क्या है बसंत पंचमी का महत्व? कैसे की जाती है मां सरस्वती पूजा?

नई दिल्ली। बसंत पंचमी के दिन को मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है. हिंदु धर्म में के मुताबिक बसंत पंचमी के दिन ही ब्रह्मा जी ने मां सरस्वतीकी सरंचना की थी. एक ऐसी देवी जिनके चार हाथ थे, एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था. ब्रह्मा जी ने इस देवी से वीणा बजाने को कहा, जिसके बाद संसार में मौजूद हर चीज़ में स्वर आ गया. इसलिए ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी नाम दिया. इसी वजह से मां सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला की देवी कहा जाता है. बसंत पंचमी दिन मां सरस्वती की खास पूजा की जाती है.

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की कैसे करें पूजन बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने के लिए सबसे पहले सरस्वती की प्रतिमा रखें. कलश स्थापित कर सबसे पहले भगवान गणेश का नाम लेकर पूजा करें. सरस्वती माता की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आमचन और स्नान कराएं. माता को पीले रंग के फूल अर्पित करें, माला और सफेद वस्त्र पहनाएं फिर मां सरस्वती का पूरा श्रृंगार करें. मां के चरणों पर गुलाल अर्पित करें. सरस्वती मां पीले फल या फिर मौसमी फलों के साथ-साथ बूंदी चढ़ाएं. माता को मालपुए और खीर का भोग लगाएं. सरस्वती ज्ञान और वाणी की देवी हैं. पूजा के समय पुस्तकें या फिर वाद्ययंत्रों का भी पूजन करें. कई लोग बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन हवन से करते हैं. अगर आप हवन करें तो सरस्वती माता के नाम से ‘ओम श्री सरस्वत्यै नम: स्वहा” इस मंत्र से एक सौ आठ बार जाप करें. साथ ही संरस्वती मां के वंदना मंत्र का भी जाप करें.