ब्राह्मणों को अल्पसंख्यक की श्रेणी में लाने के विषय में तर्क और समाधान

जयपुर। ब्राह्मण, सनातन/ हिन्दू समुदाय का अंश है, ब्राह्मण को अल्पसंख्यक दर्जा मिलने से क्या ब्राह्मण, हिन्दू समुदाय से अलग हो जायगा और अलग होने पर सनातन को क्षति पंहुचेगी। दरअसल विदेशी ताकते, बामी, कामी, देशद्रोही, देश के टुकड़े करने वाले तो चाहते यही है की ब्राह्मण को अलग कर दिया जाये, जिससे सनातन हिन्दू में दरार आ जाये। ब्राह्मण पिछले सौ सालों से सभी के आखेट पर है, क्यों कि ब्राह्मण यदि अपने धर्म से कम होगा तो पूजा पाठ, वैदिक परम्परा, जन्म मरण पर होने बाले हिन्दू संस्कारो पर रोक लगेगी और सनातन घर्म की हानि होगी, और हमारे हरिजन और अशिक्षित भाई दूसरे धर्म में जैसे इस्लाम या क्रिश्चियन बनेंगे। सर्व विदित है क्रिश्चियन भारत में ही नही पूरे विश्व में धर्म परिवर्तन करा रहे है। यह सोचा समझा षड्यंत्र बहुत समय से चलाया जा रहा है। ब्राह्मण संरक्षित होने पर सनातन का संरक्षण होगा ना की अलग होगा और सभी सनातनी भी संरक्षित होंगे। ना की अलगाव होगा!

अल्पसंख्यक क्या है 

भारत के संविधान में अनुच्छेद 20 से 30 और 350 ए से 350 बी में शब्द ‘अल्पसंख्यक’ या इसके बहुवचन रूप का उलेख्य करता है, लेकिन ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को परिभाषित नहीं करता है। मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट (1928) ने क्या भाषाई या धार्मिक अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने की एक प्रमुख पहल की थी, लेकिन अभिव्यक्ति को परिभाषित नहीं किया गया। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसरण में, सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

अल्पसंख्यक की कोई अंतरराष्ट्रीय स्तर या राष्ट्रिय स्तर पर सटीक परिभाषा नहीं है कि किस समूह या जाति में अल्पसंख्यक हैं। अल्पसंख्यकों के भेदभाव और संरक्षण की रोकथाम में संयुक्त राष्ट्र उप-आयोग अल्पसंख्यक को एक समूह में स्थिर जातीय, धार्मिक या भाषाई परंपराओं को बनाए रूप में परिभाषित करते हैं। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज ‘अल्पसंख्यक’ को एक छोटे समूह के रूप में परिभाषित करता है, जो “संपूर्ण या प्रमुख आबादी के आधे से कम” का प्रतिनिधित्व करता है।

केरल शिक्षा विधेयक में सर्वोच्च न्यायालय, एसआर दास, चीफ जस्टिस के माध्यम से, अंकगणितीय सारणीकरण की तकनीक का सुझाव देते हुए कहा गया कि अल्पसंख्यक का मतलब “समुदाय है जो कुल आबादी का 50 प्रतिशत से कम है। अधिनियम के धारा 2 (सी) में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 ने अल्पसंख्यक को “एक केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित समुदाय” के रूप में परिभाषित किया। 23 अक्टूबर, 1993 को प्रावधान के तहत अभिनय करते हुए, केंद्र सरकार ने अधिनियम के प्रयोजन के लिए अल्पसंख्यकों के रूप में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी (पारसी) और जैन समुदायों को सूचीबद्ध किया। अल्पसंख्यक दर्जा आरक्षण नहीं अपितु किसी एक घर्म के समूह को जिसकी संख्या और गरीवी रेखा के नीचे जाने बाले समूह का संरक्षण है।

अल्पसंख्यक का विशेष दर्जा ब्राह्मण को ही क्यों? जाट, क्षत्रिय, वैश्य आदि को क्यों नही?

प्रश्न बिलकुल सही है, आज सभी सनातनी समूह अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे है, कुछ को ही खीर मलाई खिलाई जाती रही है। पिछले 70 सालों में हिन्दू कमजोर और निरीह हुआ है। विशेष क्षत्रिय भाई, जिनके लिए आज कोई सामने नही आ रहा है। भारत की सबसे वीर और साहसी जाति जो युद्ध में देश के लिए सदैव युद्ध करती रही और ना जमीन ना धन संचय किया आज बदहाली के हाल में है। पर भाइयों आज किसी विशेष हिन्दू जाति का संरक्षण नही, धर्म के संरक्षण का प्रशन है। यदि हिन्दू बचा, सनातन बचा तो हम सब बचेगे!

