भारत के नागरिक बनें संतुलित विकास के संवाहक -स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 28 अप्रैल। परमार्थ निकेतन में थाईलैण्ड के ’’पूर्व प्रधानमंत्री श्री बनहर्न सिल्पा अर्चा’’ की सुपुत्री सुश्री कंजना सिलपा अर्चा एवं उनके साथ में थाईलैण्ड की पत्रकार ओरारा अनीगुची पधारी। उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट कर आर्शीवाद प्राप्त किया एवं परमार्थ गंगा तट पर होने वाली दिव्य आरती मेेें सहभाग किया। श्री बनहर्न सिल्पा अर्चा 1995-96 में थाईलैण्ड के प्रधानमंत्री थे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और थाईलैण्ड के पूर्व प्रधानमंत्री श्री बनहर्न सिल्पा अर्चा की सुपुत्री सुश्री कंजना सिलपा अर्चा एवं थाईलैण्ड की पत्रकार ओरारा अनीगुची के मध्य थाईलैण्ड और भारत की संस्कृतियों के आदन-प्रदान के साथ पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक तपन, प्राकृतिक संसाधनों का बेहिसाब दोहन तथा विश्व शान्ति, समरसता और सहिष्णुता जैसे अनके विषय पर विशद चर्चा हुई। स्वामी जी ने कहा कि भारत और थाईलैण्ड दोनों ही राष्ट्र प्रदूषण की समस्या से ग्रसित है अतः हमें इस ओर मिलकर समाधान निकालने की नितांत अवश्यकता है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के नागरिक उस राष्ट्र की सबसे बड़़ी पूंजी होते है। स्वच्छ एवं स्वस्थ नागरिक ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते है। वर्तमान समय में पूरा विश्व एक नये दौर से गुज़र रहा है और वैश्विक आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, मानव विकास, महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में अबाध गति से प्रगति कर रहा है परन्तु विकास और निर्माण की इस दौड़़ में पर्यावरण का संरक्षण कहीं न कहीं पीछे छूट रहा है। हम कितनी भी नई ऊंचाईचों को छू ले परन्तु प्रकृति, पर्यावरण और पृथ्वी के संरक्षण के बिना पूर्ण विकास सम्भव नहीं है। हमें वैश्विक स्तर पर सशक्त, सबल और स्वच्छ वातावरण के निर्माण के लिये मिलकर भगीरथ प्रयास करना होगा। उन्होने कहा कि वैश्विक तपन और प्रदूषण को कम करने के लिये वैश्विक नीति-निर्माता अपना कार्य कर रहे है परन्तु हर मनुष्य को भी प्रतिबद्धता के साथ पर्यावरण संरक्षण को अपना लक्ष्य बनाना होगा; हमंे संतुलित विकास का संवाहक बनना होगा तभी हम सहस्राब्दी विकास लक्ष्य हासिल कर सकते है।
थाईलैण्ड से आयी सुश्री कंजना सिलपा अर्चा परमार्थ निकेतन के स्वच्छ, शान्त, हरित और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण को देखकर अत्यंत प्रभावित हुयी। वे स्वामी जी महाराज की हरियाली युक्त कुटिया और परमार्थ तट पर होने वाली दिव्य गंगा आरती से अत्यंत प्रभावित हुये। उन्होने थाईलैण्ड में अपने लिये इस तरह की हरित कुटिया बनाने की इच्छा व्यक्त की, साथ ही उन्होने गंगा आरती को शान्ति और सम्बल देने वाला माध्यम बताया। उन्होने भारत के लोगों के स्वास्थ्य के विषय में चर्चा करते हुये कहा कि थाईलैण्ड की सरकार अपनी जीडीपी का महज 403 प्रतिशत सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करती है साथ ही कहा कि थाईलैण्ड का स्वास्थ्य माॅडल भारत के लिये सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिये उत्तम माॅडल साबित हो सकता है। उन्होने परमार्थ निकेतन द्वारा पर्यावरण एवं नदियों के संरक्षण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि भारत वास्तव मंे आध्यात्मिक राष्ट्र  है परन्तु स्वर्गाश्रम के तो कण-कण में अध्यात्म बसा है उन्होने यहां पर पुनः आने की इच्छा व्यक्त की।
पूज्य स्वामी जी महाराज और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी के साथ सुश्री  कंजना सिलपा अर्चा, ओरारा अनीगुची, सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी, लौरी, श्रीमती इन्दू जी एवं परमार्थ गुरूकुल के आचार्यो एवं ऋषिकुमारों ने मिलकर विश्व स्तर पर स्वच्छता और स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की तत्पश्चात सभी ने विश्व विख्यात दिव्य गंगा आरती में सहभााग किया। आरती के पश्चात पूज्य स्वामी जी महाराज ने सभी को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया। स्वामी जी महाराज ने सुश्री कंजना सिलपा अर्चा एवं ओरारा अनीगुची को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।