बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर सामाजिक समरसता और भारतीयता के पक्षधर थे – प्रो. शंकर शरण

वाराणसी। बाबा साहब डॉ. भीम रामजी अम्बेडकर की 127 वी जयंती के उपलक्ष्य में यूनिवर्सल कम्युनिकेशन मीडिया सेंटर, लखनऊ द्वारा पराड़कर स्मृति भवन, वाराणसी में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का चिंतन विषयक संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रख्यात चिंतक एवं एनसीईआरटी में प्रो. शंकर शरण थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. बिमलेंद्र कुमार, विभागाध्यक्ष-पाली और बौद्ध अध्ययन विभाग, बीएचयू ने किया। विशिष्ट अतिथि वेन के. मेधान्कर थेरो, संयुक्त सचिव, महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया थे।

मुख्य अतिथि प्रो. शंकर शरण ने कहा कि बाबा साहब भारतीय संस्कृति, भारतीय दर्शन और भारतीयता के बहुत बड़े चिंतक थे। इसलिए अंतिम समय मे जब उन्होंने बौद्ध धर्म को ही अपनाया तो उसके पीछे एक सबसे बड़ा कारण भारतीयता के नजदीक रहने का लोभ भी था।उन्होंने कहा कि बाबा साहब के प्रति चार विरोधी अतिरंजित विचार फैलाई गई कि वह संविधान निर्माता, स्वतंत्रता विरोधी, हिन्दू विरोधी और दलित मसीहा थे। लेकिन इस सबसे ऊपर उठकर उनके चिंतन में देश भक्ति सबसे ऊपर थी। वे स्वाभिमान एवं स्वदेशी के पक्षधर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. विमलेंद्र कुमार ने कहा कि बाबा साहब ने आजीवन समाज के कमजोर लोगो के बारे में सोचा और इसके लिए संघर्ष किया।विशिष्ट अतिथि वेन के. मेधान्कर थेरो ने अम्बेडकर के आध्यत्मिक चिन्तन पक्ष को रखा। विशिष्ठ वक्ता प्रो. बेचन जी थे, जिन्होंने बाबा साहब विभिन्न कृत्यों पर प्रकाश डाला। विषय प्रवर्तन वरिष्ठ पत्रकार रूपेश पांडेय ने किया।स्वागत भाषण यूनिवर्सल मीडिया कम्युनिकेशन सेंटर के अध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र कुमार ने दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र ने किया। कार्यक्रम के अंत मे अतिथियों का सम्मान स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम प्रदान कर किया गया। साथ ही यूनिवर्सल कम्युनिकेशन मीडिया सेंटर , लखनऊ द्वारा डॉ. हृदयकान्त पांडेय, डॉ. ब्रजेश पाठक, डॉ. राजेश कुमार झा, डॉ. नीलम उपाध्याय, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. रजनीश कुमार चतुर्वेदी, डॉ. केदार नाथ, डॉ. धीरेन्द्र पांडेय , डॉ. राजेश श्रीवास्तव को अतिथियों के कर कमलों से सम्मानित किया गया। स्वागत गीत डॉ ब्रजेश पाठक ने प्रस्तुत किया।