अटल जीवन पर ‘गीता दर्शन’ कर्म

नई दिल्ली। कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि
श्रीमदभगवद् गीता के अध्याय दो के 47 वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा, कर्म करो फल की चिंता मत करो।
कृष्ण के इसी उपदेश को अटल जी ने भी अपने जीवन का मूल मंत्र बना लिया और जब सत्ता में रहे तो अपने कर्मों से राष्ट्र का मान सम्मान पूरी दुनिया में बढ़ाया। याद कीजिए 1998 का पोखरण न्यूक्लियर टेस्ट। दुनिया के ताकतवर देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया था। अटल अडिग रहे। भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाकर इतिहास रच दिया। अटल जी ने कहा था कि पोखरण- 2 कोई आत्मश्राधा के लिए नहीं था, कोई पुरुषार्थ के प्रकटिकरण के लिए नहीं था, उसके कारण कुछ कठिनाइयां आई हैं, मैं मानता हूं, लेकिन देश उन कठिनाइयों का सफलतापूर्वक सामना करेगा, ये भी हमको विश्वास था और ऐसा ही हुआ है।
अटल को अपने कर्म पर पूरा विश्वास था उन्होंने अपनी पार्टी के लिए जी तोड़ मेहनत की। आपने कई बार सुनी होगी अटलवाणी। 6 अप्रैल 1980 का दिन, जब बीजेपी के पहले राष्ट्रीय अधिवेशन में मुंबई से अटल ने अपनी पार्टी के लिए भविष्यवाणी की थी।
भारत के पश्चिमी घाट को मंडित करने वाले महासागर के किनारे खड़े होकर मैं ये भविष्यवाणी करने का साहस करता हूं कि अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा। आज ये अटलवाणी शत प्रतिशत सच साबित हुई है। पार्टी शून्य से शिखर तक पहुंच चुकी है। 2 सीटों वाली बीजेपी की आज पूर्ण बहुमत की सरकार है और इसमें अटल के महान कर्म को भुलाया नहीं जा सकता।