ब्रहमपुत्र नद के किनारे बना है 9 ग्रहों का मंदिर, मंदिर में राहु-केतु भी हैं विराजमान, मंदिर में 3 दीपक जलाने की मान्यता

गुवाहाटी/ प्रतिमा चतुर्वेदी। भारत में नवग्रह की वंदना का विधान है। पुराणों में भी नवग्रहों को देवता माना गया है. देश में नवग्रहों को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है। ये धार्मिक स्थला असम की राजधानी गुवाहाटी में ब्रहमपुत्र नद के किनारे चित्रसिला की चोटी पर स्थित है नवग्रह मन्दिर। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। मंदिर की बनावट विपरीत शिवलिंग जैसी कामाख्या मन्दिर की तरह ही है।
नौ ग्रहों को दर्शाने के लिए मंदिर के अंदर नौ शिवलिंग स्थापित किए गए हैं। हर शिवलिंग अलग-अलग रंग के कपड़ों से ढंके गए हैं। मंदिर का एक मुख्य भाग शनि धाम के रूप मे श्री शनि महाराज को समर्पित है। नौ-ग्रहों मे सर्व श्रेष्ठ सूर्य देव को मुख्य द्वार के शीर्ष पर उनके सात सफेद अश्वों के साथ स्थापित किया गया है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर सदाहिने तरफ राहु की प्रतिमा को भी स्थापित किया गया है।
इस मंदिर के बाई तरफ केतु की प्रतिमा है। मंदिर की पहली दहलीज पार करने के बाद गणेश भगवान के भी यहां दर्शन होते हैं. मंदिर परिसर में भोले नाथ, माता पार्वती श्रीकृष्ण, संकटमोचन हनुमान भी विराजमान हैं
नवग्रह मंदिर की मान्यता है कि सबसे पहले भगवान की प्रतिमाओं की पूजा होती है फइर सभी ग्रहों से मंगल कामना का आशीर्वाद लिया जाता है. सभी का आशीर्वाद लेने के बाद यहां पर तीन दीपक जलाए जाते हैं।
गोलाकार मंदिर के धरातल पर नौ शिव लिंग बने हैं। मुख्य शिवलिंग बीच में बना है और बाकी आठ शिवलिंग आठों दिशाओं में बने है।
ऐसा माना जाता है कि नवग्रह मंदिर को 18वीं शताब्दी में अहोम राजा राजेश्वर सिंह और बाद में उनके बेटे रुद्र सिंह के शासन काल में बनवाया गया था। मान्यता है कि गुवाहाटी के पुराने नाम प्रागज्योतिषपुर की उत्पत्ति मंदिर के स्थित खगोलीय और ज्योतिषीय केन्द्र के कारण ही हुई है। नवग्रह मंदिर परिसर में एक प्राचीन तालाब भी है। इसे सिलपुखुरी तालाब कहा जाता है, श्रद्धालुओं की आस्था इस तालाब से जुड़ी है। यहां खास अवसरों पर स्नान करने की मान्यता है।