5 धर्मों के 5 जजों ने तीन तलाक पर सुनाया था ऐतिहा‍सिक फैसला

दिल्ली/ रवि शर्मा। महीनों से जारी बहस के बाद आखिरकार तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ ही गया। सुप्रीम कोर्ट की पांज जजों की संवैधानिक पीठ ने तीन तलाक पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस मामले में सबसे खास बात यह है कि पांच अलग मजहबों के पांच जजों की संविधान पीठ इस केस की सुनवाई के लिए गठित की गई थी। इससे पहले 11 से 18 मई तक रोजाना सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए आज का दिन मुकर्रर किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है, ये गैर-ज़रूरी है। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है वह कानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है? आप को बतादें कि पिछले चुनाव के दौरान बीजेपी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा बन गया था। माना गया कि मुस्लिम महिलाओं के एक बड़े समूह ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को वोट किया।
इन पांच जजों की बेंच ने की सुनवाई

विवाद बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की एक बेंच बनाई जो मामले की सुनवाई कर रही है। पांच में से तीन जज इसे ख़त्म करने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। बेंच में शामिल सभी जज अलग-अलग धर्मों से हैं। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी हैं। सिख समुदाय से ताल्ल्क रखने वाले चीफ जस्टिस खेहर बेंच को लीड कर रहे हैं जबकि जस्टिस कुरियन जोसेफ ईसाई, आरएफ़ नरीमन पारसी, यूयू ललित हिंदू, अब्दुल नज़ीर मुस्लिम हैं।

जस्टिस जगदीश सिंह खेहर (सिख)

सिख समुदाय से ताल्‍लुक रखने वाले देश के पहले चीफ जस्टिस हैं। देश के 44वें चीफ जस्टिस है। 2011 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे और इसी 27 अगस्‍त को रिटायर होने वाले हैं।

जस्टिस खेहर ने कहा, तीन तालक हनफी स्कूल के सुन्नियों के लिए अहम है। उनकी संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रिपल तालक संविधान के अनुच्छेद 25, 14 और 21 का उल्लंघन नहीं करता। उन्होंने कहा, इसे संवैधानिक नैतिकता के आधार पर अलग रखा जाना चाहिए।

जस्टिस कुरियन जोसफ (क्रिश्चिएन)

केरल से ताल्‍लुक रखते हैं. 1979 में केरल हाई कोर्ट में वकालत शुरू की. 2000 में केरल हाई कोर्ट के जज बने. इस हाई कोर्ट में दो बार कार्यकारी चीफ जस्टिस बने. 2010-13 के दौरान हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस रहे. आठ मार्च, 2013 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने और अगले साल 29 नवंबर को रिटायर होंगे. जस्टिस कुरियन ने कहा, इस्लामी कानून के चार स्रोत हैं. कुरान क़ानून का पहला स्रोत है. तीन तलाक कुरान के सिद्धांतों के खिलाफ है. यह शरीयत का उल्लंघन करता है.

रोहिंग्‍टन फली नरीमन (पारसी)

1956 में जन्‍मे नरीमन महज 37 साल की उम्र में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर काउंसल बने. हालांकि उस वक्‍त इस पद के लिए कम से कम 45 साल की उम्र का होना जरूरी था लेकिन जस्टिस वेंकटचेलैया ने फरीमन के लिए नियमों में संशोधन किया. पश्चिमी शास्‍त्रीय संगीत में रुचि और इसके गहन जानकार हैं. प्रकृति प्रेमी हैं. जस्टिस रोहिंटन ने कहा, यह तलाक का ऐसा रूप है जिसे कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। यहां तक कि हनफी कानून में भी तीन तालाक को ‘पाप’ कहा गया है। 1937 का अधिनियम, अनुच्छेद 13 का उल्लंघन नहीं करता है। उन्होंने कहा, याचिकाकर्ता कोर्ट आए हैं तो अदालत अपने हाथ नहीं खींच सकता. अब अदालत को फैसला करना ही होगा कि यह कानूनी वैध है या नहीं।

जस्टिस उदय उमेश ललित (हिंदू)

1957 में जन्‍मे जस्टिस ललित ने 1983 में बांबे हाई कोर्ट से वकालत शुरू की. अप्रैल, 2004 में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट बने. 2जी मामले में सीबीआई की तरफ से विशेष अभियोजक रहे. 2014 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने. 2022 में रिटायर होंगे. जस्टिस ललित ने तीन तलाक को लेकर जोसेफ के दृष्टिकोण का समर्थन किया।

जस्टिस एस अब्‍दुल नजीर (मुस्लिम)

1958 में जन्‍मे जस्टिस नजीर ने 1983 में कर्नाटक हाई कोर्ट में वकालत शुरू की. 2003 में कर्नाटक हाई कोर्ट के अतिरिक्‍त जज बने और उसके अगले ही साल स्‍थायी जज बने. इसी साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्‍त हुए। जस्टिस नजीर ने ट्रिपल तलाक पर फैसले के दौरान जस्टिस खेहर के दृष्टिकोण का समर्थन किया।