एक समय था जब हजार करोड़ के मालिक बालकृष्ण के पास नहीं था बैंक एकाउंट

नई दिल्ली। हुरुन इंडिया ने इस साल की रिच लिस्ट जारी की है जिसमें बाबा रामदेव संचालित पतंजलि के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण देश के टॉप 10 अमीरों में शामिल हुए हैं। जहां पिछले साल बालकृष्ण 25वें पायदान पर थे वहीं इस बार वो 8वें नंबर पर पहुंच गए हैं। जानें- कितनी है बालकृष्ण की संपत्ति और कैसे हासिल किया ये मुकाम। बालकृष्ण इस साल अमीरो की लिस्ट में 17 पायदान ऊपर चढ़कर 25 से 8वें नबर पर पहुंच गए हैं यानी वो भारत के 8वें सबसे अमीर शख्स हैं। एक साल में उनकी संपत्ति में 173% की बढ़ोतरी हुई है जिसके बाद उनकी कुल संपत्ति 70 हजार करोड़ की हो गई है। इस लिस्ट में कुल 617 भारतीयों का नाम शामिल है। इससे पहले मार्च में फोर्ब्स द्वारा जारी की गई ‘वर्ल्ड बिलियनेयर्स’ (World’s Billionaires) की लिस्ट में 2043 लोगों का नाम था जिसमें 44 साल के बालकृष्ण 814वें नंबर पर थे। वहीं पिछले साल उन्होंने फोर्ब्स की 100 सबसे अमीर भारतीय लोगों की लिस्ट में 2.5 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ 48वां स्थान हासिल किया। बालकृष्ण पतंजलि आयुर्वेद के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और उनके पास इसके 94% शेयर हैं. खबरों की मानें तो वो दिन में 15 घंटे काम करते हैं और इस काम के लिए किसी भी तरह का कोई वेतन नहीं लेते हैं। इतना ही नहीं, उनका कहना है कि वो कोई छुट्टी भी नहीं लेते हैं फिर चाहे कोई त्यौहार या संडे ही क्यों ना हो। एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक, बालकृष्ण ने बताया कि ‘जब 10 साल पहले मैंने पतंजलि की शुरुआत की थी तब यह नहीं सोचा था कि यह इतने बड़े स्तर तक पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि मैंने 50-60 करोड़ का पर्सनल लोन लिया था और इससे पहले मेरा पर्सनल बैंक अकाउंट तक नहीं था। बता दें कि बालकृष्ण का जन्म 25 जुलाई 1972 को हरिद्वार में सुमित्रा देवी और जय वल्लभ के घर हुआ था। उनके माता-पिता नेपाल के रहने वाले हैं। साल 1988 में उन्होंने हरयाणा के कलवा गुरुकुल में पढ़ना शुरू किया जहां रामदेव भी पढ़ा करते थे। रामदेव ने सन्यांसी की दीक्षा ली जिसके बाद उनका नाम स्वामी रामदेव हो गया। रामदेव और बालकृष्ण के बीत गहरी दोस्ती हो गई। वाराणसी की यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद बालकृष्ण ने भारत में घूमना शुरू किया और पौधों पर स्टडी करना शुरू किया जिससे उनका उपचार में प्रयोग किया जा सके। इसके बाद साल 1995 में उन्होंने रामदेव के साथ मिलकर दिव्या फार्मेसी की शुरुआत की। उनका मकसद था बाजार में मिलने वाली दवाईयों जैसी ही दवाईयों को कम कीमत में बनाना और उपलब्ध करवाना। रामदेव ने बताया कि उस समय उनके पास कंपनी को रजिस्टर करवाने के पैसे नहीं थे इसलिए शुरुआती 3 साल में यानी 1998 तक उन्होंने मुफ्त में दवाईयां बांटी। दोनों खुद कच्चा माल खरीदते थे, उसे तैयार करते, मिक्स करते और खुद ही पैक किया करते थे। साल 2003 तक दोनों को थोड़ी कमाई होने लगी जिसके बाद बालकृष्ण को फार्मेसी का प्रमुख बना दिया गया। इसके बाद साल 2006 में उन्होंने ‘पतंजलि आयुर्वेद’ की शुरुआत की। साल 2016-17 में पतंजलि का टर्नओवर 11% की बढ़तरी के साथ 10,651 करोड़ तक पहुंच गया। बता दें कि बालकृष्ण पर फर्जी डिग्रियां होने के आरोप लग चुके हैं। इसके साथ ही बालकृष्ण पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने का भी मामला चला था. हालांकि बाद में उन्हें क्लीनचिट मिल गई थी।