राप्त हुआ है, आप लोग भी इसको पढ़िये और आगे इसका प्रचार भी कीजिए, ताकि भारतवर्ष के विराट जनमानस से जुड़े इस मुद्दे पर फैले भ्रम को तोड़ा जा सके। आपका यह प्रयास समस्त देशवासियों के हित में होगा। आप सभी स्वजनों से विनम्र आग्रह है कि भारतवासियों एवं भारतवंशियों को अपनी सभ्यता के स्वर्णिम युग के गौरवशाली अतीत के बारे में बताइये और सारे भ्रमों को एक झटके में तोड़ दीजिए। हम सभी देशवासियों को मिलजुलकर रहना है, सभी की भावनाओं का ध्यान रखते हुए प्रेम से रहना है और अपने भारत राष्ट्र को समर्थ बनाना है, अखण्ड बनाना है।)