दो धर्म एक धाम, कव्वाली और भजन की आवाज़ों से गूंजता एक दरबार

अलवर। जहां देश में रोजाना कही न कही से साम्प्रदायिक तनाव की खबरें आती है वहीं साम्प्रदायिक एकता का मिसाल बन रहा है अलवर का मोती डूंगरी पैलेस….राजस्थान के अलवर में मोती डूंगरी की पहाड़ी पर बना सैयद दरबार का मजार और संकटमोचन वीर हनुमान का मंदिर है, जहां बाबा सैय्यद अली और बजरंग बली एक ही छत के नीचे रहते हैं दो धर्मो की इबादत के लिए बना ये एक धाम असली हिंदुस्तान की सच्ची तस्वीर है जहां बजरंगी भी हैं और भाई जान भी।
बाबा सैय्यद अली का दरबार और संकट मोचन वीर हनुमान का मंदिर राजस्थान के अलवर में दो धर्मों के बीच एकता की एक मिसाल है इबादत की ये दो जगहें एक ही छत के नीचे हैं जहां बाबा सैय्यद अली और भगवान बजरंग बली के बीच कोई दीवार नहीं हैं।
यहां जिस माइक्रोफोन और लाउडस्‍पीकर पर भजन गाया जाता है उसी माइक्रोफोन, लाउडस्‍पीकर, ढोलक और हारमोनियम के साथ अल्लाह के लिए कव्वाली होती है यहां भगवा और हरे रंग का झंडा एक साथ लहराता है क्योंकि यही अलवर के मोती डूंगरी पैलेस की रिवायत है।

यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर के गेट से अंदर दाखिल होते हैं बजरंग बली का आर्शीवाद लेते हैं और माथे पर टीका लगवाने के बाद सिर ढककर दरगाह की तरफ बढ़ जाते हैं पहले दरगाह के चक्कर लगाते हैं और फिर सिर झुकाते हैं मन्नत का धागा बांधते हैं मंदिर और मज़ार पर दोनों जगह आराधना के लिए एक ही पूजा की थाली होती है।
“51 वर्षीय महंत नवल बाबा इस अनोखे धार्मिक स्थल की देखरेख करते हैं। जब लोग दरगाह और मंदिर के साथ-साथ होने पर हैरान होते हैं तो वह आपत्ति जताते हैं। वह कहते हैं, ‘मंदिर और दरगाह हमें एक ही मार्ग पर ले जाते हैं, तो दोनों के साथ होने में क्या परेशानी है?’
यहां एक ही छत के नीचे बाबा सैयद दरबार के मजार पर कव्वालियां भी सुनायी देती है और संकटमोचन हनुमान मंदिर में आरती भी यहाँ आने वाले किसी भी धर्म के मानने वाले हो लेकिन एक दूसरे की धार्मिक भावनों से किसी को कोई परेशानी नहीं होती, क्योंकि उनके दिल में एक दूसरे के धर्म के लिए सम्मान का भाव होता है
मोती डूंगरी पैलेस में मंगलवार और शनिवार को जय बजरंग बली का उद्घोष होता है तो गुरुवार को बाबा सैय्यद अली के जयकारे लगते हैं। वाकई ये वो जगह है जहां हर मजहबी नारा दम तोड़ देता. दिलों की दूरिया मिट जाती है न कोई जात न कोई पात यहां हर कोई एक सा ही नजर आता है।