भारतीय संस्कृति में नृत्य है विशिष्ट विशेषताओं की समग्र कला-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। विश्व नृत्य दिवस के अवसर पर परमार्थ गंगा तट पर 15 वाँ हिडेन इडोल अन्तर्राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया जिसका शुभारम्भ परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी, शहरी विकास मंत्री श्री मदन कौशिक जी, श्रीमती बीना भट्ट जी, निदेशक सांस्कृतिक विभाग उत्तराखण्ड ने किया।
नेहरू युवक केन्द्र, मिनिस्ट्री आॅफ युथ अफेयर्स भारत सरकार, मिनिस्ट्री आॅफ कल्चरल तमिलनाडू के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित यह नृत्य महोत्सव ’मेक इन इन्डिया’ और ’नमामि गंगे’ की उत्कृष्ट पहल है।
नृत्य महोत्सव में नृत्य की विभिन्न विधाओं का प्रदर्शन विश्व स्तर के कलाकारों द्वारा किया गया इस कड़ी में पम्बई काई सिलंबटृम (मार्शल आर्ट डंास) श्री मंजुनाथन द्वारा, काऊ और पीकाॅक नृत्य श्री अमूलनाथन द्वारा, स्ट्रीट डांस श्री मुनीराज, पम्बई नृत्य श्री पोंगवनम, शास्त्रीय कथक नृत्य सुश्री अनु रावल, उत्तराखण्ड गढ़वाली लोक नृत्य श्रीमती रावत द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस मनमोहक नृत्य महोत्सव के मंच से सवामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा, ’’नृत्य एक सार्वभौमिक कला है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी नृत्य की अंनत शौलियों का विशेष महत्व है। यमंगल के मताअनुसार चैसठ कलाओं में से एक नृत्य कला है। ऐसा कहा जाता है कि बह्मा जी ने चारों वेदों के कतिपय पहलुओं का समावेशन कर नाट्य वेद का सजृन किया था। भारत की सभी प्राचीन संस्कृतियांे में किसी न किसी रूप से नृत्य विद्यमान है। हिन्दू धर्म ने अपनी जड़ों के साथ सदियों से नृत्य कला को महत्व दिया है जिसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण भगवान शिव द्वारा किया गया ’’नटराज’’ है। हम भगवान शिव के तांडव नृत्य को लें या भीमबेटक का सामुदायिक नृत्य अथवा हड़प्पा की सभ्यता में नृत्य करती महिलाओं की कास्य निर्मित मूर्तिया हो ये सब सजृन का प्रतीक मानी जाती थी। स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नृत्य विशिष्ट विशेषताओं की समग्र कला है वर्तमान समय में इस नृत्य कला को पर्यावरण संरक्षण के लिये समर्पित करना ही समय की जरूरत है।
इस नृत्य महोत्सव में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित जन समुदाय को सम्बोंधित करते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी से आह्वान किया कि पर्यावरण एवं नदियों के संरक्षण हेतु अपना अमुल्य योगदान प्रदान करें क्योंकि बिना नदियों के हमारी संस्कृति अधूरी है और बिना जल के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जल है तो कल है, अतः जल का संरक्षण कर भविष्य को सुरक्षित करने हेतु मिलकर कार्य करना होगा।’’
उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी, ने कहा कि ’’भारत बहुधर्मी, बहु संास्कृतिक एवं बहु पारंपरिक देश है परन्तु नृत्य कला ने सभी को एकता के सूत्र में बांधकर रखा है। नृत्य केवल एक अभिनय नहीं बल्कि हमारी संस्कृति का प्राणतत्व है।’’
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक जी के कहा कि ’’नृत्य मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि आराधना की अभिव्यक्ति है। नृत्य, जीवन के उत्सव को प्रदर्शित करता है। उन्होने कहा कि अब हम सभी स्वामी जी महाराज के मार्गदर्शन में प्रकृति और पर्यावरण के उत्सव के लिये मिलकर कार्य करने हेतु संकल्पित होते है।’’
स्वामी जी महाराज के पावन सान्निध्य में सभी विशिष्ट अतिथियों एवं कलाकारों ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति एवं स्वच्छता हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। नृत्य महोत्सव के समापन अवसर पर स्वामी जी महाराज ने सभी को पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। साथ ही सर्वश्रेष्ठ नृत्य प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को विशिष्ट अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया।
भारत के विभिन्न प्रांतों से आये कलाकारों ने परमार्थ तट पर होने वाली दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया।