नफरत की दिवारों को तोड़़ते हुये और मोहब्बत से दरारों को भरते हुये अपने वतन के अमन के लिये कार्य करें-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

सुपौल। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं हजरत मौलाना महमूद मदनी साहब, महासचिव जमीअत उलमा-ए-हिन्द एवं पूर्व सांसद ने गाँधी मैदान सुपौल में जीमयत उलेमा हिन्द की सुपौल, बिहार ईकाई के तत्वाधान में मौलाना हकिम्मुद्दीन साहब द्वारा आयोजित  अमन और एकता ऐतिहासिक महासम्मेलन में मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में शिरकत की। इस सम्मेलन में लाखों की संख्या में युवाओं एवं मौलानाओं ने सहभाग किया।
इस महासम्मेलन में मौलाना कासीम साहब, मौलाना नाजीम साहब, मौलाना हकिम्मुद्दीन साहब, मौलाना निहाल फैजल अहमद साहब,एवं अन्य मौलाना ने भी सहभाग किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर अमन और एकता स्थापित करना है साथ ही देशवासियों को यह संदेश देना कि विभिन्न धर्मों के धर्मगुरू मिलकर देश में अमन, शान्ति, एकता, सांप्रदायिक सौहार्द, समान अधिकार, शिक्षा के प्रति जागरूकता एवं सामाजिक एकता स्थापित करने हेतु प्रतिबद्ध है ताकि सुखद भविष्य का निर्माण हो सके।
इस भव्य सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा ’वर्तमान समय मिलकर कार्य करने का है, सारे भेदभाव की, नफरत की दिवारों को तोड़़ते हुये और मोहब्बत से दरारों को भरते हुये अपने वतन के अमन के लिये कार्य करें। अब ’जिऐंगे वतन के लिये और मरेंगे वतन के लिये, ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी कसम, तेरी राहों में जां तक लूटा जायंेगे, फूल क्या चीज है तेरे कदमों पे हम भेंट अपने सरों की चढ़ा जायेंगे’ इन पंक्तियों को दोहराते  हुये कहा कि अकेले अकेले बहुत कर लिया अब मिलकर कदम बढ़ाने का समय है। नफरत से कभी किसी का नफा नहीं हुआ और मोहब्बत से कभी भी किसी का नुकसान नहीं हुआ अतः आईये जलायें चिराग मोहब्बत के और मिटायें अन्धेरा गुरबत का; जातिवाद; आंतकवाद; नक्सलवाद एवं भाई-भतिजावाद का। स्वामी जी ने कहा कि जहां एकता है वहां अमन है; शान्ति है वहीं समृद्धि है और शान्ति ही समृद्धि का द्वार खोलती है उन्होने सभी से आहृवान किया की आईये वतन में अमन लाये और वतन को चमन बनायें। शान्ति और एकता के सू़त्र का संदेश देते हुये कहा अब फूल खिलेंगे गुलशन-गुलशन नहीं बल्कि एकता रूपी फूल खिले हर आंगन-आंगन।
हजरत मौलाना महमूद मदनी साहब ने कहा कि ’अब बोलने का नहीं बल्कि मिलकर कार्य करने का समय है। हमें देश की, विरायत की हिफाजत के लिये मिलकर कदम आगे बढ़ाना होगा। हमारे सभी भाई-बहनों और हमारे मुल्क के वास्ते सभी को साथ-साथ आना होगा यही आज की जरूरत है।
इस सम्मेेलन में हजारों की संख्या में  उपस्थित मौलाना और अन्य जनसमुदाय ने दोनोें आध्यात्मिक गुरूओं स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं हजरत मौलाना महमूद मदनी साहब का भव्य स्वागत किया तथा जिन्दाबाद-जिन्दाबाद के नारे पूरे सभागार में कार्यक्रम के आरम्भ से अंत तक गूंजते रहे।
स्वामी जी ने सभी को संग रहने का, मिलकर कार्य करने का संकल्प कराया और कहा कि यह बिहार की वह भूमि है जिसने क्रान्ति के संदेश दिये है, यहां पर एकता, भाईचारे के बिगुल बजे है और शान्ति की शहनाई का आगाज भी यहीं से हुआ है। शायराना अंदाज में स्वामी जी ने कहा कि ’खाई है रे हमने कसम संग रहने की वतन के लिये और चेतावनी भी दी कि जातिवाद, नक्सलवाद, आतंकवाद और भाई-भतिजावाद के उस अन्धेरों से उपर उठते हुये रोशनी का दीया जलायें। उन्होने कहा कि जमाने में ऐसी-ऐसी शेरो-शायरी है वह एक-एक शेर हमें शेर बनाता है भारत माता की; हिन्दूस्तान की रक्षा के लिये और कहा कि ’कह दो अन्धेरों से कि कहीं और घर बना लें साहेब मेरे मुल्क में रोशनी का सैलाब आने वाला है’ एक नई शुरूआत हुयी है भारत के यशस्वी एवं ऊर्जावान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वच्छता का समरसता का संदेश दिया है एवं बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने स्वच्छता, नशाबंदी और दहेजप्रथा का जो संदेश दिया है इस सब के लिये हमें उठकर खडें होना है आज तो वैसे भी बापू को चम्पारण आने को 100 वर्ष पूर्ण हुये है उस पर समरसता, स्वच्छता, एकता का नशाबंदी का ऐसा दीप जलाना है ताकि भारत पूरे विश्व में नई पहचान बना सके, एक मिशाल कायम कर सके, नई मशाल जला सके। बिहार में बहार कहीं और से नहीं आयेगी यही से आयेगी अतः अपने आप को संकल्पित करना होगा यही बदलाव का संदेश है।