सात समन्दर पार से आयी विदेशी युवतियों ने परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों को तिलक कर मनाया भाई दूज का पर्व

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में सात समन्दर पार विश्व के अनेक देशों से आयी युवतियों ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन एवं पावन सानिध्य में भाईदूज का पर्व मनाया। इन विदेशी बहनों ने परमार्थ गुरूकुल के  ऋषिकुमारों को तिलक कर जीवन में आगे बढ़ते रहने एवं सनातन संस्कृति को आगे बढ़ायें रखने के लिये अपनी शुभकामनायें भी दी। उन्होने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति, परम्परा एवं योग से प्रभावित होकर पूरे विश्व से लोग यहां पर आते है और हमारा सौभाग्य है कि हम भाई-बहन के स्नेह पर्व के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में है।
विदेशी बहनों ने परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों को तिलक कर प्रेम, अपनत्व एवं विश्व एक परिवार है का संदेश दिया।  उन्होने पर्व के अवसर पर परमार्थ गुरूकुल के सभी ऋषिकुमारों को रजाईयाँ भेंट की।  इन बहनों ने कहा कि भारत में सदियों से चली आ रही इस परम्परा में बहनें, भाईयों के उज्जवल भविष्य एवं रक्षा की कामना करती है परन्तु आज हम सभी भाई-बहन मिलकर पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेते है। हम जहां भी रहे; जिस देश में भी रहे परन्तु हमारी धरा और गगन एक है अतः हमारी वसुधा को प्रदूषण मुक्त करने के लिये पूज्य स्वामी जी के मार्गदर्शन में हम सभी मिलकर पर्यावरण एवं जल संरक्षण, वृक्षारोपण का संकल्प लेते है।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’पर्व को पर्यावरण के साथ जोड़ने से पर्यावरण बचेगा, पर्यावरण बचेगा तो पीढि़याँ बचेगी; प्राण बचेंगे। उन्होने कहा कि वृक्ष से वायु और वायु से मनुष्य की आयु, आयु से जीवन और जीवन से सारा संसार। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय की संस्कृति है; वैश्विक संस्कृति है। हम अपने पर्व के अवसर पर विश्व से आयें लोगो को शामिल करे तो वे भी हमारी इस संस्कृति एवं संस्कारांे को जीवन का अंग बना सकते है क्योंकि संस्कार है तो जीवन है। उन्होने कहा कि अनेकता में एकता ही हमारी शान है इसलिये हमारा देश महान हैं। इस सृष्टि में सभी एक दूसरे का सम्मान करना सीखे; एकता को बढ़ावा दे, सामाजिक समानता से ही एकता बढ़ती है। उन्होन कहा हमारा रंग, भाषा, वेशभूषा एवं खान-पान के तरीके भले ही अलग-अलग हो परन्तु हम सब एक परिवार है यही हमारी संस्कृति है एवं .ऋषियों ने भी यही संदेश दिया है।’
साध्वी भगवती सरस्वती ने भाई दूज पर्व का महत्व समझाते हुये कहा कि ’यह पर्व भाई बहन के स्नेह का प्रतीक है। इससे स्नेह की डोर और मजबूत हो जाती है। उन्होने कहा कि प्रत्येक भाई बहन की रक्षा के साथ समाज एवं पर्यावरण की रक्षा के लिये भी आगे आये।’
पूज्य स्वामी जी ने इस स्नेह और अपनत्व के पर्व भाईदूज पर सभी को आपस में और प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार करने का संदेश दिया।
सभी विदेशी बहनों एवं ऋषिकुमारों ने जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, आभा सरस्वती, नन्दिनी त्रिपाठी एवं विश्व के अनेक देशों से आये योग साधकों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।