भारत के स्वाधीनता संग्राम में रही है गजानन की भूमिका, विजामि मुख्यालय आनन्दधाम में हुआ गणपति विसर्जन

नई दिल्ली। विश्व जागृति मिशन के अन्तरराष्ट्रीय मुख्यालय के परिसर में गणपति विर्सजन का कार्यक्रम आज सोल्लास सम्पन्न हुआ। मिशन प्रमुख आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने भक्तों, साधकों, ऋषिकुमारों व मुनिकुमारों को भगवान गणेश के विभिन्न प्रेरक आध्यात्मिक प्रसंग सुनाये।

आनन्दधाम के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री एम. एल. तिवारी की देखरेख में आनन्दधाम मन्दिर के दिव्य प्रांगण में मने गणपति पूजन सप्ताह का समापन बड़ा ही दिव्य व मनमोहक था। आश्रम के अन्तःवासियों, एनसीआर-नई दिल्ली के परिजनों तथा महर्षि वेदव्यास गुरुकुल विद्यापीठ के ऋषिकुमारों एवं मुनिकुमारों ने सामूहिक पूजन किया, तत्पश्चात गणपति भगवान की शोभा यात्रा निकाली गयी। बैण्ड-बाजों की अनुगूँज के बीच यह शोभा यात्रा आश्रम परिसर स्थित सिद्ध शिखर मन्दिर के पास सम्पन्न हुई।

प्रख्यात अध्यात्मवेत्ता आचार्य सुधांशु जी ने किया प्रेरक मार्गदर्शन

सिद्ध शिखर मन्दिर के सम्मुख पहले से ही मौजूद विजामि परिवार के मुखिया आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने सभी को भगवान गणेश के आध्यात्मिक स्वरूप से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि श्रीगणेश के बड़े कान गम्भीरता से सभी की बातों को सुनने की जहाँ प्रेरणा देते हैं, वहीं उनका बड़ा पेट अच्छी-बुरी बातों को पचाकर अच्छी बातों व गुणों को धारण करने तथा निष्प्रयोज्य चीजों को बाहर कर देने की प्रेरणा देता है। भगवान गणेश की छोटी आँखों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि वह किसी को नहीं देखते हैं, बल्कि सच्चाई यह है कि वह सबको समान भाव से देखते हैं और उनकी नजर सभी पर रहती है। महाराजश्री ने भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विवेक का प्रतीक एवं विघ्नविनाशक बताया।

भारत को आजादी दिलाने में भी है गणपति का योगदान – राम महेश मिश्र

मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने भारतीय स्वाधीनता संग्राम में गणपति भगवान की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया और कहा कि बाल गंगाधर तिलक ने हजारों गणपति मण्डलों का गठन करके भारतीय जनमानस को विशालकाय अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध खड़ा करने की अनूठी शुरुआत की थी, जिसकी आग महाराष्ट्र से आरम्भ होकर हिन्दुस्तान के तत्कालीन सभी प्रान्तों में फैल गयी थी। महात्मा गाँधी के अफ्रीका से भारत आगमन के उपरान्त वृद्ध बाल गंगाधर तिलक ने गणपति मण्डलों से उद्भूत स्वतंत्रता संग्राम की कमान उन्हें सौंपी, जिसकी अन्तिम परिणति 15 अगस्त 1947 को भारत के आजादी के रूप में हुई। श्री मिश्र ने कहा कि आज 04 सितम्बर 2017 को गणपति विसर्जन के दिवस पर कृतज्ञ स्वाधीन भारत भगवान गणेश के साथ-साथ बाल गंगाधर तिलक, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी एवं समस्त क्रान्तिवीर हुतात्माओं तथा लाखों-करोड़ों ज्ञात-अज्ञात स्वाधीनता संग्राम सेनानियों को श्रद्धासिक्त हृदय से नमन करता है।

गणपति विसर्जन के समय महामन्त्री श्री देवराज कटारिया, द् व्हाइट लोट्स हास्पिटल एवं प्रशिक्षण केन्द्र के प्रशासक डॉ. बी. एस. राजपूत, युगऋषि आयुर्वेद के सीईओ श्री के. के. जैन, संस्था के वरिष्ठ अधिकारी श्री मनोज शास्त्री, वरिष्ठ धर्माचार्य श्री अनिल झा एवं आनन्दधाम गुरुकुल के प्रधानाचार्य आचार्य राकेश द्विवेदी सहित कई गण्यमान व्यक्ति मौजूद रहे।