भारत योग, आयुर्वेद और शान्ति का जन्मदाता-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश/ बुशरा असलम। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टर फेथ वाश एलायंस के संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं आयुष मंत्री भारत सरकार श्री श्रीपद् नाईक येसो जी की दिल्ली में भेंटवार्ता हुई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं श्री श्रीपद् नाईक येसो जी के मध्य योग और आयुर्वेद को भारत के घर-घर तक पहंुचाने तथा इसके विश्व व्यापी प्रचार-प्रसार करने हेतु विशद चर्चा हुई। भारत को हरित एवं प्राणवायु ऑक्सीजन युक्त पर्यटन के रूप में विकसित करने तथा आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों को उगाने को प्रोत्साहन देने के विषय में चर्चा की।
स्वामी जी ने उत्तराखण्ड सहित अन्य हिमालयी राज्यों को ऑक्सीजन उत्पादक राज्य बनाने तथा इन राज्यों में आयुर्वेदिक पौधों के उत्पादन के विषय में चर्चा करते हुये कहा कि हिमालय राज्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड के पास गंगा रूपी अमूल्य धरोहर के साथ योग, आयुर्वेद और स्वच्छ वायु का स्रोत हिमालय है इसके लिये और भी बेहतर योजना बनायी जा सकती है।
स्वामी जी ने कहा कि भारत के पास ‘योग’ रूपी धरोहर है। योग, आयुर्वेद एवं भारतीय संस्कृति को आत्मसात करने के लिये पूरे विश्व से पर्यटक भारत आते हैं। अतः भारत को योग और आयुर्वेद के केन्द्र के रूप में विकसित करने हेतु मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारत योग, आयुर्वेद और शान्ति का जन्मदाता है और इसमें हिमालय और गंगा का बहुत बड़ा योगदान है। हिमालय हमारी प्राकृतिक धरोहर ही नहीं बल्कि हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी है। हिमालय हमेशा से ही देवी-देवताओं और ऋषियों की तपस्थली रहा है। आदि गुरू शंकराचार्य, स्वामी विवेकानन्द जी व गुरूगोविंद सिंह जी आदि ने भी यही से प्रेरणा लेकर समाज को एक नयी दिशा प्रदान की है। हिमालय ने देश-दुनिया को आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया है। साथ ही हमारे लगभग 65 प्रतिशत खाद्यान्न की आपूर्ति गंगा बेसिन से होती है तथा 65 प्रतिशत जल हमें हिमालय से ही प्राप्त है। हिमालय ने आध्यात्मिक, सामाजिक, स्वास्थ्य व आर्थिक दृष्टि से भारत को समृद्धि प्रदान की है। हिमालय, पवित्रता का भी प्रतीक है। स्वामी जी ने कहा कि भारत को समृद्ध बनाना है तो हिमालय और गंगा की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।
श्री श्रीपद् नाईक येसो जी ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि आज स्वामी जी का आशीर्वाद मुझे प्राप्त हुआ। उनके साथ मेरी पिछली बैठक भी अत्यंत यादगार थी। जब भी पूज्य स्वामी जी के साथ मुझे चर्चा करने का अवसर प्राप्त हुआ तब उनके द्वारा अनेक नवोदित विचार और संकल्प हमें प्राप्त होते है जो हमारे लिये प्रेरणा का स्रोत होते है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने माननीय मंत्री जी को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव और परमार्थ गंगा आरती में सहभाग हेतु आमंत्रित किया।