अयोध्या में रामलीला होगी बेहद खास क्योंकि इस बार मुसलमान निभाएंगे किरदार

अयोध्या/ राजन मिश्र। हमारे देश में दशहरा हर साल हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और हर साल मर्यादा पुरुषोत्तम राम की जन्म स्थली अयोध्या राम और सीता की तैयारियों मे जुटती है, लेकिन इस बार खास है भगवान राम की नगरी अयोध्या अपने राम और सीता की तैयारियों में जोरशोर से जुटी है। अबकी बार यहां एक अनूठी रामलीला का मंचन होने जा रहा है। जिसमें मुस्लिम कलाकार पहली बार राम लीला का मंचन करेंगे।

मुस्लिम बाहुल्य आबादी वाले देश इंडोनेशिया से मुस्लिम कलाकार इस साल रामलीला में किरदार निभाएंगे दरअसल मुस्लिम बाहुल्य होने के बावजूद भी इंडोनेशिया में रामलीला के प्रति लोगों में आस्था है। यहां के मुस्लिम राम को महान और रामायण को आदर्श ग्रंथ मानते हैं। भारत में ऋषि वाल्मीकि की रामायण, तो इंडोनेशिया में कवि योगेश्वर की लिखी रामायण का मंचन किया जाता है। वहां, दशरथ को विश्वरंजन, सीता को सिंता, हनुमान को अनोमान कहा जाता है।

इंडोनेशिया में तीन तरह की रामलीला होती हैं, जिसमें पपेट, शैडो पपेट और बैले रामलीला हैं। इस बार इंडोनेशिया के कलाकार लगभग 13 दुर्लभ वाद्य यंत्रों के साथ प्रस्तृति देंगे। 12 कलाकार मुस्लिम हैं, जिनमें 6 पुरुष और 6 महिलाएं हैं। इंडोनेशिया की रामायण की एक खासियत यह भी है कि कलाकार रामलीला की शुरुआत सीता हरण से करते हैं और रावण के वध पर समाप्त कर देते हैं।

संस्कृति और धार्मिक कार्य विभाग के मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि रामलीला समिति अयोध्या और लखनऊ में 13 से 15 सितंबर के बीच रामलीला का मंचन करेगी। उन्होंने कहा कि पहली बार राज्य में इस तरह की रामलीला का मंचन हो रहा है, जिसमें विदेशी कलाकार ​हिस्साकवहां के कलाकारों को रामलीला का मंचन करने में कोई दिक्कत नहीं है। खास बात यह भी है कि मंचन करने वाले कलाकार मुस्लिम हैं और वे मांसाहारी नहीं हैं।

 

अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि इस कार्यक्रम के जरिए हमे सीख मिलती हैं। रामलीला का इंडोनेशिया से सांस्कृतिक संबंध है। हम चाहते हैं कि राम नगरी होने के कारण अयोध्या में अधिक से अधिक देशों की रामलीला का मंचन हो। दुनिया भर में 65 देश हैं, जहां रामलीला का मंचन होता है।