जमीयत उलेमा ए हिंद ने किया अमन और एकता सम्मेलन का आयोजन, 50 हजार से ज्यादा लोगों का लगा जमावड़ा

नई दिल्ली/ बुशरा असलम। देश में जारी मॉब लिंचिंग की अमानवीय घटनाओं और सांप्रदायिकता के बढ़ते कदम को रोकने के लिए यहां जमीयत उलेमा ए हिंद के नेतृत्व में तालकटोरा इनडोर स्टेडियम नई दिल्ली में अमन और एकता सम्मेलन संपन्न हुआ। जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और बौद्ध सहित सभी धर्मों के प्रभावशाली मुख्य विद्वानों और प्रमुखों ने हिस्सा लिया। जबकि स्टेडियम के अंदर और बाहर पचास हजार का समूह था। इस अवसर पर एक संयुक्त घोषणा पत्र पढ़ा गया, जिस का समर्थन मुस्लिम नेताओं के अलावा स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, जैनाचार्य डॉ. लोकेश मुनी, बुद्धिस्ट नेता लामा लव बजांग और मसीही आर्कबिशप अनिल जोसेफ थॉमस कोटो, ज्ञानी रंजीत सिंह गुरुद्वारा बंगला साहिब ने हाथ उठाकर किया।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि “गर्व से कहो हम भारतीय हैं।” उन्होंने राष्ट्र भावना और राष्ट्रीयता की मशाल को अपने दिलों में जाग्रत रखने का संदेश दिया जिससे भारत की अस्मिता पर कभी आंच न आने पाये। स्वामी जी ने वहां मौजूद लोगों से अपने दिलों में मोहब्बत और भाईचारा की भावना को बनायें रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि अपने दिलों को नफरत का दरिया न बनायें बल्कि मोहब्बत, भाईचारे, शान्ति, एकता और अमन का समन्दर बनायें। स्वामी जी ने कहा कि हमें जिम्मेदारी लेनी होगी कि आईएसआई या कुछ ऐसे भटके हुये लोग जो कुछ भी ऐसा करते है तो हमें कहना होगा कि यह इस्लाम नहीं है ताकि लोगों को सही संदेश जाये। उन्होने कहा कि इस्लाम वतन को जोड़ कर रखने का संदेश देता है; सब की सलामती का संदेश देता है; वतन की सलामती का संदेश देता है। आज इस मंच से हम कह दें पूरे विश्व को कि इस्लाम सब की सलामती चाहता है, क्योंकि एकता की आवाज में बहुत बड़ी ताकत है, उस ताकत को समझें। स्वामी जी महाराज ने कहा कि शक से नही, शिकायतों से नही बल्कि हक से कहे कि यह वतन हमारा है।
हज़रत मौलाना क़ारी सय्यद मुहम्मद उस्मान, साहब मंसूरपूरी जी, ने कहा कि वर्तमान समय में देश की बदलती हुई सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में, जिसमें देश के मिले जुले सामाजिक ताने-बाने, धार्मिक सहिष्णुता, साम्प्रदायिक सद्भाव, अमन और शान्ति पर आधारित चिरकालीन व्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिशें की जा रही है। यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारें, सद्भाव, सौहार्द, अमन, शान्ति और एकता को बनायें रखने के लिये हर सम्भव प्रयास करें ताकि विध्वंसक तत्वों की साजिशें नाकाम हों और इस हेतु विभिन्न धर्मों की विचारधाराओं को एक साथ लाकर अनेकता में एकता और आपसी मेलजोल को बनाया रखा जा सके।

वहीं जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव और इस सम्मेलन के ऑर्गेनाइजर मौलाना महमूद मदनी ने घोषणा पत्र का पाठ करते हुए कहा कि यह देश हमारा है, इसको घृणा की आंधियों से बचाने की जिम्मेदारी हम सब पर बनती है। अपनी इसी कर्तव्य परायणता के तहत जमीअत उलमा ए हिंद भविष्य में अपना पूर्ण उत्तरदायित्व निभाने का फैसला किया है। इसलिए इस घोषणापत्र में यह शामिल किया गया है कि देश के वातावरण को पीसफुल बनाए रखने के लिए हर जिला और शहर में जमीयत सद्भावना मंच स्थापित किए जाएं, जिसमें हर वर्ग और हर धर्म के शांतिप्रिय नागरिकों को शामिल किया जाए और इस मंच की तरफ से समय-समय पर संयुक्त बैठकें और प्रोग्राम आयोजित किए जाएं, ताकि आपस में विश्वास की बहाली में मदद मिल सके। मौलाना मदनी ने शेर ओ शायरी के माध्यम से अपने विचारों को प्रकट करते हुए कहा कि आज के सम्मेलन में पूरा भारत इकट्ठा है, इसलिए यह मांग भारत के सभी वर्गों की तरफ से है।