ब्राह्मण का संरक्षण ही सनातन का संरक्षण है।

ब्राह्मण कभी स्वार्थी नही रहा, मैकाले की शिक्षा और अंग्रजो के षड्यंत्र ने एक नया मंच बनाया जिसमे सवर्णों द्वारा दलितों पर अत्याचार की पटकथा लिखी। @tribhuban singh के लेख पढ़े, 1750 तक हमारा देश 25@ डीजीपी का देश था और अमेरिका, ब्रिटेन की डीजीपी 2% थी, यदि चारो वर्ण एक साथ नही रहते थे तो क्या संभव था हमारा देश विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति होता? @pawan tripathi के लेखो की श्रंखला पढ़े कैसे कैसे हमारे देश में षड्यंत्र किये गए आँखे खुल जाएगी। ब्राह्मण ने ही कहा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’! ब्राह्मण यदि लालची होता तो राजा आचार्य चाणक्य होते, चंद्रगुप्त मौर्य नही!

क्या पुजारी या संस्कृत पढने बाले ही वैदिक ब्राह्मण है?

वैदिक ब्राह्मणवाद ‘वैदिक काल 1500 ईसा पूर्व ते 500 बीसी तक का समय है। वेदों को अपौरुषेय (miraculous ) कहा जाता है। पुजारी और पुरोहितों द्वारा वेदों के पवित्र रीति-रिवाजों और बलिदानों के साथ जुड़ी मूर्तियों का बचाव किया है। ब्राह्मणों का मुख्य कार्य आग और नदियों जैसे तत्वों की पूजा, भजन और पूजा की विधि है। ब्राह्मणों ने उदार क्षत्रिय, और धनी वैश्य के लिए धार्मिक अनुष्ठानों किये। धार्मिक लोगो ने स्वयं, बच्चों, धन, लंबे जीवन और पूर्वजों की स्वर्गीय दुनिया में एक जीवित जीवन की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। आज पूजा में इस विधि को हिंदुत्व में संरक्षित किया गया है, जिसमें एक पुरोहिता (पुजारी) द्वारा वेदों से समृद्धि, धन और सामान्य सुख के लिए पाठ शामिल है। हर ब्राह्मण वैदिक ब्राह्मण ही होता है। क्या आपने कभी अवैदिक ब्राह्मण भी सुना है? तनिक भी वैदिक ब्राह्मण के नाम से शंकाग्रस्त ना हो।

क्या विश्व में किसी और ने वैदिक के संरक्षण की अनुशंषा की है?

18 दिसंबर 1992 की संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के अनुसार, “देश अपने संबंधित क्षेत्रों में अल्पसंख्यकों की  राष्ट्रीय या जातीय, सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई पहचान के अस्तित्व की रक्षा करने की अनुशंषा की है। इसी प्रकार भारत सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के लिए आयोग (एनसीएम) अधिनियम, 1 99 2। ‘वैदिक ब्राह्मणवाद’ की जनसंख्या भारत की 20% से कम जनसंख्या का गठन करती है और संयुक्त राष्ट्र घोषणा और एनसीएम अधिनियम, 1992 के अनुसार अल्पसंख्यकों के रूप में संरक्षित होने के लिए एक अलग और विभिन्न धार्मिक अभ्यासों का प्रचार करती है।

उनेस्को (UNESCO) ने 2003 में मानवता की अमूल्य विरासत ‘वेदों’ को संस्कृति अभिव्यक्ति का उत्कृष्ट रूप घोषित किया है। ऋग वेदमानुस्की लिपियों को यूनेस्को की “मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड” रजिस्टर में शिलालेख के लिए चुना गया है। 2007 में वेदों को वैज्ञानिक मूल्यों को दुनिया भर में मान्यता दी गई है। वैदिक उपनिषदों का अनुवाद फारसी, इतालवी, उर्दू, फ्रेंच, लैटिन, जर्मन, अंग्रेजी, डच, पोलिश, जापानी और रूसी सहित विभिन्न भाषाओं में किया गया है। उपनिषदों को पूर्व और पश्चिम दोनों के विद्वानों, वैज्ञानिकों और दार्शनिकों द्वारा हाइजेनबर्ग, स्क्रोडिंगर, थोरो और इमर्सन और शॉपनहेउर और अन्य लोगों द्वारा स्वीकार किया गया है। वेद और पुराण दुनिया के आज के ब्रह्मवैज्ञानिकों के लिए चमत्कार हो गए हैं। नासा एम्स रिसर्च सेंटर, यूएसए के अंतरिक्ष वैज्ञानिक स्कॉट सैंडफोर्ड ने कहा है, “ऐसा लगता है कि वेद और पुराण के लेखकों ने ज्ञान देने के लिए भविष्य से आया था।

ब्राह्मण का अल्पसंख्यक परिधि में आना वैदिक और सनातन को बचाने और संरक्षण के लिये अति आवश्यक है, बरसो से फैलाये जा रहे षड्यंत्र को हटाने और विश्व में सनातन स्थापित करने की दिशा में यह मील का पत्थर साबित हो सकता है। सभी सनातनियों को अपनी सोच बड़ी करनी होगी। और सनातन/ हिन्दू को बचाने की दिशा में वैदिक ब्राह्मण के संरक्षण की दिशा में कार्य करना होगा, अन्यथा आपको भी पता है की सनातन/ हिन्दू को समाप्त करने में विश्व की बड़ी बड़ी ताकतें पूरी शक्ति से लगी हुई हैं।

प्रख्यात बुद्धिजीवी और ब्राह्मण विचारक डॉ. विजय मिश्रा की कलम से।

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