अमेरिका की शांति यात्रा के बाद पहली बार राजस्थान प्रवास पर आचार्य लोकेश, जोधपुर, नाकोडा, पचपदरा में होगा भव्य स्वागत

नई दिल्ली। अमेरिका में शांति व सद्भावना यात्रा के पश्चात् मारवाड़ क्षेत्र के जन्मे, शिक्षित दीक्षित आचार्य डा. लोकेश मुनि पहली बार 21 और 22 जुलाई को राजस्थान प्रवास पर होंगे जहाँ उनका जोधपुर, नाकोडा, पचपदरा में  स्वागत होगा और विभिन्न कार्यक्रमों को संबोधित करेंगे| आचार्य लोकेश मुनि जी सड़क मार्ग से  21 जुलाई को प्रात: अपनी शिक्षा भूमि जोधपुर पहुंचेंगे, सायं अपनी दीक्षा भूमि बालोतरा होते हुए प्रख्यात जैन तीर्थ नाकोडा पहुंचेंगे| 22 जुलाई को प्रात: आचार्य लोकेश मुनि अपनी जन्म भूमि पचपदरा पहुंचेंगे, जहाँ रात्रि प्रवास करेंगे| आचार्य लोकेश मुनि राजस्थान प्रवास के दौरान अनेक, स्थानों पर अहिंसा, शांति और सद्भावना का सन्देश देंगे|

गौरतलब है आचार्य लोकेश ने अमेरिका में शांति सद्भावना व योग यात्रा के दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ मुख्यालय में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस में भाग लिया और इस अवसर पर आयोजित ‘शांति के लिए योग’ सम्मेलन को संबोधित किया| न्यूयॉर्क में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर महात्मा गाँधी पीस फाउंडेशन इंटरनेशनल  द्वारा ‘अहिंसा व शांतिपूर्ण सहस्तित्व’ विषय को मुख्य अथिति व प्रमुख वक्ता के रूप में संबोधित किया| आचार्य लोकेश मुनि का शिकागो के भारतीय दूतावास में राजदूत नीता भूषण ने भव्य स्वागत किया, इस अवसर पर आयोजित ‘हिंसा मुक्त विश्व’ संगोष्ठी को आचार्य लोकेश ने संबोधित किया|

आचार्य लोकेश को विश्व शांति और सद्भावना के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिकागो जैन सेंटर की रजत जयंती के दौरान ‘विशिष्ठ सेवा अवार्ड’ से सम्मानित किया| शान्तिदूत आचार्य डा. लोकेश मुनि ने न्यूयॉर्क में आयोजित ‘शांति के लिए अंतरधार्मिक प्रार्थना’ को संबोधित किया| अहिंसा विश्व भारती की अन्तर्राष्ट्रीय शाखा का उदघाटन आचार्य लोकेश मुनि ने अपनी यात्रा के दौरान न्यूजर्सी में किया| आचार्य लोकेश ने कनाडा व अमेरिका में आयोजित अनेक कार्यक्रमों में विश्व शांति व सद्भावना का सन्देश देते हुए कहा कि मानव कल्याण व समाज के विकास के लिए अंतरधार्मिक संवाद आवश्यक है|

आचार्य लोकेश ने राजस्थान प्रवास से पूर्व आचार्य लोकेश आश्रम में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका निवासी चरम भौतिक विकास के बावजूद अध्यात्म, योग और साधना की और आकर्षित होते है, वो भारत की बहुलतावादी संस्कृति, आध्यात्मिक विचारों और धार्मिक एकता का स्वागत करते है| भारत की इस संस्कृति को अपनाने से विश्व का कल्याण संभव है| भारत का हर छोटा गाँव और शहर शांति और विकास चाहता है| भारत में जाति, धर्म, सम्प्रदाय के नाम पर कोई मतभेद नहीं है| उन्होंने कहा राजस्थान जाने से उन्हें उर्जा मिलती है| नाकोडा तीर्थ श्रद्धा, आस्था का विश्व विख्यात केंद्र है तथा राजस्थान का हर गाँव, हर शहर आज भी भारतीय संस्कृति का प्रतीक है|