अध्यक्षीय भाषण में जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना कारी सय्यद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी ने संयुक्त राष्ट्रीयता के शीर्षक से बात करते हुए कहा कि जमीअत उलमा ए हिंद हमेशा से यह कहती रही है कि भारत के नागरिक भारतीय होने के आधार पर एक कौम हैं। जमीयत उलेमा ए हिंद के पूर्व अध्यक्ष हजरत शेख उल इस्लाम मौलाना हुसैन अहमद मदनी संयुक्त राष्ट्रवाद के घोतक थे और उन्होंने इस दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए सभी को जोड़ने और एक धागे में बांधने का मार्ग प्रशस्त किया था। वर्तमान हालात के लिए सरकार जिम्मेदार है। मगर यह कहकर हम अपनी कर्तव्य परायणता से पल्ला नहीं झाड़ सकते बल्कि हम पर यह जिम्मेदारी नियुक्त होती है कि हम हर प्रकार की निराशा और भावुकता से अपने आप को बचाकर इस्लामी शिक्षाओं पर पूरी तरह से डट जाएं। और इस्लामी परंपराओं के अनुसार सारे धर्मों के मानने वालों के साथ अच्छा व्यवहार अपनाना चाहिए।

मौलाना अरशद मदनी अध्यक्ष जमीयत उलेमा ए हिंद ने कहा कि जमीयत उलेमा ए हिंद की स्थापना का उद्देश्य देश के विभिन्न धर्मों के बीच अमन व शांति की स्थापना है। 70 साल गुजर जाने के बाद भी जमीयत अपने महापुरुषों और विद्वानों के मार्ग पर स्थापित है और हालात चाहे जैसे भी हों हम इससे नहीं हटेंगे। मैं मुसलमानों से कहता हूं कि वह धैर्य का साथ हरगिज़ न छोड़ें क्योंकि अत्याचारी बनकर जिंदा रहने से पीड़ित बन कर मर जाना बेहतर है। मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ कछौछवी अध्यक्ष ऑल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड सज्जादा नशीन आस्ताना सैयद मखदूम अशरफ जहांगीर सिम्नाई कछौछा शरीफ ने प्रोग्राम में निमंत्रण के लिए जमीअत उलमा ए हिंद का धन्यवाद अदा किया, उन्होंने कहा इस्लाम सबकी भलाई और सुरक्षा का पाठ देता है। हमारे रसूल सल्लल्लाहो वसल्लम का उदाहरण और व्यवहार मौजूद है कि आपने किस तरह अपने दुश्मनों के साथ भलाई का मामला किया। ज्ञानी रंजीत सिंह चीफ ग्रंथि गुरुद्वारा बंगला साहब ने धर्म को अत्याधिक संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को धर्म के आधार पर मारना पीटना अत्याधिक घ्रणा स्पद और निंदनीय कार्य है। हर एक को अपने अपने धर्म पर चलने का हक है। आचार्य लोकेश मुनी ने कहा कि धर्म हमें जोड़ना सिखाता है तोड़ना नहीं। हम जहां अपने धर्म का पालन करें वहीं दूसरे के धर्म का सम्मान भी करें।
अनिल जोसेफ थॉमस कोटो, आर्कबिशप आफ दिल्ली ने कहा कि विभिन्नता में एकता भारत की सुंदरता है। इसे तोड़ने वाले को सज़ा मिलनी चाहिए। इस सम्मेलन को सम्बोधित करने वालों में विशेष रूप से जमात-ए-इस्लामी के अमीर सैयद सआदत उल्लाह हुसैनी, मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, नवेद हामिद अध्यक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस मशावरत, सय्यद मोईन हुसैन अध्यक्ष अंजुमन खुदाम ख्वाजा साहब दरगाह अजमेर शरीफ, मौलाना सैयद मोहम्मद तनवीर हाशमी बीजापुर, प्रोफेसर अख्तरुल वासे अध्यक्ष मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर, डॉ. सैयद जफर महमूद जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया, मौलाना मतीनउल हक़ ओसामा कानपुरी अध्यक्ष जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश, मौलाना सद्दीकुल्लाह चौधरी अध्यक्ष जमीयत उलेमा बंगाल, मौलाना रहमतुल्लाह मीर बांदीपुरा कश्मीर, मौलाना हाफिज नदीम अहमद सिद्दीकी अध्यक्ष जमीयत उलेमा महाराष्ट्र, अशोक भारती अध्यक्ष नेकडोर, सैयद कासिम रसूल इलियास सदस्य ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड, मौलाना महमूद अहमद खान दरियाबादी महासचिव ऑल इंडिया उलमा काउंसिल मुंबई, सैयद सलमान चिश्ती अध्यक्ष ख्वाजा गरीब नवाज फाउंडेशन अजमेर आदि ने भी संबोधित किया। मुज्तबा फारूक महासचिव ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस मशावरत, डॉटर फादर मैथ्यू, फादर आनंद, मौलाना नियाज अहमद फारुकी जैसी कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों ने प्रोग्राम में भाग लिया। विभिन्न चरणों में मुख्य अतिथि के तौर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ कछौछवी, सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी अमीर जमात ए इस्लामी हिंद, हाजी सैयद मोईन हुसैन अध्यक्ष अंजुमन खुद्दाम ख्वाजा साहब दरगाह अजमेर शरीफ, मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी महासचिव इस्लामिक फिकह अकैडमी शरीक हुए। समारोह के संचालन का उत्तरदायित्व सफलतापूर्वक संयुक्त रूप से मौलाना महमूद मदनी, मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी व मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने निभाया।