अहिंसा, अनेकांत व अणुव्रत दर्शन मेरे प्रेरणा स्त्रोत – आचार्य लोकेश

नई दिल्लीl भारत के उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने अपने निवास स्थान पर अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डा. लोकेश मुनि को 35 वें दीक्षा दिवस की पूर्व संध्या पर बधाई देते हुए कहा कि आचार्य लोकेश शांति व सद्भावना के प्रतीक पुरुष है| वें पिछले 34 वर्षों से राष्ट्रीय चरित्र निर्माण, मानवीय मूल्यों के उत्थान तथा समाज में अहिंसा, शांति, सद्भावना की स्थापना व नैतिक मूल्यों के प्रचार प्रसार के लिए निरंतर प्रयत्नशील है| उनके इन्ही प्रयासों के लिए भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भावना पुरूस्कार से सम्मानित किया|

उपराष्ट्रपति ने कहा कि संत समाज के सच्चे मार्गदर्शक होते है| स्वस्थ समाज के निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है| भारत वर्ष में महावीर, बुद्ध, राम, नानक आदि अनेक महापुरुष हुए है| उनकी शिक्षाओं को अपनाकर, उनके आदर्शों पर चलकर स्वस्थ व समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं| उन्होंने कहा कि जैन समाज का राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है|

अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डा. लोकेश मुनि ने कहा कि मुझे 34 वर्ष पूर्व मुझे दीक्षित होने का सौभाग्य मिला| भगवान महावीर का अहिंसा, अनेकांत व अणुव्रत दर्शन विरासत में मिला| उसने मुझे सिखाया कि हम अपने अस्तित्व व विचारों की तरह दूसरों के अस्तित्व व विचारों का सम्मान करें| धर्म हमें जोड़ता है, तोड़ता नहीं| धर्म के क्षेत्र में हिंसा, घृणा, भय, नफरत का कोई स्थान नहीं हो सकता| मेरे दीक्षा गुरु आचार्य तुलसी ने मुझे सार्थक व उद्देश्यपूर्ण  जीवन जीने की प्रेरणा दी|  भगवान महावीर के बताये गए अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह व अणुव्रत के मार्ग पर चलकर हम स्वस्थ समाज, राष्ट्र व विश्व का निर्माण कर सकते है|

उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर ‘एम्बेसडर ऑफ़ पीस’ डीवीडी का लोकार्पण किया| अहिंसा विश्व भारती के श्री देवेन्द्र भाई, श्री कमलेश शाह व श्री अभय जैन ने आभार व्यक्त किया तथा संस्था की और से शाल्यार्पण कर उपराष्ट्रपति जी का सम्मान किया|