अग्निवेश की पिटाई षड्यंत्र था या फिर सियासी स्टंट

रांची/ प्रवीण राय। पाकुड़ में स्वामी अग्निवेश की पिटाई मामले पर सियासत गरम है। विपक्ष मसले को तूल देने में जुटा है। कांग्रेस और जेवीएम के नेताओं ने अग्निवेश से मुलाकात की इधर अग्निवेश ने भी पत्रकारों से बात की और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किये।

झारखंड के पाकुड़ में जो कुछ हुआ उसकी उम्मीद अग्निवेश को भी नहीं थी लेकिन कुछ लोगों के वो निशाने पर आए। कानून से खिलवाड़ नहीं राज्य सरकार ने तुरंत कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वाले के खिलाफ कार्रवाई की और डीआईजी को जांच का जिम्मा सौंपा लेकिन अग्निवेश ने जांच सिटिंग जज से कराने की मांग की है। स्वामी अग्निवेश ने कहा कि मुझे सरकार पर भरोसा नहीं है इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए ना कि पुलिसिया जांच। स्वामी अग्निवेश ने पुलिसिया जांच पर भरोसा नहीं होने की बात कही कहा कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया उन्हें भी छोड़ दिया गया। भाजपा और RSS के लोगों ने उन पर हमला की। यह घटना पूरी तरह से सुनियोजित थी।तो क्या अग्निवेश को क्या कानून व्यवस्था पर भरोसा नहीं है? उस सिस्टम पर जिसे अपने आने की कोई खबर नहीं दी थी और घटना के बाद फौरन कार्रवाई की थी।
अब सवाल ये उठता है कि क्या स्वामी अग्निवेश ने किसी के इशारे पर बयान दिया? अग्निवेश को क्या सिस्टम पर भरोसा नहीं? कौन लोग अग्निवेश से खफा हैं?
इधर, स्वामी अग्निवेश की पिटाई पर विपक्ष भी अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश में है कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय और जेवीएम अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी उनसे मिलने पहुंचे।
इस मामले पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह स्वामी अग्निवेश पर हमला नहीं ये लोकतंत्र पर हमला है हमारे जानकारी में एक भी अपराधी नहीं पकड़ा गया है जो पकड़े गए थे उसको भी छोड़ दिया गया इससे बड़ा दुखद घटना क्या हो सकती है बिना कारण के किसी कारण मारपीट करना सरकार की तरफ़ से प्रायोजित की गई है सरकार हम लोगों की आवाज़ लाठी डंडे के बल परदबा देना चाहती है।
वहीं पूर्व मंत्री सुबोध कांत सहाय ने कहा कि जिस तरह से स्वामी अग्निवेश पर हमला हुआ है या बहुत ही निंदनीय है जो आज तक कभी नहीं हुआ था मैं समझता हूं मुख्यमंत्री इसके लिए जिम्मेदार हैं।
बेशक हिंसा की समाज में कोई जगह नहीं पाकुड़ में अग्निवेश की पिटाई षड्यंत्र था या फिर सियासी स्टंट जांच का विषय है।